दुधवा के बाद अब Pilibhit Tiger Reserve में बसेंगे गैंडे! केंद्र की नई नीति से जगी राइनो प्रोजेक्ट की उम्मीद
भारत में गैंडों की बढ़ती आबादी और दुधवा टाइगर रिजर्व की सफलता के बाद, केंद्र की नई नीतियों से पीलीभीत ...और पढ़ें

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HighLights
शारदा पार के लग्गा-भग्गा माना जाता है अनुकूल, संस्तुति मिलते ही धरातल पर उतरेगी गेंडा परियोजना
सृजित अवस्थी, पीलीभीत। भारत में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण की कवायद को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। देश में गैंडों का कुनबा बढ़कर 3,323 हो गया है, जबकि पड़ोसी जिले खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में भी यह आंकड़ा 53 तक पहुंच गया है। नेपाल सीमा से सीधे जुड़े होने से पीटीआर के लिए केंद्र की नई रणनीति बेहद अहम है।
माना जा रहा है कि डीएनए तकनीक से लैस इस नए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के बूते पीटीआर में लंबे समय से लंबित गैंडा परियोजना को जल्द हरी झंडी मिल सकती है। गैंडों के लिए नया कारिडोर तलाशने के उद्देश्य से बीते वर्ष सर्वे भी हो चुका है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि दुधवा की सफलता और राष्ट्रीय स्तर पर गैंडों की बढ़ती आबादी पीटीआर के भविष्य के लिए एक बेहद शुभ संकेत है।
नई नीतियों में सीमापार सहयोग की अपेक्षा के लिहाज से पीटीआर महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। हालांकि, एक वर्ष बीतने के बाद भी सर्वे की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से साझा की गई आइआरएफ-2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर गैंडों की आबादी 26,700 तक पहुंच गई है।
एशिया में कुल 4,075 एक सींग वाले गैंडों में से 3,323 केवल भारत और 752 नेपाल में हैं। देश में असम के काजीरंगा के बाद प्रदेश के इकलौते गैंडा अधिवास दुधवा टाइगर रिजर्व में भी यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है।
पिछले वर्ष 48 की तुलना में इस वर्ष जून तक दुधवा में 53 गैंडे हो गए हैं। राष्ट्रीय गैंडा संरक्षण रणनीति के तहत दुधवा में 53 में से 43 गैंडों की डीएनए सैंपलिंग पूरी कर ली गई है।
इससे चार शावकों और चार सब-एडल्ट की वंशावली की सटीक पहचान होगी। इसके साथ ही संरक्षण के लिए मिले विशेष फंड से पांच वर्ष का वार्षिक प्लान आफ आपरेशन भी तैयार किया जा रहा है।
केंद्र सरकार की इस नई रणनीति में गैंडों के नए अधिवास तलाशने और नेपाल-भूटान के साथ सीमा पार सहयोग पर विशेष जोर दिया गया है। यह पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए भी शुभ संकेत लेकर आया है।
पीटीआर का प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर लग्गा-भग्गा क्षेत्र नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से सटा है। क्षेत्र के घास के मैदान और दलदली भूमि गैंडों के लिए बेहद मुफीद है, जिसके चलते अक्सर नेपाली गैंडों की आमद यहां दर्ज की जाती है।
गैंडों के अनुकूल माहौल को देखते हुए वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार ने पीटीआर से गैंडा परियोजना के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। वन विभाग ने तब माला और महोफ रेंज के करीब 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को गैंडों के लिए पूरी तरह उपयुक्त बताया था।
गैंडा परियोजना को धरातल पर उतारने और सुरक्षा का माहौल परखने के लिए बीते वर्ष मार्च में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक हाई लेवल सेफ्टी आडिट टीम ने दौरा किया था।
गैंडा परियोजना के तत्कालीन प्रमुख बीएस बोनाल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कंट्री हेड डा. अमित शर्मा, बरेली के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक, पीटीआर के प्रभागीय वनाधिकारी और पशु चिकित्सक की टीम ने लगातार तीन दिनों तक पीटीआर के जंगल, कारिडोर का निरीक्षण किया था।
हालांकि, एक वर्ष से अधिक का समय बीतने के बाद भी पीटीआर प्रशासन को आडिट रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि, केंद्र की ओर गैंडा संरक्षण के लिए बनाई गई नयी नीतियां पीटीआर के लिए भी शुभ संकेत हैं।
नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से अक्सर गैंडों की यहां आवाजाही होती रहती है। पीटीआर में गैंडा परियोजना शुरू करने को लेकर पूर्व में ही शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। बीते वर्ष उच्च स्तरीय सेफ्टी आडिट भी हो चुका है। केंद्र सरकार की आडिट रिपोर्ट व उच्चाधिकारियों के निर्देशों का इंतजार है।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
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