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नोएडा स्पोर्ट्स सिटी: 70% खेल सुविधा पूरी होने पर ही मिलेगा फ्लैट का कब्जा

Published: Tue, 07 Apr 2026 10:04 PM (IST)

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी के होम बायर्स को बड़ी राहत मिली है। अब बिल्डरों को 70% खेल सुविधाएं विकसित करने के बाद ही फ्लैटों का कब्जा मिलेगा।

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी के होम बायर्स को बड़ी राहत मिली है। अब बिल्डरों को 70% खेल सुविधाएं विकसित करने के बाद ही फ्लैटों का कब्जा मिलेगा। इमेज एआई

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी के होम बायर्स को बड़ी राहत मिली है। अब बिल्डरों को 70% खेल सुविधाएं विकसित करने के बाद ही फ्लैटों का कब्जा मिलेगा। इमेज एआई

HighLights

  1. 70% खेल सुविधाएं पूरी होने पर ही मिलेगा फ्लैट कब्जा।

  2. बिल्डरों के कुछ फ्लोर प्राधिकरण के पास गिरवी रहेंगे।

  3. हजारों होम बायर्स को मिलेगी राहत, परियोजनाएं तेज होंगी।

जागरण संवाददाता, नोएडा। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में लंबे समय से अटके होम बायर्स को बड़ी राहत देने के साथ-साथ प्राधिकरण ने सख्ती भी बढ़ा दी है। संशोधित मानचित्र स्वीकृत कर स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना खेल सुविधाएं विकसित किए बिना बिल्डर फ्लैटों का कब्जा नहीं दे पाएंगे। जमीन के 70 प्रतिशत हिस्से में खेल सुविधाएं विकसित करनी होंगी। इसके बाद रेजीडेंशियल टावरों के लिए ओसी मिलेगा। तभी फ्लैट पर कब्जा संभव हो सकेगा।

प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि रकम फंसने से रोकने के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। जिन बिल्डर परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृत होंगे, उनके फर्स्ट और सेकेंड फ्लोर प्राधिकरण के पास गिरवी रहेंगे। यह अधिकतम 20 प्रतिशत तक हो सकता है। बिल्डर भुगतान नहीं करते हैं, तो फ्लोर पर प्राधिकरण का मालिकाना हक होगा। इन्हें सीधे खरीदारों को बेचा जा सकेगा।

क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता का कहना है कि रजिस्ट्री और मानचित्र स्वीकृत पर लगी रोक हटने से हजारों खरीदारों को राहत मिलने के साथ रूकी परियोजनाओं को गति मिलेगी।

स्पोर्ट्स सिटी परियोजना

विवरण जानकारी
परियोजना का क्षेत्र सेक्टर-78, 79, 101, 150, 152
आवंटन वर्ष 2009-11
रिहायशी परियोजना 46
रिहायशी टावर में फ्लैट 40,000
बिल्डरों का निवेश 50,000 करोड़ से अधिक
प्राधिकरण का बकाया 12,000 करोड़ रुपये

इन शर्त पर करना होगा काम 

  • आवंटी द्वारा वाणिज्यिक विभाग से नियमानुसार टाइम एक्सटेंशन प्रमाण पत्र लेना होगा।
  • एनजीटी में योजित प्रार्थना पत्रों के निर्णय के अनुपालन में आवंटी संस्था बाध्य है।
  • भवन नियमावली 2010, उप्र अपार्टमेंट एक्ट 2010 व 2016 उप्र रियल स्टेट रेग्यूलेटरी एक्ट 2016, पर्यावरण विभाग के सभी अधिनियमों का पालन करना होगा।
  • आवंटी को नेशनल बिल्डिंग कोड एनबीसी में उल्लेखित शर्त का पालन करना होगा।

मानचित्र, सीसी में दर्शायी गई माप, क्षेत्रफल, पार्किंग, हरित एरिया, सुविधाएं तथा सेवाओं को पूर्व में स्वीकृति के सापेक्ष

  • प्राधिकरण की बिना पूर्व अनुमति के स्थल पर परिर्वतन या संशोधन आदि किया जाना अनधिकृत माना जाएगा, तत्काल ध्वस्त किया जाएगा।
  • ब्रोशर में दी गई सेवाओं को पूरा करना होगा।
  • योजना में शामिल में जल, विद्युत, सीवरेज, अग्निशमन, लिफ्ट, वर्षा जल प्रणाली, जल संरक्षण, रिसाइकलिंग जैसे कार्य को हमेशा कार्यशील स्थिति में रखना होगा।
  • आवंटी को योजना में बने टावर की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करनी होगी। किसी की जान माल के नुकसान की जिम्मेदारी संस्था की होगी।
  • समायोजन शुल्क आवंटी को जमा करना होगा।
  • सभी टावरों के बीच की दूसरी भवन विनियमावली के प्रविधान के अनुरूप होगी।
  • आवंटी को विजिटर कार पार्किंग की सुविधा परिसर के अंदर करनी होगी, सड़क पर कोई पार्किंग नहीं होगी।
  • बेसमेंट पार्किंग में ही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की व्यवस्था करनी होगी।
  • इंटरनेट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना होगा।
  • आशंक अधिभोग इस शर्त पर जारी किया जा रहा है कि दो महीने के अंदर परियोजना की सर्विसेज सीवरेज, वाटर सप्लाई, ड्रेनेज, विद्युत, रोड, ग्रीन व ब्रोशर के तहत दिए गए क्षेत्र का डिमार्केशन का सत्यापन परियोजना विभाग से प्राप्त किया जाएगा।
  • उप्र अपार्टमेंट एक्ट 2020 के अनुसार आवंटी को डीओडी एक माह के अंदर वाणिज्यिक विभाग में उपलब्ध करा उसकी एक प्रति नियोजन विभाग में देनी होगी।

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