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नोएडा में दिखावे का GRAP! 9 साल में लगा 34 करोड़ का जुर्माना, वसूली मात्र 3%

Published: Fri, 23 Oct 2026 12:39 PM (IST)

नोएडा में ग्रेप लागू होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले 9 सालों में लगाए गए ...और पढ़ें

प्रदूषण पर नोएडा में सिर्फ कागजी कार्रवाई (AI-Generated Image)

प्रदूषण पर नोएडा में सिर्फ कागजी कार्रवाई (AI-Generated Image)

HighLights

  1. ग्रेप लागू, फिर भी नोएडा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा।

  2. अधिकारी जुर्माना लगा रहे, वसूली में पूरी तरह विफल।

  3. नौ साल में सिर्फ तीन प्रतिशत जुर्माने की वसूली हुई।

चेतना राठौर, नोएडा। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के पहले चरण की पाबंदियां लागू होने के बावजूद नोएडा में प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई का असर नजर नहीं आ रहा है। अधिकारी जुर्माना लगाने तक ही सीमित हैं, जबकि इसकी वसूली कराने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नोएडा प्राधिकरण नाकाम साबित हो रहे हैं।

बृहस्पतिवार को नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 251 और ग्रेटर नोएडा का 219 दर्ज हुआ। लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है लेकिन रोकथाम के लिए दिखावे के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले पांच सालों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जुर्माना तो लगाया गया लेकिन वसूली नहीं की गई। ऐसे में प्रदूषण फैलाने वाले बेखौफ होकर हवा को दूषित कर रहे हैं।

अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल

पिछले लगभग 9 सालों में जुर्माने की कार्रवाई तो हुई लेकिन वसूली तीन प्रतिशत ही कर सके। ऐसे में ग्रेप लगते ही एक्टिव होने वाले अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अक्टूबर से हवा दूषित होते ही 65 लाख का जुर्माना तो लगाया गया लेकिन वसूली नहीं की गई। हर साल ग्रेप लागू होने के बाद इसी तरह जुर्माने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन वसूली नहीं होने से कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दिखावे की जुर्माना कार्रवाई, कितने प्रतिशत वसूली?

पर्यावरणविद् अमित गुप्ता की ओर से लगाई आरटीआइ में नौ साल में 34 करोड़ का लगाए जुर्माने की रिकवरी महज एक करोड़ की जा सकी है। यह जुर्माने की भरपाई शून्य रिकवरी प्राधिकरण और बोर्ड की लापरवाही को दिखा रही है। प्रदूषण को कम करने की सिर्फ कागजी कार्रवाई लोगों के लिए नुकसान पहुंचा रही है।

वर्ष 2017 से 2026 तक तीन हजार से अधिक प्रदूषण फैलाने वाली निर्माण साइट्स पर लगाया गया था। वहीं 2026 में जनवरी से अक्टूबर तक 120 निर्माण साइट्स पर 26,299,000 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। कितने की वसूली हो सकी इसका कोई डाटा विभाग के पास नहीं है। ऐसे में जिम्मेदारों की कार्रवाई से लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

नोटिस जारी करने तक सीमित कार्रवाई

प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभागों की सक्रियता केवल जुर्माना लगाने और कारण बताओ नोटिस जारी करने तक दिखाई दे रही है। जुर्माना लगाने के बाद उसकी वसूली सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का कितना असर पड़ रहा है, यह बड़ा सवाल है। हर साल प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ग्रेप की पाबंदियां लागू की जाती हैं, लेकिन जुर्माने की वसूली नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

ग्रेप की पाबंदियां लागू कर दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जुर्माना लगाने की शक्ति है वसूली कराने की नहीं है।

-रितेश सिंह तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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