देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बना ग्रेटर नोएडा, टूटी सड़कों की धूल ने बढ़ाई आफत; ऑरेंज जोन में AQI
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में टूटी सड़कों व निर्माण से उड़ती धूल के कारण वायु गुणवत्ता गंभीर बनी हुई है। ...और पढ़ें

ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण से परेशानी। फोटो: आर्काइव
HighLights
नोएडा का AQI 203, ग्रेटर नोएडा का 225 दर्ज
ग्रेटर नोएडा देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर
टूटी सड़कें और निर्माण धूल प्रदूषण का मुख्य कारण
जागरण संवाददाता, नोएडा। शहर में टूटी सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ती धूल ने हवा को सांस लेने लायक नहीं छोड़ा है। बुधवार को नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 203 और ग्रेटर नोएडा का 225 दर्ज किया गया। बढ़ते प्रदूषण के चलते ग्रेटर नोएडा देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर दर्ज हुआ है।
मौसम विभाग और स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के कारण प्रदूषक कण एक जगह नहीं जम रहे हैं, जिससे एक्यूआई 'रेड जोन' (गंभीर श्रेणी) में जाने से बच गया।
लगातार तीसरे दिन ऑरेंज श्रेणी
हालांकि, राहत की बात केवल इतनी ही है। लगातार तीसरे दिन भी हवा 'ऑरेंज जोन' (खराब श्रेणी) में बनी हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों की खस्ताहाली प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। गड्ढों और सड़कों पर बिखरी धूल के बीच जब वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं, तो धूल का गुबार हवा में छा जाता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से टूटी सड़कों की जल्द मरम्मत कराने और पानी का छिड़काव बढ़ाने की मांग की है ताकि उड़ती धूल पर लगाम लगाई जा सके।
प्रदूषण का स्त्र नियंत्रित करने के लिए उद्योगों के मालिकों को जागरूक करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। वहीं सड़कों पर उड़ती धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
- रितेश कुमार तिवारी, क्षेत्रिय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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