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'यूनाइटेड नेशन्स में सुधार की जरूरत, BRICS बनाए रिफॉर्म का रोडमैप', समिट में बोले पीएम मोदी

Published: Sat, 12 Sep 2026 08:18 PM (IST)

प्रधानमंत्री मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को दोहराया, कहा कि अब इसे टाला नहीं जा सकता।

यूनाइटेड नेशन्स में सुधार की जरूरत- पीएम मोदी

यूनाइटेड नेशन्स में सुधार की जरूरत- पीएम मोदी

HighLights

  1. पीएम मोदी ने यूएनएससी सुधार को तत्काल आवश्यक बताया।

  2. ब्रिक्स देशों से वैश्विक शासन सुधार रोडमैप बनाने का आग्रह।

  3. ग्लोबल साउथ को नियम बनाने वाला बनने पर जोर दिया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ब्रिक्स संगठन के जरिए भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की अपनी मांग को जोरदार तरीके से सामने रखा है।

शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता।

पीएम ने कहा कि, ‘बदलते विश्व का संचालन पुरानी संस्थाओं से नहीं किया जा सकता।’ मोदी ने ब्रिक्स देशों से अपील कि वे वैश्विक शासन सुधार के दस प्रस्ताव तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक इसे ब्रिक्स रिफार्म रोडमैप का रूप दें।

पीएम ने समुद्री व्यापार में अहम भूमिका निभाने वाले नाविकों की सुरक्षा पर भी जोर देते हुए ‘सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ बनाने का प्रस्ताव रखा।

पीएम मोदी ने व्यापारिक तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच बढ़ती आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया और विकासशील व गरीब देशों यानी ग्लोबल साउथ के हितों को भी जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ को अब सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में व्याप्त “विशेषाधिकार के पिरामिड” को खत्म कर उसके स्थान पर 'साझेदारी का मंच' स्थापित करने की बात कही।

पीएम ने जताया आभार

सभी सदस्य देशों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, 'भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।'

पीएम ने ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए कहा कि मानव जीवन में बीस वर्ष की आयु परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत होती है। भारत की अध्यक्षता में यह चौथा ब्रिक्स सम्मेलन था। शनिवार को अगले ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी की जिम्मेदारी चीन को सौंप दी गई है।

इस मौके पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नहयान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी सहित कई देशों के प्रमुख नेता मौजूद रहे।

उन्होंने ब्रिक्स निरंतरता और क्रियान्वयन तंत्र का प्रस्ताव रखा और तीन देशों के समूह (ट्रायका) के माध्यम से सभी पहलों और परिणामों का फालो-अप करने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा।

पीएम मोदी ने वैश्विक शासन के मौजूदा ढांचे की आलोचना करते हुए कहा कि यह पिरामिड जैसा दिखता है, जिसमें ऊपर शक्ति और निर्णय केंद्रित हैं, जबकि नीचे वे देश हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित होते हैं लेकिन उन्हें आकार नहीं दे पाते। उन्होंने कहा, 'ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की अंग्रिम पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की सबसे पीछे की पंक्ति में।

पीएम ने वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, नेतृत्व पद और नीतिगत प्राथमिकताओं को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की वकालत की। एआई, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल साउथ को नियम लेने वाले से नियम बनाने वाले की भूमिका में लाने की मांग रखी।

उन्होंने कहा, 'यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। सिर्फ बोलना या आवाज उठाना काफी नहीं है, उसे नतीजे और प्रभाव में बदलना चाहिए।यही ब्रिक्स 20 वर्ष में ब्रिक्स का यहीं संकल्प हो।'

एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ एकजुट हो ब्रिक्सः पेजेश्कियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं को हमलों और धमकियों से संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स सदस्यों से एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ब्रिक्स को न्याय की आवाज बनना चाहिए।

शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में पेजेश्कियान ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर हमलों को सामान्य बनाने के खिलाफ खड़ा होना ब्रिक्स देशों की जिम्मेदारी है, क्योंकि ऐसी कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा है।

उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे और फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को वैश्विक शासन की विश्वसनीयता तथा वैधता की गंभीर परीक्षा बताया और ब्रिक्स से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

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