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आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' पर सहमत हुए ब्रिक्स देश, भारत के रुख का किया समर्थन

By Sanjay MishraEdited By: Shubham Tiwari
Published: Sat, 12 Sep 2026 08:49 PM (IST)

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' के तहत सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के 'जीरो टॉलरेंस' दृष्टिकोण ...और पढ़ें

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के जीरो टॉलरेंस रुख का किया समर्थन (फोटो- ANI)

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के जीरो टॉलरेंस रुख का किया समर्थन (फोटो- ANI)

HighLights

  1. ब्रिक्स ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के जीरो टॉलरेंस को स्वीकारा।

  2. पहलगाम आतंकी हमले की निंदा, सीमा पार आतंकवाद पर रोक।

  3. आतंकी फंडिंग नेटवर्क तोड़ने, सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने पर जोर।

संजय मिश्र, जागरण नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ''नई दिल्ली घोषणापत्र'' में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस के भारत के दृष्टिकोण को स्वीकार कर सदस्यों देशों ने आतंकवाद का पालन-पोषण करने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया।

वहीं जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए समीा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करने की ब्रिक्स की घोषणा भी भारतीय कूटनीति की सफलता रही।

वैश्विक सामरिक-कूटनीति के भारी उथल-पुथल के वर्तमान दौर में ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों की पहले दिन की बैठक के उपरांत आतंकवाद समेत तमाम अहम मुद्दों पर साझा घोषणा सम्मेलन की उपलब्धि रही।

ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र में वैश्विक आतंकवाद, अवैध वित्तीय लेन-देन, साइबर धोखाधड़ी और उभरते सीमा-पार स्कैम नेटवर्क के खिलाफ सदस्य देशों का एकजुट रूख स्पष्ट किया गया।

आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी तरह का अंतर किए कठोर रूख अपनाने की भारत के दृष्टिकोण समेत सुरक्षा से जुड़े नतीजों पर चर्चा करते हुए सदस्य देशों ने पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की।

इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए थे। पहलगाम हमले के जवाब में ही भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ आपरेशन सिंदूर की सैन्य कार्रवाई की थी और इस दौरान दोनों देशों के बीच तीन दिनों का संक्षिप्त सैन्य संघर्ष हुआ था।

आतंकवाद के संबंध में ब्रिक्स घोषणापत्र में साफ कहा गया कि आतंक की सभी हरकतें आपराधिक और अनुचित हैं। चाहे उनका मकसद कुछ भी हो, और वे कभी भी, कहीं भी और किसी के भी द्वारा की गई हों।

आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों से निपटने के अपने संकल्प को दोहराते हुए ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही रोकने, आतंकी फंडिंग नेटवर्क को तोड़ने और उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों को छोड़ने की भारत के नजरिए के अनुरूप आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति इस चुनौती से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई गई।

ब्रिक्स देशों ने घोषणापत्र में यह बात भी दोहरायी कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।

साथ ही यह भी कहा गया कि हम आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस सुनिश्चित करने और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज करने का आग्रह करते हैं।"

ब्रिक्स ने यह दो टूक कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उससे निपटने की मुख्य जिम्मेदारी देशों की है जिसका पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।

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