दिल्ली की हवा गर्भवती महिलाओं के लिए जहर, प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा 40% बढ़ा; डॉक्टर से जानें बचाव के टिप्स
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशुओं को गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने ...और पढ़ें

रक्त प्रवाह में सूजन से गर्भस्थ शिशु पर पड़ रहा असर। (AI-Generated Image)
HighLights
सूक्ष्म कण गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकते हैं।
जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म का खतरा।
एन95 मास्क लगाएं, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ गर्भवती महिलाओं की सेहत को लेकर चिंता बढ़ जाती है। प्रदूषित हवा का असर केवल सांस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक बारीक प्रदूषक कणों के संपर्क में रहने का संबंध समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले बच्चे के जन्म के बढ़ते जोखिम से भी पाया गया है।
ऐसे में विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण के संपर्क को कम करने और सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है।
रक्त प्रवाह में भी प्रवेश करने का डर
सरिता विहार स्थित अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट निखिल मोदी के अनुसार, पीएम 2.5 जैसे बारीक कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। इससे शरीर में सूजन बढ़ने और आक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ऐसे में मां और बच्चे दोनों को खतरा है। पीएम 2.5 के संपर्क में आने से मां के रक्त प्रवाह में सूजन और रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे उच्च रक्तचाप, प्री-एक्लेमप्सिया (गर्भावस्था के दौरान खतरनाक ब्लड प्रेशर) और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।
बच्चे तक कैसे पहुंच सकते हैं सूक्ष्म कण?
ये सूक्ष्म कण प्लेसेंटा (गर्भनाल) को पार करके गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकते हैं, जिससे जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म (प्रीटर्म बर्थ) और बच्चों के फेफड़ों एवं मस्तिष्क के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर खिड़की-दरवाजे बंद रखें और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
गर्भवती महिलाओं को बाहर टहलने, दौड़ने और ज्यादा शारीरिक मेहनत वाली गतिविधियों से बचना चाहिए। व्यस्त सड़कों के आसपास लंबे समय तक रहने से भी परहेज करना चाहिए। बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी तरह फिट होने वाला एन95 मास्क बारीक कणों का संपर्क कम करने में मदद कर सकता है।
खांसी, घरघराहट या सांस फूलने पर सतर्क रहें
अस्थमा या सांस संबंधी दूसरी बीमारियों से पीड़ित गर्भवती महिलाएं अपनी निर्धारित दवाएं जारी रखें। लगातार खांसी, सांस में घरघराहट, सीने में जकड़न या सांस फूलने पर डाक्टर से संपर्क करें। अचानक या गंभीर रूप से सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। पर्याप्त पानी पीएं, हरी सब्जियां व फल को आहार में शामिल करें। नियमित प्रसवपूर्व जांच कराना भी जरूरी है।
