नोएडा में नहीं होगा जमीन अधिग्रहण, अथॉरिटी ला सकती है नई लैंड पूलिंग पॉलिसी; खुद बना सकेंगे मॉल या फ्लैट
नोएडा प्राधिकरण दशकों पुरानी भूमि अधिग्रहण नीति में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अब खाली पड़ी जमीन ...और पढ़ें

नोएडा सेक्टर 145 में खाली पड़ी भूमि। फोटो: जागरण
HighLights
नोएडा प्राधिकरण पुरानी भूमि अधिग्रहण नीति बदलने पर विचार कर रहा।
खाली जमीन का अधिग्रहण नहीं, विकास शुल्क लेकर नियमितीकरण होगा।
इससे भू-स्वामियों को लाभ, प्राधिकरण को मुकदमेबाजी से छुटकारा।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। नोएडा प्राधिकरण अपनी दशकों पुरानी जमीन अधिग्रहण की नीति में बड़ा बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। खाली पड़ी जमीन को जबरन अधिग्रहण करने के बजाय प्राधिकरण उसका नियमितीकरण (रेगुलराइज) कर सकता है।
बदले में भू-स्वामियों से विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) लेगा। इस संबंध में कई स्तर पर मंथन चल रहा है। सभी जगह से हरी झंडी हो गई तो बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव आ सकता है।
बोर्ड की मंजूरी मिलते ही यह नियम लागू हो जाएगा। इसके बाद भू-स्वामी, जिनकी जमीन अधिगृहीत नहीं हुई है। वह विकास शुल्क देकर जमीन पर अपनी मर्जी से मॉल, दुकान, आवासीय भूखंड व फ्लैट बनाकर बेच सकेंगे।
सबसे ज्यादा इन्हें होगा फायदा
इसका सबसे ज्यादा फायदा नलगढ़ा गांव के भू-स्वामियों को मिल सकता है। नलगढ़ा गांव में करीब 600 एकड़ जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ है। इस जमीन के मालिकों को इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है।
क्योंकि अन्य गांवों में अधिकांश जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। हालांकि, नलगढ़ा गांव की इस जमीन पर कई वर्षों से विवाद चल रहा है। जमीन के कई मॉलक हैं। वह पुराने अभिलेख दिखाकर जमीन पर दावा कर रहे हैं।
कई बार जमीन पर उनके दावों को खारिज कर इसे राजस्व सरकार में निहित किया जा चुका है। कुछ दिन पहले चकबंदी विभाग ने राज्य सरकार का नाम हटाकर फिर से लोगों के नाम जमीन के अभिलेखों में दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
90 प्रतिशत जमीन का हो चुका अधिग्रहण
बता दें कि नोएडा के अधिसूचित एरिया की करीब 90 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है। शेष बची 10 प्रतिशत जमीन के बड़े हिस्से पर आबादी, अवैध कॉलोनियां या किसानों का कब्जा है।
किसानों का कहना है कि जमीन पर उनके मकान बने हैं। करीब 600 एकड़ जमीन नलगढ़ा गांव में खाली है। जमीन पर विवाद होने के कारण अधिग्रहण नहीं हुआ। प्राधिकरण को किसान आंदोलन, मुकदमेबाजी और भारी मुआवजे की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
क्या है नई पॉलिसी
नई लैंड पुलिंग पॉलिसी के तहत प्राधिकरण शेष 10 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण नहीं करेगा। इसके बजाय जमीन के मूल मॉलक (भू-स्वामी) को ही जमीन डेवलप करने की अनुमति दे दी जाएगी।
इसके बदले में भू-स्वामी को प्राधिकरण को रेगुलराइजेशन चार्ज (विकास शुल्क) देना होगा। जमीन का लैंड यूज भी प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अनुसार ही रहेगा।
यानी अगर वह सेक्टर रेजिडेंशियल है तो मॉलक को भी रेजिडेंशियल डेवलपमेंट ही करना होगा, लेकिन मानचित्र पास कराना और डेवलपमेंट चार्ज प्राधिकरण को देना अनिवार्य होगा।
प्राधिकरण को क्या होगा फायदा
जमीन की मुकदमेबाजी से छुटकारा
जमीन के कोर्ट केस खत्म होंगे
तेजी से विकास होगा
बिना अधिग्रहण के ही सेक्टर डेवलप हो जाएंगे
अधिग्रहण पर खर्च करने के बजाय प्राधिकरण को चार्ज के रूप में रकम मिलेगी
इस पॉलिसी पर विचार किया गया है, तकनीकि बिंदुओं पर मंथन चल रहा है। क्या प्राधिकरण ऐसा कर सकता है, इस पर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। ।
- कृष्णा करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण
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