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अब नोएडा-NCR की तरह पूर्वांचल के युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर, योगी सरकार बना रही तगड़ा प्लान

Published: Sat, 10 Oct 2026 11:43 PM (IST)

मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि पूर्वांचल अब विकास की नई संभावनाओं के रूप में उभर रहा है, जहां युवाओं को नोएडा-एनसीआर जैसे रोजगार के अवसर मिलेंगे।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. पूर्वांचल अब पिछड़े क्षेत्र नहीं, विकास की नई संभावना।

  2. युवाओं को नोएडा-एनसीआर जैसे रोजगार के अवसर मिलेंगे।

  3. प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना, बुनियादी ढांचा सुधारना लक्ष्य।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि पूर्वांचल की पहचान अब पिछड़े क्षेत्र के बजाय विकास की नई संभावनाओं के रूप में उभर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे ने क्षेत्र में आवागमन को गति दी है।

अब विकास का अगला लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना होना चाहिए, जहां पूर्वांचल के बच्चों को भी नोएडा और एनसीआर की तरह रोजगार और आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें। वह शनिवार को संगीत नाटक अकादमी में आयोजित पूर्वांचल महोत्सव ‘माटी-9’ में ‘पूर्वांचल का विकास : द रोड अहेड’ विषय पर परिचर्चा में बोल रहे थे।

अवस्थी ने कहा कि वह नए पूर्वांचल की कहानी सामने लाना चाहते हैं। बीते 10 वर्षों में क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। मीरजापुर में भी जल्द बड़े प्रोजेक्ट आने वाले हैं। विकास का आकलन केवल सड़कों और बड़े प्रोजेक्ट से नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि भी इसका प्रमुख पैमाना है।

पूर्वांचल के कुछ जिलों में प्रति व्यक्ति आय अभी कम है। बेहतर बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर बढ़ाकर इस स्थिति में सुधार किया जा सकता है। ब्रिगेडियर डा. एसके मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पूर्वांचल को बदलते हुए देखा है। आने वाले 10 वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं का और विस्तार होने की उम्मीद है।

कविताओं में झलकी पूर्वांचल की माटी

महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में कवि पंकज प्रसून ने अवधी और भोजपुरी की विशेषताओं को अपनी पंक्तियों में पिरोकर पूर्वांचल की भाषाई पहचान को स्वर दिया- अवधी में रस है तो भोजपुरी में लचक है, अवधी में मिठास है, भोजपुरी में ठसक है। कवि आलोक अविरल ने अपनी रचना के माध्यम से समाज में उम्मीद और सहयोग की अलख जगाई- चलो ये अंधेरे जहां से मिटा दें, मैं लड़ूं, तुम लड़ो रोशनी के लिए।

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डा. भावना श्रीवास्तव ने बच्चों के व्यक्तित्व और उनकी पहचान को केंद्र में रखते हुए संवेदनशील रचना प्रस्तुत की- किसी के सुबह की मुस्कान होना, अंधेरे घर में रौशन-दान होना। हसन काजमी ने प्रेम और प्रतीक्षा के एहसास को अपनी शायरी में पिरोया- खूबसूरत हैं आंखें तेरी रात को जागना छोड़ दे...। कवि सम्मेलन में अशोक टाटंबरी और डा. शैलेंद्र कुमार शुक्ला ने भी काव्य पाठ किया।