इंजीनियर की मौत से हिल गया पूरा प्रदेश, पर अफसरों की नहीं टूटी नींद; भ्रष्टाचार के गड्ढे और कितनों की लेंगे जान?
नोएडा के सेक्टर-150 में एक साल पहले बेसमेंट की खुदाई में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की ...और पढ़ें

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नालेज पार्क पांच में पोदार स्कूल के समीप अवैध खनन के बाद सड़क के किनारे बना दलदल नूमा तालाब। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अजब सिंह भाटी, ग्रेटर नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में एक साल पहले बेसमेंट के लिए की गई खोदाई में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हुई मौत के बाद भी अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी है।
ग्रेटर नोएडा में विभिन्न स्थानों पर भ्रष्टाचार के गड्ढे न जाने कितने युवराज की जान लेने काे काल का ग्रास बने हुए हैं। क्योंकिं जमीन अधिग्रहण के बाद किसान व अधिकारियों से मिलीभगत कर खनन माफिया धरती की कोख को पिछले कई सालों से खोखला करने में जुटे हैं। मोटी कमाई के इस अवैध धंधे में तत्कालीन पुलिस प्रशासन के साथ प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत रही।
ग्रामीण अंचलों से लेकर सेक्टर व सोसायटी ही नहीं बल्कि मुख्य मार्गों के सहारे बेसमेंट खोदने के नाम पर खूब धरती का सीना चीरा गया। आबादी बसी, लेकिन पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने की वजह से गढ्ढों में वर्षा के साथ दूषित पानी जमा होता गया।
अब यह गड्ढे दलदल नूमा तालाब बनकर बेजुबानों के साथ लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं। आए दिन इनमें गिरकर गाेवंशी दम तोड़ रहे हैं, पूर्व में कई दर्दनाक घटनाएं भी घटित हो चुकी है, लेकिन हादसों के बाद भी जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं सिखा।
सोसायटी के लोग समझ रहे थे तालाब
सेक्टर-150 में निर्माणाधीन बेसमेंट के लिए खोदी गई जमीन के दलदल नूमा तालाब को आसपास की सोसायटियों में रहने वाले लोग तालाब समझकर बैठे थे। आसपास की सोसायटी में रहने वाले लोगों का कहना है कि सोसायटी में जब रहने आए तो सड़क के किनारे इतना बड़ा जलभराव देखकर तालाब लगा।
सोसायटी के अन्य लोग भी इसे तालाब ही बता रहे थे। घटना स्थल के आसपास गोवंशियों का बसेरा रहता था। सोसायटी के लोग उन्हें यहां खाना खिलाने आते थे। तालाब में मछलिया समझ यहां दाना डालते थे।
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हमें तो पता ही नहीं था कि यह दलदल नूमा तालाब नहीं बल्कि बेसमेंट है। सोसायटी के अन्य लोग भी इसे तालाब ही मानते थे। दर्दनाक हादसा जिम्मेदारों की उदासीनता का नतीजा है। - गोपाल सिंह, टाटा युरेका सोसायटी
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