H-1B है महंगा और PERM हुआ निलंबित, नोएडा के IT कंपनियों के 3000 कर्मचारियों की अटकेगी ऑनसाइट पोस्टिंग
एच-1बी वीजा महंगा होने और पीईआरएम के निलंबन से नोएडा की आईटी कंपनियों पर गहरा असर पड़ा है। इससे हजारों कर्मचारियों की अमेरिकी ऑनसाइट पोस्टिंग अटक गई है।

औद्योगिक नगरी नोएडा में करीब 180 छोटी-बड़ी आईटी कंपनियां संचालित होती हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
एच-1बी वीजा महंगा, पीईआरएम निलंबन से आईटी सेक्टर प्रभावित।
नोएडा की कंपनियों के 3000 कर्मचारियों की पोस्टिंग अटकी।
वरिष्ठ कर्मचारियों की छंटनी और ग्रीन कार्ड पर संकट।
प्रवेंद्र सिंह सिकरवार, नोएडा। औद्योगिक नगरी नोएडा में करीब 180 छोटी-बड़ी आईटी कंपनियां संचालित होती हैं। दो लाख से अधिक कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
हर साल औसतन 45 से 50 हजार कर्मचारी ऑन साइट असाइनमेंट और प्रोजेक्ट्स के सिलसिले में अमेरिका जाते हैं। दिसंबर तक तीन हजार कर्मचारी और जाने थे।
हालांकि, परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) निलंबन और एच-1बी वीजा के महंगे होने से अब भारत और खासकर नोएडा के आईटी काॅरीडोर में इसका असर दिखने लगा है।
कंपनियों के भीतर बजट संतुलन बनाने के लिए अधिक वेतनभोगी वरिष्ठ कर्मचारियों की छंटनी की सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
अप्लाई किए गए करीब एक लाख से अधिक ग्रीन कार्ड पर संकट
अमेरिका के फैसले से सीधा और गहरा असर नोएडा के सेक्टर-126, 132 और 135 में स्थित एचसीएल, टीसीएस और इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, काग्निजेंट समेत अन्य बडी कंपनियों पर दिखने लगा है। अमेरिका जाने की फाइलें तैयार कर रहे इंजीनियरों के बीच अब अनिश्चितता का माहौल है।
इस बदलाव से अमेरिकी प्रोजेक्ट्स की संचालन लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढोतरी दर्ज हो सकती है। वर्ष 2009 से अब तक अमेरिका में संचालित आईटी कंपनियों की ओर से 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की अर्जियों के जरिए करीब एक लाख से अधिक ग्रीन कार्ड प्रक्रियाएं शुरू हुई थीं, जिन पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
पद के लिए अमेरिकी नागरिक नहीं हैं उपलब्ध
अमेरिका में एच-1बी और एल-1 वीजा या पीईआरएम प्रक्रिया के तहत किसी विदेशी नागरिक को नौकरी देने से पहले अमेरिकी कंपनियों को पद पर अमेरिकी नागरिक की उपलब्धता नहीं होना कानूनी रूप से साबित करना होता है। स्थानीय कर्मचारी नहीं मिलने पर विदेशी नागरिक या भारतीय को नौकरी दी जाती है। इसकी अनुमति पीईआरएम से ही मिलती है।
महंगा एच-1बी वीजा, एल-1 का विकल्प भी फंसा
अमेरिका ने एच-1बी वीजा महंगा किया है। इसकी 210 डालर आवेदन फीस करीब 18 हजार रुपये एक लाख डाॅलर करीब 85 से 90 लाख रुपये का शुल्क देना होता है। एच-1बी वीजा महंगा होने के बाद कंपनियों के पास एल-1 यानी इंट्रा कंपनी ट्रांसफर वीजा का विकल्प था। लेकिन, अब पीईआरएम के निलंबन के बाद इस वीजा पर भी रोक की आशंका गहरा गई है।
"भारतीयों के लिए एक तरह से यह अच्छा भी है। भारतीय ही वहां उन्नति के दरवाजे खोल रहा है। अमेरिका ने इस फैसले से भारत और भारतीयों के प्रति अपनी मानसिकता भी दर्शाई है।"
-अमित गुप्ता, आईटी कर्मचारी
"इसका असर भारत में दिखने लगा है। बडे वेतनभोगियों को कंपनियों से हटाने की चर्चाएं तेज हो गईं हैं। इस रोक से कंपनियों के कई बडे और महत्वपूर्ण प्राेजेक्ट भी फंस सकते हैंं।"
-भूषण शर्मा, आईटी कर्मचारी
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प्रवेंद्र सिंह सिकरवार
