Noida Protest: श्रमिकों के प्रदर्शन पर सियासत गरमाई, राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर हुए बवाल के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला ...और पढ़ें

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार पर बोला तीखा हमला। फाइल फोटो
HighLights
राहुल गांधी ने नोएडा घटना को श्रमिकों की 'आखिरी चीख' बताया।
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के 'साजिश' बयान पर सवाल उठाए।
दोनों नेताओं ने वेतन वृद्धि और महंगाई पर सरकार को घेरा।
जागरण संवाददाता, नोएडा। नोएडा में वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों पर सोमवार हुए बवाल के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इंटरनेट मीडिया पर कटाक्ष कर सरकार पर बड़ा हमला बोला है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिखा कि कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी, जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गए थे। श्रमिक 12 हजार वेतन लेकर चार से सात हजार रुपये किराया देने को मजबूर हैं।
हक के बदले मिलता है अत्याचार- राहुल गांधी
सालाना 300 रुपये बढ़ते ही मकान मालिक 500 रुपये किराया बढ़ा देता है। वेतन बढ़ने तक बेलगाम महंगाई जिंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है। यह विकसित भारत का सच है। महिला श्रमिक कहती है कि गैस के दाम तो बढ़े, पर तनख्वाह नहीं।
इन लोगों ने गैस संकट के दौरान पांच हजार का सिलिंडर खरीदा होगा। श्रमिक किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, उसकी कोई नीति नहीं। वह बस चुपचाप बिना शिकायत के काम करता है।
कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 14, 2026
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500…
अपना हक मांगने के बदले में उन्हें दबाव और अत्याचार मिलता है। नोएडा के श्रमिक 20 हजार रुपये वेतन मांगे रहे हैं। यह उनका अधिकार है।
बदनाम करने से पहले दें जवाब- अखिलेश यादव
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लिखा कि मुख्यमंत्री नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन को किसी की साजिश बता रहे हैं। तो जनता पूछ रही है कि अगर ये सच है तो ख़ुफ़िया पुलिस क्या बंगाल प्रचार करने गई थी या वनस्पति की खोजबीन में लीन थी।
अगर माननीय मुख्यमंत्री जी नोएडा के मज़दूरों के आंदोलन को किसी की साज़िश बता रहे हैं तो एक सवाल जनता आपसे पूछ रही है कि अगर ये सच है तो आपकी ख़ुफ़िया पुलिस क्या आपके साथ बंगाल प्रचार करने गयी थी या वनस्पति की खोजबीन में लीन थी या उसके प्रभाव में। मज़दूरों के आंदोलन को नक्सलवाद के…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 13, 2026
आंदोलन को नक्सलवाद के आरोप से बदनाम करने से पहले बताएं कि दस वर्षों में ऐसे हालात क्यूं बनें। सरकार श्रमिकों के जख़्मों पर मलहम नहीं लगा सकती तो नमक भी न छिड़कें। भाजपा का डबल इंजन, जनता के लिए ट्रबल इंजन बन गया है। जनता इंजनों के पहिए और पूर्जे खोल देगी।
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