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हजारों किलोमीटर का सफर तय कर पीलीभीत टाइगर रिजर्व पहुंचे 400 विदेशी मेहमान, आसमान में दिखा अद्भुत नजारा

Published: Mon, 05 Oct 2026 09:50 AM (IST)Updated: Mon, 05 Oct 2026 09:53 AM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लगभग 400 डेमोसिल क्रेनों का एक बड़ा झुंड देखा गया, जो हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचे हैं।

आसमान में विचरण करता डेमोसिल क्रेन का झुंड

आसमान में विचरण करता डेमोसिल क्रेन का झुंड

HighLights

  1. पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 400 डेमोसिल क्रेन पहुंचे।

  2. हजारों किलोमीटर की यात्रा कर प्रवासी पक्षी यहां आते हैं।

  3. पीटीआर की समृद्ध जैव विविधता का यह प्रमाण है।

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। बाघों की दहाड़ के लिए प्रसिद्ध पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की आबोहवा अब विदेशी परिंदों की चहचहाहट से भी गुलजार होने लगी है। शनिवार दोपहर पीटीआर के आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब करीब 400 डेमोसिल क्रेनों (सारस प्रजाति) के एक बड़े झुंड ने यहां अपना अस्थायी पड़ाव डाला।

खुले क्षेत्र में एक साथ उड़ान भरते और विचरण करते इन खूबसूरत प्रवासी पक्षियों ने वन्यजीव व पक्षी प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। डेमोसिल क्रेन पीटीआर में हर वर्ष दिखाई देने वाले प्रमुख प्रवासी पक्षी हैं।

सर्दियों की आहट के साथ ही हजारों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर प्रवासी पक्षी भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचते हैं। हालांकि, पीलीभीत में इनका ठहराव बहुत लंबी अवधि का नहीं होता है। कई बार ये परिंदे महज कुछ घंटों के लिए यहां रुकते हैं, तो कभी जैसे शांत माहौल, पर्याप्त भोजन और पानी मिलने पर इनका यह पड़ाव दो से तीन दिन तक भी रहता है।

पीटीआर क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी बेहद अनुकूल

इसके बाद ये अपने आगे के प्रवास मार्ग पर निकल जाते हैं। प्रवास के दौरान इन पक्षियों के लिए खुले मैदान, घासभूमियां, कृषि क्षेत्र और जलस्रोतों के आसपास के शांत इलाके सबसे अहम पड़ाव होते हैं। पीलीभीत का तराई क्षेत्र अपनी इसी प्राकृतिक विविधता के कारण इन पक्षियों को एक आदर्श अस्थायी आश्रय प्रदान करता है।

आसमान में एक साथ उड़ान भरते सैकड़ों क्रेनों का समूह पीटीआर की समृद्ध जैव विविधता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि तराई का प्राकृतिक परिदृश्य प्रवासी पक्षियों के मार्ग में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खान बताते हैं कि डेमोसिल क्रेनों का पीटीआर में हर वर्ष आना यहां के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सुखद संकेत है। पीटीआर की पहचान केवल बाघों और बड़े वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी बेहद अनुकूल है।

हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते हैं पक्षी

इन विदेशी मेहमानों का यहां पहुंचना यह याद दिलाता है कि स्थानीय वन्यजीवों के साथ-साथ हजारों किलोमीटर की यात्रा कर आने वाले इन पक्षियों के लिए भी हमें अपने प्राकृतिक आवासों और शांत वातावरण का संरक्षण करना चाहिए। टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खान का कहना है कि डेमोसिल क्रेनों का पीलीभीत में हर वर्ष आना यहां के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सुखद संकेत है।

पीटीआर की पहचान केवल बाघों और बड़े वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी बेहद मुफीद है। इन विदेशी मेहमानों का यहां पहुंचना यह याद दिलाता है कि स्थानीय वन्यजीवों के साथ-साथ हजारों किलोमीटर की यात्रा कर आने वाले इन पक्षियों के लिए भी हमें अपने प्राकृतिक आवासों और शांत वातावरण का संरक्षण करना चाहिए।

प्रवासी पक्षियों के लिहाज से पीटीआर समेत जिले के कई स्थान काफी अधिक महत्वपूर्ण हैं। इनकी सुरक्षा व संरक्षण के लिहाज से हर संभव प्रयास किए जाते हैं। इनके प्रवास के दौरान विशेष निगरानी की जाती है। बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की आमद पीटीआर की जैव विविधता का जीता जागता प्रमाण है।

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