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नोएडा एयरपोर्ट से इंटरनेशनल फ्लाइट कब होंगी शुरू? नए रूट, कार्गो और कनेक्टिविटी पर CEO नीतू सामरा ने बताया प्लान

Published: Wed, 23 Sep 2026 09:08 PM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 09:14 PM (IST)

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सीईओ नीतू सामरा ने एयरपोर्ट के तीन महीने के संचालन, विस्तार योजनाओं और भविष्य की कनेक्टिविटी ...और पढ़ें

नोएडा एयरपोर्ट के विस्तार, कनेक्टिविटी, कार्गो परिचालन, डिजिटल सुविधा आदि को लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सीईओ नीतू सामरा ने विस्तार से बातचीत की। जागरण

नोएडा एयरपोर्ट के विस्तार, कनेक्टिविटी, कार्गो परिचालन, डिजिटल सुविधा आदि को लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सीईओ नीतू सामरा ने विस्तार से बातचीत की। जागरण

HighLights

  1. नोएडा एयरपोर्ट से अब 15 शहरों के लिए प्रतिदिन 36 उड़ानें उपलब्ध।

  2. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत के लिए एयरलाइंस से बातचीत जारी है।

  3. एयरपोर्ट पर डिजिटल सुविधाएँ और कार्गो परिचालन पर विशेष ध्यान।

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यात्री उड़ान को शुरू हुए तीन माह हो चुके हैं। पांच शहरों के साथ शुरू हुए नोएडा एयरपोर्ट से आज देश के प्रमुख 15 शहरों तक प्रतिदिन 36 उड़ान उपलब्ध हैं। यात्रियों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

अगले माह देश के कुछ और शहर नोएडा एयरपोर्ट से सीधे जुड़ जाएंगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के कारण नोएडा एयरपोर्ट से दुनिया की हवाई कनेक्टिविटी का बेसब्री से इंतजार हो रहा है।

नोएडा एयरपोर्ट के विस्तार, कनेक्टिविटी, कार्गो परिचालन, डिजिटल सुविधा आदि को लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सीईओ नीतू सामरा से मनोज शर्मा, अरविंद मिश्रा व अर्पित त्रिपाठी ने बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल : एयरपोर्ट का संचालन आरंभ हुए तीन महीने हो चुके हैं। अब तक का अनुभव कैसा रहा? किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

जवाब : अब तक का अनुभव हमारे लिए सीखने और लगातार सुधार करने वाला रहा है। हम यात्रियों को सुविधाजनक और बेहतर अनुभव देने में सफल रहे हैं।

नया बुनियादी ढांचा होने के कारण जहां भी सुधार की गुंजाइश सामने आती है, उस पर नियमित रूप से काम किया जा रहा है। यात्रियों से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है और उसके आधार पर प्रक्रियाओं में बदलाव किए जा रहे हैं।

हमने 15 जून को पांच शहरों के लिए पांच उड़ानों के साथ परिचालन शुरू किया था। अब 15 शहरों के लिए प्रतिदिन 36 उड़ान का संचालन हो रहा है। अलग-अलग शहरों से यात्रियों की रुचि और मांग के आधार पर नेटवर्क विस्तार किया जाएगा।

सवाल : पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के कई प्रमुख शहर अभी नेटवर्क में शामिल नहीं हैं, सीमित नेटवर्क के साथ यात्रियों की संख्या कैसे बढ़ेगी?

जवाब : एयरपोर्ट और एयरलाइंस दोनों मिलकर यातायात और रूट डेवलपमेंट पर काम कर रहे हैं। अक्टूबर के बाद कुछ और शहरों के नेटवर्क से जुड़ने की संभावना है। किसी रूट का विकास केवल एयरपोर्ट संचालक तय नहीं करता।

एयरलाइंस के लिए परिचालन परिस्थितियां, बाजार की मांग, विमान की उपलब्धता और अन्य व्यावसायिक पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। नेटवर्क को धीरे-धीरे 20 या उससे अधिक शहरों तक बढ़ाने की दिशा में काम जारी है।

सवाल : एयरलाइंस लगातार एयरपोर्ट से उड़ान सेवा में कटौती कर रही हैं। एसे में नेटवर्क विस्तार कैसे होगा?

जवाब : नेटवर्क विस्तार के लिए एयरलाइंस के साथ बातचीत में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। कुछ और शहर जुड़ेंगे। हालांकि अंतिम निर्णय एयरलाइंस की अपनी योजना पर निर्भर करेगा। रूट बढ़ाने में विमान की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।

भू राजनीतिक पहलू भी कई चीजें तय करते हैं। विमान की डिलीवरी में पहले कुछ धीमापन रहा था, लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। जैसे-जैसे एयरलाइंस को नए विमान मिलेंगे। उनकी नेटवर्क योजना आगे बढ़ेगी, उसका लाभ नोएडा एयरपोर्ट को भी मिलेगा।

सवाल : ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की शुरुआती छह माह की रिपोर्ट में नोएडा एयरपोर्ट का व्यय, राजस्व से अधिक रहने की बात सामने आई है। इसे आप किस तरह देखती हैं?

जवाब : किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में खर्च होना स्वाभाविक है। एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने के साथ बुनियादी ढांचे के रखरखाव और संचालन से जुड़े खर्च होते हैं।

शुरुआत में यात्री और उड़ानों की संख्या भी सीमित होती है। अब उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ी है। जैसे-जैसे यातायात बढ़ेगा, राजस्व में भी वृद्धि होगी। इसलिए इसे एक प्रगतिशील प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।

सवाल : चेक-इन, सुरक्षा जांच, बोर्डिंग और बैगेज की प्रक्रिया में नोएडा एयरपोर्ट दूसरे एयरपोर्ट से किस तरह अलग है?

जवाब : नोएडा एयरपोर्ट के डिजाइन चरण से ही इसे डिजिटल रूप से सक्षम बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रवेश से लेकर बोर्डिंग तक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है। बोर्डिंग गेट पर भी बायोमीट्रिक सुविधा है।

यदि यात्री डिजि यात्रा के माध्यम से प्रवेश करता है तो आगे की प्रक्रिया में उसकी पहचान केवल चेहरे के माध्यम (फेस रिकग्निशन) से की जा सकती है।

बोर्डिंग पास स्कैन करने की सुविधा भी है। सामान्य व्यवस्था के साथ सेल्फ बैगेज ड्राप की सुविधा उपलब्ध है। इससे यात्रियों को अपनी प्रक्रिया खुद पूरी करने का विकल्प मिलता है और समय की बचत होती है।

सवाल : घरेलू विमान सेवा के लिए यात्रियों के पास आईजीआई दिल्ली और हिंडन जैसे विकल्प हैं। नोएडा एयरपोर्ट पर यूडीएफ अधिक होने और टैक्सी महंगी होने से प्रतिस्पर्धा कठिन हुई है। इसके लिए क्या रणनीति है?

जवाब : यात्रियों का निर्णय सिर्फ टिकट के किराये पर निर्भर नहीं करता। समय, एयरपोर्ट तक पहुंचने की सुविधा, टैक्सी या अन्य परिवहन की उपलब्धता और उड़ान का समय जैसे कई कारक होते हैं। अगर नोएडा एयरपोर्ट से यात्री को अपनी जरूरत के समय उड़ान मिलती है तो वह इसे प्राथमिकता दे सकते हैं।

किसी अन्य यात्री के लिए दिल्ली या हिंडन भी अधिक सुविधाजनक हो सकता है। नोएडा एयरपोर्ट की ताकत इसकी रणनीतिक स्थिति और मजबूत कैचमेंट है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अत्यधिक आबादी वाला क्षेत्र इसके कैचमेंट में आता है।

आगरा, मथुरा और आसपास के कई क्षेत्र भी इसके करीब हैं। यह समझना जरूरी है कि नया एयरपोर्ट मौजूदा एयरपोर्ट का विकल्प बनने के बजाय उसके पूरक के रूप में विकसित होता है।

यात्री कहां रहता है और किस समय यात्रा कर रहा है, इसके आधार पर वह एयरपोर्ट का चुनाव करेगा। जैसे-जैसे नए रूट आएंगे, ऐसे यात्रियों का आधार भी तैयार होगा जो पहले परिवहन के दूसरे साधनों का इस्तेमाल करते थे।

सवाल : अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का दिसंबर से परिचालन शुरू होने की चर्चा है। वैश्विक परिस्थितियों, ईंधन की कीमतों और महंगाई का इस पर कितना असर पड़ सकता है?

जवाब : अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत और रूट तय करना मुख्य रूप से एयरलाइंस की योजना पर निर्भर करता है। हमारी विभिन्न एयरलाइंस के साथ लगातार बातचीत चल रही है। इनमें मध्य-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस शामिल हैं। हमें अंतरराष्ट्रीय परिचालन की दिशा में अच्छी प्रगति की उम्मीद है।

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सवाल : कार्गो परिचालन को लेकर क्या प्रगति हुई है?

जवाब : कार्गो परिचालन भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक साझेदारियों पर काम चल रहा है। एअर इंडिया सैट्स ने स्पाइस एक्सप्रेस और टोटल साल्यूशंस के साथ कार्गो के लिए एमओयू किया है।

अन्य एयरलाइंस और कार्गो पार्टनर्स के साथ भी बातचीत जारी है। धीरे-धीरे फ्रेट उड़ानें भी शुरू होंगी। आसपास का क्षेत्र मजबूत औद्योगिक और विनिर्माण आधार वाला है, इसलिए कार्गो के लिए अच्छी संभावनाएं हैं।

सवाल : एयरपोर्ट पर पार्किंग को जाने वाले सब वे में जलभराव जैसी समस्याएं सामने आईं। इनसे क्या सीख मिली?

जवाब : किसी भी नए और बड़े बुनियादी ढांचे के लिए परीक्षण और उसके बाद मिलने वाली सीख बहुत महत्वपूर्ण होती है। शुरुआत में जो छोटी-मोटी समस्याएं सामने आईं, उन्हें सीमित समय में ठीक किया गया। जहां जरूरत थी, वहां संरचनात्मक सुधार भी किए गए।

सवाल : हाल में एक छात्रा के फ्लाइट मिस करने का मामला सामने आया। ऐसी स्थिति में एयरपोर्ट प्रशासन की भूमिका क्या होती है?

जवाब : एयरपोर्ट और एयरलाइंस की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। सामान की जांच, सुरक्षा और बोर्डिंग से जुड़ी प्रक्रियाएं भी निर्धारित नियमों के तहत होती हैं। हमारी कोशिश रहती है कि एयरपोर्ट पर किसी यात्री को परेशानी होती है तो हमारी हास्पिटैलिटी टीम उससे बात करे और समस्या समझे व ठीक करे। अगर मामला एयरलाइन की प्रक्रिया से जुड़ा है तो उसका समाधान संबंधित एयरलाइन के स्तर पर होता है।

सवाल : एयरपोर्ट से सड़क कनेक्टिविटी को लेकर विभिन्न राज्य परिवहन और एजेंसी के साथ समझौते हुए हैं। यात्रियों को इसका लाभ कब तक और किस रूप में मिलेगा?

जवाब : कनेक्टिविटी के लिए अलग-अलग परिवहन सेवा प्रदाताओं के साथ समझौते किए गए हैं और कई सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। एप आधारित टैक्सी सेवाओं के साथ इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य कैब सेवाएं भी उपलब्ध हैं। लक्जरी से लेकर सामान्य कैब तक अलग-अलग श्रेणियों के विकल्प यात्रियों को मिल रहे हैं। बस कनेक्टिविटी भी लगातार बढ़ रही है। फरीदाबाद से एयरपोर्ट के लिए बस सेवा उपलब्ध है। नोएडा से भी परिवहन निगम की बसें एयरपोर्ट से जुड़ी हैं।

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