रेपो रेट वृद्धि से रियल एस्टेट पर दबाव, घर खरीदारों और डेवलपर्स पर असर
रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे घर ...और पढ़ें

रेपो रेट वृद्धि से रियल एस्टेट पर दबाव, घर खरीदारों और डेवलपर्स पर असर ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.50 प्रतिशत हुई।
रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव, कर्ज की लागत बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार मांग पर बड़ा असर नहीं होगा।
जागरण संवाददाता, नोएडा। रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से यह दर 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। इससे आने वाले समय में रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव पड़ सकता है। घर खरीदारों और डेवलपर्स, दोनों के लिए कर्ज की लागत बढ़ने की आशंका है।
होम लोन की ब्याज दर बढ़ने पर कुछ खरीदार फैसला टाल सकते हैं। हालांकि, सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि यह मामूली बढ़ोतरी देश में घरों की मांग पर बड़ा असर नहीं डालेगी।
रियल स्टेट को लगातार समर्थन मिल रहा है : आशीष भूटानी
भूटानी इंफ्रा के सीईओ आशीष भूटानी ने बताया कि बढ़ती आय, तेजी से हो रहे शहरीकरण, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अपना घर खरीदने की मजबूत इच्छा से रियल एस्टेट सेक्टर को लगातार समर्थन मिल रहा है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बीच डेवलपर्स को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने और वास्तविक मांग वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी।
महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, ब्याज दरों में स्थिरता और स्पष्टता से ग्राहकों का भरोसा कायम रहेगा, दीर्घकालीन निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रियल एस्टेट सेक्टर की विकास यात्रा मजबूत होगी।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में मांग स्थिर रहने की उम्मीद: साहिल अग्रवाल
निंबस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल ने कहा कि रेपो रेट बढ़ाने का आरबीआई का निर्णय व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और बदलती महंगाई को नियंत्रित करने पर उसके फोकस को दर्शाता है।
उनके मुताबिक, स्वस्थ मांग, बेहतर उपभोक्ता विश्वास और गुणवत्तापूर्ण आवासीय व प्लाटेड डेवलपमेंट्स में रुचि से सेक्टर मजबूत बना हुआ है। बुनियादी ढांचे के विकास और उभरते बाजारों के अवसरों के बीच उन्होंने महानगरों के साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में मांग स्थिर रहने की उम्मीद जताई।
