यूपी की आर्थिक राजधानी में बसी ‘नोएडा की धारावी’, 50000 झुग्गियों से घिरी प्राधिकरण की जमीन
नोएडा में मुंबई की धारावी की तरह सरकारी जमीन पर एक बड़ा स्लम क्षेत्र विकसित हो गया है, जहां भू-माफियाओं ...और पढ़ें

नोएडा सेक्टर-10 में बनी पक्की झुग्गियां। जागरण
HighLights
नोएडा में सरकारी जमीन पर 50 हजार झुग्गियां बनीं।
भू-माफिया प्रतिमाह 50 करोड़ रुपये किराए से कमा रहे।
नोएडा प्राधिकरण 17 वर्षों से कार्रवाई करने में विफल।
कुंदन तिवारी, नोएडा। देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली मुंबई में बसे ‘धारावी’ की तरह उत्तर प्रदेश के शो विंडो दिल्ली से सटे नाेएडा में भी बड़ा स्लम (झुग्गी बस्ती) क्षेत्र बस गया है।
यह प्राधिकरण की अर्जित जमीन (सरकारी भूमि) बसा है, लेकिन इसे रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 17 वर्षों में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
2020 में झुग्गी वालों को दूसरी जगह पुनर्वास योजना (वर्ष 2009 के सर्वे के आधार पर) के तहत विस्थापित करने का प्रयास जरूर हुआ, लेकिन अवैध निर्माण बढ़ता देख उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सरकारी विभागों में बंदरबांट, नहीं की जाती कार्रवाई
करीब 100 भू-माफिया ने चार और पांच मंजिला 50 हजार पक्की झुग्गियों का निर्माण कर दिया है। इन्हें वह किराए पर उठाकर प्रतिमाह करीब 50 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इसकी सभी सरकारी विभागों में बंदरबांट होती है, इसलिए कार्रवाई नहीं की जा रही है।
बाजार में जमीन की कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपया है। प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अनुसार इस पर इंडस्ट्री और कामर्शियल भूखंडों की योजना आनी थी। भूखंडों का नियोजन भी कर दिया गया था।

बता दें कि मुंबई की ‘धारावी’ का एरिया 2.1 से 2.4 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। यहां करीब 10 लाख लोग निवास करते हैं।
इसका 70 प्रतिशत (600 एकड़) से अधिक जमीन का स्वामित्व बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के पास है। इसी प्रकार से उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले ‘नोएडा’ की भी स्थिति है, क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र फेज वन (सेक्टर-एक से सेक्टर-11) ‘नोएडा का धारावी’ बनकर तैयार हो चुका है।
लैंड ऑडिट में था जिक्र
कैग ने 2017 में नोएडा प्राधिकरण में आडिट किया था। प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपी, उसमें लैंड आडिट के जरिये सेक्टर-4,5,8,9,10 में एक लाख वर्ग मीटर भूमि पर भूमाफिया का कब्जा होने और भूमि की कीमत 36200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब करीब साढ़े तीस सौ करोड़ रुपये इंगित की थी, जो अब बढ़कर एक हजार करोड़ के पार हो गई है।
जमीन भी गई, फ्लैट भी गए
झुग्गियों का निर्माण 1999 में हो गया था। 2009 तक करीब 11 हजार झुग्गियां बन गई थी। तब तत्कालीन सरकार ने इन्हें यहां से हटाकर झुग्गियों में रहने वाले लोगों को दूसरी जगह विस्थापित करने के लिए फ्लैट बनाने का निर्णय किया। फ्लैट बन गए, लेकिन विस्थापन नहीं हुआ।
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दूसरी तरफ झुग्गियों का अवैध निर्माण जारी रहा। 2020 में झुग्गियों में रहने वाले लोगों को फ्लैटों में विस्थापित करने का प्रयास हुआ। करीब 22 सौ झुग्गी वासियों को फ्लैट दे दिए गए, लेकिन बाकी को विस्थापित नहीं किया गया।

जिन्होंने झुग्गी खाली कर फ्लैट लिया था, उनके जगह दूसरे लोगों ने आकर झुग्गी कब्जा ली। इससे प्राधिकरण को दोहरी मार पड़ी। फ्लैट भी दे दिया और झुग्गी वाली जमीन भी नहीं मिली।
