दिल्ली-NCR से चल रहीं 2 हजार अवैध बसें, सरकार को हर साल 3 हजार करोड़ से ज्यादा की चपत; यात्री भी असुरक्षित
दिल्ली-एनसीआर से दूसरे राज्यों के लिए अवैध रूप से चल रही 1500-2000 बसें सरकार को सालाना 3000 करोड़ रुपये से ...और पढ़ें

परिवहन विशेषज्ञों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों के अनुमान के अनुसार, सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी से अंतरराज्यीय रूटों पर 1500 से दो हजार अवैध बसें संचालित होती हैं। एआई इमेज
HighLights
दिल्ली-एनसीआर से 1500-2000 अवैध बसें संचालित हो रही हैं।
सरकार को सालाना 3000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से फल-फूल रहा अवैध कारोबार।
मनु त्यागी, नई दिल्ली। दिल्ली सहित एनसीआर से दूसरे राज्यों के लिए अवैध रूप से बसें चला रहे परिवहन माफिया और भ्रष्ट तंत्र के गठजोड़ से राजस्व में बड़ी सेंध लग रही है। इसका मुख्य कारण परिवहन विभाग, स्थानीय पुलिस और यातायात पुलिस के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत या उदासीनता है।
सरकार को सालाना 3000 करोड़ की चपत
परिवहन विशेषज्ञों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों के अनुमान के अनुसार, सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी से अंतरराज्यीय रूटों पर 1500 से दो हजार अवैध बसें संचालित होती हैं, जिनके कारण सरकार को सालाना तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की चपत लग रही है। वहीं, इन बसों के हादसों के कारण हर दूसरे दिन किसी न किसी राज्य में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
सरकारी बसें कम, अवैध निजी बसें सुलभ
दिल्ली सहित एनसीआर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल, उत्तराखंड के प्रवासी बहुतायत में रहते हैं, लेकिन सरकारी बसों की कमी के कारण वे अपने घर जाने के लिए निजी बसों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे अवैध कारोबार पनप रहा है।
न ही दिल्ली सरकार के पास इन राज्यों के लिए पर्याप्त संख्या में बसें हैं और न ही इन राज्यों के परिवहन निगमों के पास दिल्ली के लिए पर्याप्त संख्या में अंतरराज्यीय बसें हैं, जिसका फायदा निजी बस संचालक उठाते हैं।
हर समय उपलब्ध रहती हैं बसें
सरकारी बसें एक निश्चित समय सारणी और तय डिपो से भी चलती हैं। वे यात्रियों की सुविधा के अनुसार रात में या हाइवे के बीच से सवारियां नहीं उठातीं हैं। लंबी दूरी के सफर के लिए यात्री स्लीपर और एसी बसों को प्राथमिकता देते हैं, जिसके कारण निजी बसों को यात्रियों की कमी नहीं होने पाती। सरकारी बसें रात 11-12 बजे के बाद कम मिलती हैं, जबकि ये अवैध बसें देर रात और तड़के सुबह भी उपलब्ध रहती हैं।
ये है अवैध कारोबार की चेन
गौतमबुद्ध नगर में काफी समय रहे एक पूर्व एआरटीओ बताते हैं कि अवैध रूप से संचालित बसों के कारण सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होता है, लेकिन फिर भी उसी सरकारी व्यवस्था में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों के जरिये ही अवैध कारोबार संचालित भी होता है।
एक बस ऑपरेटर जिसका पहले राज कल्पना ट्रैवलर्स से ही अनुबंध था, उसने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन बसों का असल मुनाफा सिर्फ यात्रियों के टिकटों से ही नहीं, बल्कि चांदनी चौक, सदर बाजार व कश्मीरी गेट से होने वाली अवैध माल ढुलाई से भी होता है। ये बसें बिना जीएसटी बिल और ई-वे बिल के करोड़ों का माल उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में आपूर्ति करती हैं।

कार्रवाई हो तो बढ़ जाती है रोडवेज की आय
राष्ट्रीय राजमार्गों, यमुना एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न मार्गों पर 15 हजार से अधिक अवैध बसें संचालित होने का अनुमान है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इससे रोजाना करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जिससे परिवहन निगम को भी राजस्व का नुकसान होता है।
लखनऊ में 300 करोड़ का है पूरा कारोबार
लखनऊ के परिवहन विभाग के अधिकारी के अनुसार, जब इनपर कार्रवाई तेज होती है तो रोडवेज की रोजाना आय में करीब दो करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो जाती है। हिमाचल में शिमला, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला, बैजनाथ सहित कई अन्य स्थानों के लिए रोजाना 300 के करीब लक्जरी बसें पहुंचती हैं, जिनका सालाना कारोबार 300 करोड़ से ज्यादा का है।
बिहार में डग्गामार बसों का सालाना कारोबार 500 करोड़ का
एक अनुमान के अनुसार, बिहार में डग्गामार बसों का सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये तक का होता है। उत्तराखंड में दिल्ली सहित एनसीआर के साथ ही दो दर्जन से अधिक शहरों के लिए करीब 200 निजी बसें संचालित होती हैं। अवैध रूप से संचालित इन बसों का कारोबार 150 से 200 करोड़ रुपये सालाना है, जिसका सीधा नुकसान सरकार को ही होता है।
