किसानों की जमीन लेकर भूला यमुना प्राधिकरण? दयौरार गांव के 500 मीटर रास्ते पर सालों से भरा पानी
यमुना प्राधिकरण पर दयौरार गांव के लोगों ने जमीन अधिग्रहण के बाद बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

थोरा से दयौरार सेक्टर आठ डी के लिए जाने वाला मार्ग जलभराव, कीचड़ और गंदगी की वजह से सड़क की जगह बना गंदा नाला। जागरण
HighLights
यमुना प्राधिकरण पर जमीन लेकर गांव की अनदेखी का आरोप।
दयौरार गांव के रास्ते पर सालों से 500 मीटर जलभराव।
स्कूली बच्चों, ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है।
जागरण संवाददाता, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। यमुना प्राधिकरण गांव और किसानों को केवल जमीन खरीदने भर तक याद करता है ये कहना है वर्षो से कई फीट जलभराव के बीच से गुजर रहे दयौरार गांव के लोगों का। थोरा से दयौरार गांव के लिए जाने वाले मार्ग पर थोरा गांव से निकलने के साथ ही जलभराव की समस्या बनी हुई है। लोगों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए कई बार प्राधिकरण को शिकायत भी दी है लेकिन आजतक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
ग्रामीणों की खबर सुध लेने वाला कोई नहीं
नतीजतन, स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर ड्यूटी पर जाने वाले युवाओं और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए भी रास्ते से निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सेक्टर आठ डी की जमीन लेने के लिए प्राधिकरण के अधिकारी गांव आए थे लेकिन जमीन लेने के बाद अब ग्रामीणों की खबर सुध लेने वाला कोई नहीं है।
ग्रामीणों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही
सेक्टर बसाने के लिए किसानों की जमीन लेने यमुना प्राधिकरण के अधिकारी गांव पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हीं गांवों के लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने की बारी आती है तो सालों तक सुध नहीं ली जाती। दयौरार गांव के ग्रामीण इसकी कीमत रोजाना चुका रहे हैं।
थोरा गांव निकलते ही करीब 500 मीटर लंबे मार्ग पर वर्षों से भरे कई फीट पानी के बीच से स्कूली बच्चों, किसानों और नौकरीपेशा लोग गंदगी और कीचड़ के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। शिकायतें कई बार हुईं, लेकिन जलभराव से मुक्ति आज तक नहीं मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बार यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वर्षों से बनी इस समस्या के कारण ग्रामीणों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जिम्मेदारी से पीछे क्यों हट रहा है?
जेवर से गांव जाने के लिए एक मात्र रास्ता थोरा गांव से होकर जाता है जिसपर स्कूली बच्चों के अलावा आम लोग और एयरपोर्ट में नौकरी करने वाले सैकड़ो युवा आवागमन करते हैं। प्राधिकरण औद्योगिक विकास के लिए गांवों की जमीन ले सकता है, तो ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से पीछे क्यों हट रहा है?
-कुशलपाल सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान दयौरार।
वर्षों से जलभराव की समस्या को नाली और सड़क बनाकर खत्म करते हुए समस्या का जल्द समाधान किया जाना चाहिए। ताकि बच्चों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों को रोजाना जलभराव के बीच से गुजरने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके।-सत्तू सिंह, निवासी दयौरार।
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