'बहन जल्दी आ जा...पापा जलती बस में फंस गए हैं', यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे में उजड़े कई परिवार; तलाशते रहे अपनों को
यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात एक स्लीपर बस में भीषण आग लगने से नौ यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई, ...और पढ़ें

यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में लगी आग में जले मृतकों की पहचान करने नोएडा सेक्टर-94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे स्वजन और मौजूद पुलिस। जागरण
HighLights
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग से नौ यात्रियों की मौत।
स्वजन पोस्टमार्टम हाउस पर अपनों के शवों की पहचान में जुटे।
ड्राइवर-कंडक्टर की लापरवाही से आग तेजी से फैलने का आरोप।
सुमित शिशोदिया, नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात 35 यात्रियों से भरी स्लिपर बस में अचानक भीषण आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई। दर्दनाक घटना ने परिवारों के पैरों तले जमीन खिसका दी।
सेक्टर-94 में पोस्टमार्टम हाउस पर क्षत-विक्षत हालत में रखे शवों के बीच अपनों को पहचानने पहुंचे स्वजन परेशान और गुस्से में थे। उनके माथे पर चिंता की लकीरें थीं, तो आंखों में दुख का सागर उमड़ रहा था।
इन्हीं पीड़ितों में से एक नोएडा निवासी राधिका ने बताया कि भाई ने फोन पर कहा था, 'बहन तुम जल्दी से आ जाओ...पापा बस में फंस गए हैं।'
बाहर तलाश रही थीं पिता को, डीप फ्रीजर में था शव
उरई के राजेंद्र नगर की राधिका मोबाइल में पिता हरीशरण गुप्ता की फोटो लोगों को दिखाकर उनसे मिलवाने के लिए बोल रही थीं। राधिका को जरा भी अंदेशा नहीं था कि बस के अंदर बुरी तरह झुलसने पर पिता की दर्दनाक मौत हो चुकी थी और शव डीप फ्रीजर में रखा था।
नोएडा निवासी राधिका ने बताया कि 17 वर्षीय भाई ओम गुप्ता भी नोएडा में बीटेक की पढ़ाई करता है। पिता हरीशरण बुधवार दोपहर उरई से नोएडा छोटे भाई को लेने आए थे। रात करीब 12 बजे वह भाई को लेकर घर जा रहे थे। उस समय वह ओम से फोन पर बात कर रही थीं।
जले हुए शवों में अपनों को पहचानना मुश्किल
वह बताती हैं, आखिरी बार फोन पर खाने-पीने के बारे में पूछा था। रात करीब ढाई बजे ओम ने जैसे ही रोते-रोते राधिका को बताया कि बहन, बस में आग लग गई और पापा अंदर फंस गए हैं। अब तू जल्दी कैब लेकर यहां आजा। इतना सुनकर उनके होश उड़ गए।
वह मौके पर पहुंचीं तो बस में आग लगी देखकर होश फाख्ता हो गए। घायल भाई और बहन ने मिलकर बस में पिता को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन सीटों पर और आसपास सामान बिखरा पड़ा था।
बुरी तरह जले पड़े लोगों में पिता को पहचान नहीं पा रहे थे। हरीशरण के साले रिंकू उर्फ राकेश ने बताया कि जीजा अपने परिवार से काफी प्यार करते थे। वह ओम की तबीयत बिगड़ने पर उसे यहां से लेने आए थे।
ड्राइवर-कंडक्टर पी रहे थे सिगरेट
यात्री सुनील ने बताया कि चलती बस में ड्राइवर और कंडक्टर सिगरेट पी रहे थे। लोगों ने विरोध किया तो दोनों हंसने लगे और बस नहीं रोकी। कुछ देर में धुआं के बाद आग फैलने पर लोग जोर से भी चिल्लाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
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पायल देखकर दादी को पहचाना
हिसार में रहने वाले सर्वज्ञ ने बताया कि पिता देवेंद्र भारद्वाज हिसार के एक विश्वविद्यालय में शिक्षक थे। मां रेखा और पिता देवेंद्र दोनों महोबा में दादी के देहांत के बाद जा रहे थे। मां रेखा बीमार रहती हैं। उनका ग्रेटर नोएडा के अस्पताल से इलाज चल रहा है। वहीं, बुजुर्ग ऊषा देवी के शव की पहचान उनकी नातिन आयुषी ने की। सबसे पहले स्वजनों ने ऊषा देवी के पैरों में पायल देखी। उसके बाद हाथ और शरीर के अन्य अंगों से शिनाख्त की।
गेट और खिड़कियों को कटर से काटकर बाहर निकाले शव
पोस्टमार्टम हाउस पर पुलिस ने स्वजनों को बताया कि बस में आग लगने के बाद तेल का टैंकर भी धमाके के साथ फट गया था। इससे पहले कटर से खिड़की और गेट काटकर झुलसे लोगों को बाहर निकाला गया। बस की डिग्गी में काफी मात्रा में नेल पाॅलिश मिली हैं। वहां एक सिलिंडर भी रखा था। जांच में आया कि नेल पाॅलिश और सिलिंडर से आग तेजी से फैली।
तीन शव की अभी होनी है शिनाख्त
पोस्टमार्टम हाउस के सूत्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार को विभिन्न घटनाओं के कुल 13 शव पहुंचे थे, जिनमें से 9 शव बस में लगी आग के घटना के थे। इनमें से स्वजनों ने देवेंद्र भारद्वाज निवासी हिसार, ऊषा देवी पत्नी प्रेम नारायण, श्रुति रावत पुत्री बाल मुकुंद रावत, हरीशरण गुप्ता पुत्र अवध बिहारी गुप्ता, मयंक गुप्ता पुत्र सुरेश गुप्ता और सरोज गुप्ता पत्नी अनंतराम गुप्ता जबकि तीन अन्य शवों की अभी तक पहचान नहीं हुई है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने सभी शवों के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।
