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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 1.76 लाख करोड़ के निवेश का क्या हुआ? 25 अक्टूबर से पहले शासन को देनी होगी रिपोर्ट

Published: Thu, 15 Oct 2026 07:55 AM (IST)

शासन ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले पांच साल के निवेशक सम्मेलन समझौतों और परियोजनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश शासन ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट 25 अक्टूबर से पहले देना है। प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश शासन ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट 25 अक्टूबर से पहले देना है। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. पिछले 5 साल के निवेश समझौतों पर रिपोर्ट मांगी।

  2. 25 अक्टूबर तक देनी होगी विस्तृत जांच रिपोर्ट।

  3. ₹1.76 लाख करोड़ के निवेश की होगी समीक्षा।

जागरण संवाददाता, नोएडा। शासन ने नोएडा से पिछले पांच साल में निवेशक सम्मेलन के दौरान हुए समझौतो (एमओयू) और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट 25 अक्टूबर से पहले देना है। इन्वेस्टर समिट और ग्राउंड बेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) से जुडा यह मामला है। बड़े-बड़े समझौतों के बाद हकीकत में कितनी कंपनियां स्थापित हुईं और कितनी में उत्पादन या कारोबार शुरू हो सका, अब इसका हिसाब लिया जाएगा। 

निवेश मित्र और प्राधिकरण की संयुक्त टीम सहयोग करेगी

रिपोर्ट देने में निवेश मित्र और प्राधिकरण की संयुक्त टीम सहयोग करेगी। टीम मौके पर जाकर कंपनियों की स्थिति की जांच करेगी। सर्वे में यह भी पता लगाया जाएगा कि कितनी कंपनियां शुरू होने के बाद बंद हो गईं और कितनी परियोजनाएं अब तक जमीन पर नहीं उतर सकीं।

2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निवेश के लिए करीब 1.76 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए थे। इसमें नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के लिए करीब 89 हजार करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा के लिए करीब 87 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल थे।

इन समझौतों के जरिए औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक परियोजनाओं और अन्य क्षेत्रों में निवेश का लक्ष्य रखा गया था। इसके बाद ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान दोनों प्राधिकरणों ने अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल करने की जानकारी दी थी।

अब तक भूखंड आवंटित नहीं हो सके

शासन को दी जाने वाली रिपोर्ट में कंपनियों से मिले रोजगार और निवेश के समझौतों में जितने रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया था, उसके मुकाबले वास्तव में कितने लोगों को काम मिला। इसके साथ उन कंपनियों की जानकारी भी जुटाई जाएगी, जिन्हें अब तक भूखंड आवंटित नहीं हो सके हैं।

भूखंड आवंटन में देरी या रुकावट की वजह भी बतानी होगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि परियोजनाएं किन कारणों से अटकी हुई हैं और उन्हें शुरू कराने के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है। शासन के निर्देश के तहत पिछले पांच साल के निवेश प्रस्तावों और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल परियोजनाओं का रिकॉर्ड जांचा जाएगा।

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