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बिना लेआउट के अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण पर विशेषज्ञों की चिंता, ग्लोबल सिटी दिल्ली को होगा नुकसान

Published: Tue, 07 Apr 2026 09:48 PM (IST)

शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने दिल्ली में बिना लेआउट अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि ...और पढ़ें

शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने दिल्ली में बिना लेआउट अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण पर चिंता जताई है। इमेज एआई

शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने दिल्ली में बिना लेआउट अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण पर चिंता जताई है। इमेज एआई

HighLights

  1. बिना लेआउट नियमितीकरण से दिल्ली के स्वरूप को खतरा।

  2. बुनियादी सुविधाओं, आपातकालीन सेवाओं हेतु जगह का अभाव।

  3. दिल्ली कैबिनेट ने केंद्र को धन्यवाद दिया, भविष्य में सख्ती।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। बिना लेआउट अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण को लेकर सरकार भले जो दावे कर रही हो, शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने इसे लेकर खासी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का तर्क है कि किसी भी कालोनी का नियमितीकरण बिना ठोस लेआउट प्लान (नक्शा और बुनियादी ढांचा योजना) के करना, दिल्ली के ''राष्ट्रीय राजधानी'' वाले स्वरूप को नुकसान पहुंचा सकता है।

एक ''ग्लोबल सिटी'' के मानक मांग करते हैं कि वहां चौड़ी सड़कें, सुचारू सीवेज सिस्टम, पार्क और आपातकालीन सेवाओं के लिए पर्याप्त जगह हो। बिना लेआउट के नियमितीकरण का अर्थ है—जैसी स्थिति है, उसे वैसा ही स्वीकार कर लेना, जो भविष्य में सुधार की गुंजाइश को पूर्णतया खत्म कर देता है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पूर्व उपाध्यक्ष बलविंदर कुमार कहते हैं, किसी भी कालोनी को नियमित करने के लिए उसका बहुत से मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य है। मसलन, उस कालोनी का एक लेआउट प्लान होना चाहिए, जिसमें इस बाबत सारी जानकारी हो कि उस कालोनी में कहां सड़कें होंगी व कहां घर, कहां अस्पताल होगा और कहां पार्क, कहां सामुदायिक भवन होगा और कहां स्कूल इत्यादि।

इसके अलावा सड़कों की चौड़ाई, आपदा और आपात हालात में बचाव कार्य सुनिश्चित हो सके, इसकी बुनियादी व्यवस्था होना भी उतना ही जरूरी है। इन सबके बगैर इन कालोनियों को नियमित करना ग्लोबल दिल्ली के लिए एक कलंक के समान ही है।

डीडीए के पूर्व योजना आयुक्त अशोक कुमार जैन भी कमोबेश ऐसी ही राय रखते हैं। उनका कहना है कि यह सभी कालोनियां बहुत ही बेतरतीब ढंग से बसी हुई हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए कहीं जगह नहीं छोड़ी गई है। न कहीं पार्क बन सकता है, न कहीं स्कूल।

न कहीं अस्पताल बनाने की जगह है और न ही सामुदायिक भवन। इन सभी सुविधाओं की जगह पर भी मकान बना लिए गए हैं। आलम यह है कि अगर रिक्टर स्केल पर अच्छी- खासी तीव्रता वाला भूकंप आ जाए अथवा कहीं कोई बड़ी आग ही लग जाए तो वहां फैले अतिक्रमण और अवैध कब्जों के कारण बचाव कार्य कर पाना सहज नहीं है।

पीएम उदय रिपोर्ट कार्ड (2 अगस्त 2025 तक)

विवरण संख्या
कुल आवेदन मिले 1,32,316
आगे बढ़ाए गए आवेदन 1,31,629
कन्वेयंस डीड / अधिकृत पर्ची जारी हुई 34,858
कमियों के कारण रद्द हुए आवेदन 37,195
लंबित आवेदन 61,536

दिल्ली कैबिनेट ने जताया केंद्र का आभार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने राजधानी की 1511 अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने के निर्णय के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद किया है। मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल सहित केंद्र सरकार के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।

रेखा और मनोहर दोनों ने भविष्य के जताया सख्ती का रूख

जागरण के एक सवाल पर सीएम रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि मौजूदा अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसा करके नियोजित विकास की शुरुआत ही की जा रही है। लेकिन भविष्य में ऐसी नई कालोनियां न बसें, इसके लिए पूरी सख्ती बरती जाएगी।

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