ग्रेटर नोएडा में 25 सितंबर से यूपीआईटीएस, रूस-जापान समेत कई देशों के निवेशकों से जुड़ेंगे यूपी के कारोबारी
ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाला यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस) का चौथा संस्करण, उत्तर ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
यूपीआइटीएस 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित होगा।
रूस के साथ बीटूबी राउंडटेबल यूपी की अर्थव्यवस्था मजबूत करेगी।
जापान, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया, वियतनाम भी व्यापारिक संबंध बढ़ाएंगे।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नालेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 सितंबर से आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस) के चौथे संस्करण का शुभारंभ हो रहा है।
इसका आयोजन 29 सितंबर तक होगा। यह वैश्विक व्यापार और उत्तर प्रदेश की विनिर्माण क्षमता को एक मंच पर लाने वाला प्रमुख आयोजन होगा। इसमें रूस की भागीदारी भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी।
ब्रिक्स में भारत के साथ रूस की महत्वपूर्ण भूमिका के बीच यूपीआइटीएस-2026 में बीटूबी राउंडटेबल और सरकारी स्तर की बातचीत के माध्यम से दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक व्यापार का विस्तार
यूपीआइटीएस में रूसी उद्योगों और उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र के बीच सीधे संवाद से नए व्यापारिक अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क मजबूत होने के साथ-साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग व वैकल्पिक वैश्विक व्यापार मार्गों को भी बढ़ावा मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर आस्ट्रिया की भागीदारी के तहत भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का वैश्विक कारोबारी विकास के लिए उपयोग जैसे विषयों पर ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इसका उद्देश्य स्थानीय निर्माताओं, कारीगरों और व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने तथा नीतिगत अवसरों को व्यावहारिक निर्यात क्षमता में बदलने पर केंद्रित होगा। जापान की भागीदारी में जेट्रो से जुड़े प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे 500 एकड़ के जापानी औद्योगिक शहर का विकास भारत-जापान औद्योगिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
जापान के साथ लंबे समय से चले आ रहे विश्वास और औद्योगिक सहयोग से उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे, हाई-टेक विनिर्माण और निवेश क्षमता को मजबूती मिल रही है।
सिंगापुर की भागीदारी भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच वित्त, लाजिस्टिक्स और नवाचार के क्षेत्र में उसके रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। सिंगापुर की भूमिका यूपी के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रानिक्स और विनिर्माण क्षेत्रों को पूर्वी एशिया और एशियन बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
प्रदेश की स्थानीय कंपनियों को 128 अरब डालर के एशियन-इंडिया व्यापार गलियारे से जुड़ने, सीमा-पार पूंजी प्रवाह बढ़ाने और तकनीक आधारित व्यापार दक्षता को मजबूत करने के अवसर मिलेंगे।
‘एक्ट ईस्ट’ का नया अध्याय
वियतनाम की भागीदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट पालिसी’ के अनुरूप एशियाई विनिर्माण और व्यापारिक सप्लाई चेन के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण को दर्शाती है। भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार 18 अरब डालर से अधिक हो चुका है।
राज्य की पहचान और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने वाली ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक्स, डिफेंस कारिडोर, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और ग्रीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्र भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे।
2400 से अधिक प्रदर्शकों और 1.5 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू बीटूबी खरीदारों की अनुमानित भागीदारी होगी।
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