विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नोएडा में स्मार्ट मीटर से गलत बिलिंग और रीडिंग की परेशानी होगी दूर? निगम लगा रहा रेडियो फ्रिक्वेंसी मीटर

Published: Tue, 27 Oct 2026 10:26 AM (IST)

नोएडा में PVVNL ने कमजोर मोबाइल सिग्नल वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटरों की कनेक्टिविटी समस्या को दूर करने के लिए ...और पढ़ें

इस बदलाव उद्देश्य मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता खत्म कर कंट्रोल रूम तक निर्बाध रियल-टाइम डेटा सुनिश्चित करना है। एआई इमेज

इस बदलाव उद्देश्य मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता खत्म कर कंट्रोल रूम तक निर्बाध रियल-टाइम डेटा सुनिश्चित करना है। एआई इमेज

HighLights

  1. कमजोर सिग्नल वाले क्षेत्रों में आरएफ मीटर लगेंगे।

  2. मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता होगी अब खत्म।

  3. बिजली खपत का सटीक डेटा मिलेगा कंट्रोल रूम को।

जागरण संवाददाता, नोएडा। महानगर के दूरदराज व कमजोर मोबाइल सिग्नल वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटरों की ठप पड़ रही कनेक्टिविटी बहाली को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने अपनी तकनीकी रणनीति में बदलाव किया है। अब तक 40 हजार से अधिक परिसरों में सिम वाले स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं।

क्यों जरूरत पड़ी रेडियो फ्रीक्वेंसी की?

निगम अब जिन आवासीय व ग्रामीण क्षेत्रों में सिम आधारित स्मार्ट मीटर सर्वर तक बिजली खपत का ब्योरा भेजने में विफल साबित हो रहे हैं, वहां अब रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) तकनीक पर आधारित उपकरण लगवा जा रहा है। इस बदलाव का उद्देश्य मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता खत्म कर कंट्रोल रूम तक निर्बाध रियल-टाइम डेटा सुनिश्चित करना है।

दो हजार से अधिक आरएफ मीटर सक्रिय

जिले के कुल साढ़े चार लाख विद्युत उपभोक्ताओं में से अब तक 40 हजार से अधिक परिसरों में सिम वाले स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं।

सामान्य परिस्थितियों में ये मीटर जीपीआरएस नेटवर्क के सहारे सर्वर को आंकड़े भेजते हैं, पर बेसमेंट, घनी आबादी व सुदूर क्षेत्रों में मोबाइल सिग्नल ठप होने से बिलिंग व निगरानी व्यवस्था प्रभावित होती है।

इस तकनीकी अड़चन को दूर करने के लिए निगम ने रेडियो तरंगों से संचालित नेटवर्क का दायरा बढ़ाना शुरू किया है। इसके तहत अब तक दो हजार से अधिक आरएफ मीटर सक्रिय हो चुके हैं।

मीटर रीडरों की मुश्किलें होंगी दूर

विद्युत निगम की तकनीकी टीम खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण शुरू कर रही है। सर्वे पूरा होते ही कमजोर सिग्नल वाले मीटरों को चरणबद्ध तरीके से आरएफ तकनीक में बदला जाएगा।

इस प्रणाली की विशेषता यह है कि यह मोबाइल नेटवर्क की विफलता के बावजूद रेडियो फ्रीक्वेंसी मेश के जरिए सटीक रीडिंग एकत्र कर मुख्य सर्वर तक पहुंचाती है। इससे उपभोक्ताओं को गलत बिलिंग व मीटर रीडरों के चक्कर काटने की परेशानी से राहत मिलेगी।

हर यूनिट की सटीक गणना सुनिश्चित हो सके

उधर, अधीक्षण अभियंता (वाणिज्यिक) उमेश कुमार यादव ने बताया कि नेटवर्क की बाधा से मुक्त सटीक डेटा पाने के लिए यह तकनीकी अपग्रेड बेहद जरूरी है। जिन क्षेत्रों में सिम वाले मीटरों से डेटा के आदान-प्रदान में अड़चन आ रही है, वहां आरएफ मीटर लगाकर केंद्रीय सर्वर से संपर्क बहाल किया जा रहा है, ताकि हर यूनिट की सटीक गणना सुनिश्चित हो सके।

यह भी पढ़ें- दिल्ली की हवा गर्भवती महिलाओं के लिए जहर, प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा 40% बढ़ा; डॉक्टर से जानें बचाव के टिप्स

यह भी पढ़ें- अंबाला-दिल्ली हाईवे पर 700 करोड़ रुपये की लागत से बना शहीद स्मारक, अमित शाह 5 नवंबर को कर सकते हैं उद्घाटन