बरेली के बंदर बन सकते हैं पीटीआर के वन्यजीवों के लिए खतरा, डीएफओ बोले- बिना अनुमति छोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
बरेली नगर निगम द्वारा पकड़े गए बंदरों को बिना अनुमति और चिकित्सीय जांच के पीलीभीत व शाहजहांपुर के जंगलों में ...और पढ़ें

पीटीआर के वनक्षेत्र में विचरण करता बंदरों का झुंड। जागरण आर्काइव
HighLights
वन विभाग के अधिकारियों से बिना अनुमति पीलीभीत व शाहजहांपुर के जंगलों में बंदरों को छोड़ने की तैयारी
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। बरेली नगर निगम द्वारा पकड़े जाने वाले बंदरों को बिना किसी पूर्व अनुमति और चिकित्सीय जांच के पीलीभीत और शाहजहांपुर के वनक्षेत्रों में छोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इस जानकारी के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और वन एवं वन्यजीव प्रभाग के अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है।
उनका मानना है कि बिना चिकित्सीय परीक्षण के शहरी बंदरों को जंगल में छोड़ने से वन्यजीवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ेगा और पीटीआर का संवेदनशील इकोसिस्टम प्रभावित होगा।
बरेली नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा के एक ठेकेदार को कार्यादेश जारी किया है। इस अभियान के तहत पकड़े गए बंदरों को पीलीभीत और शाहजहांपुर के जंगलों में छोड़ा जाना प्रस्तावित है।
नगर निगम प्रशासन या ठेकेदार ने वनाधिकारियों से कोई अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं की है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जब ये बंदर जंगल में छोड़े जाएंगे, तो स्थानीय जंगली बंदरों के साथ संघर्ष होगा, जिससे वे गांवों की ओर बढ़ सकते हैं।
इससे किसानों की फसलों को नुकसान होगा और पीटीआर के पारिस्थितिकी तंत्र को भी खतरा होगा। बिना चिकित्सीय जांच के शहरी बंदरों को वन्य क्षेत्रों में छोड़ना जैविक खतरा बन सकता है। शहरी बंदरों में विभिन्न प्रकार के संक्रमण की संभावना होती है, जो जंगल के स्वस्थ वन्यजीवों में तेजी से फैल सकती है।
पीटीआर में बंदरों को रिलीज करने को लेकर कोई आवेदन नहीं मिला है। संरक्षित वनक्षेत्र में किसी भी बाहरी जानवर को छोड़ना गैरकानूनी है। ऐसा करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई व जुर्माने का प्रविधान है। ऐसा करते पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
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