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योगी सरकार का बड़ा फैसला: पीलीभीत में 200 एकड़ में बनेगा बायो-फार्मा पार्क, वैक्सीन से जीन थेरेपी तक की बनेंगी दवाएं

Published: Wed, 04 Nov 2026 05:58 PM (IST)

योगी सरकार पीलीभीत के भरा पचपेड़ा में 200 एकड़ में बायो-फार्मा पार्क विकसित कर रही है। यहां वैक्सीन, जीन थेरेपी, ...और पढ़ें

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HighLights

  1. इंसुलिन और मोनोक्लोनल एंटीबाडीज के उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

  2. नेपाल सीमा से निकटता और बेहतर रेल कनेक्टिविटी से निवेशकों को होगा लाभ

  3. फार्मा फार्मूलेशन से बायो मैन्युफैक्चरिंग तक निवेश और अनुसंधान को प्रोत्साहन

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। प्रदेश को फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलोजी मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने पीलीभीत में बायो-फार्मा उद्योग विकसित करने की पहल की है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ में आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। इसमें 200 एकड़ बायो-फार्मा पार्क के लिए चिह्नित है। यहां वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबाडीज के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के डायरेक्टर और विशेष विशेषज्ञ डाॅ. जीएन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बड़े शहरों से आगे क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाना है।

इस परियोजना से निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। भरा पचपेड़ा के औद्योगिक क्षेत्र में 575.79 एकड़ औद्योगिक भूखंड, 60.98 एकड़ साझा सुविधा क्षेत्र, 109.23 एकड़ हरित क्षेत्र और 96.20 एकड़ सड़क नेटवर्क के लिए निर्धारित हैं।

आबादी क्षेत्र और अन्य श्रेणियों के लिए भी भूमि रखी गई है। फिलहाल 14 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं। 200 एकड़ में विकसित हो रहे पार्क में फार्मा फार्मूलेशन और बायोटेक्नोलोजी आधारित उत्पादन से जुड़ी इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

विशेष विशेषज्ञ सिंह के अनुसार, पीलीभीत का तापमान और जलवायु बायो-फार्मूलेशन गतिविधियों के अनुकूल माने जाते हैं। जैविक औषधियों के निर्माण और भंडारण में तापमान अहम होता है।

जिले की नेपाल सीमा से निकटता और मजबूत रेल कनेक्टिविटी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है। भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र पीलीभीत शहर से लगभग 36 किलोमीटर, बरेली से 100 किलोमीटर और लखनऊ तथा दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर है।

इससे कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन को गति मिल सकती है। नेपाल से निकटता के कारण यह क्षेत्र निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार के लिए भी उपयोगी हो सकता है। योजना में उद्योगों के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर है।

बायोटेक्नोलोजी टेक्नोलोजी इंस्टीट्यूट के विकास तथा स्किल डेवलपमेंट और इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग स्थापित करने की योजना है। इससे प्रशिक्षण, नई तकनीकों और स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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