नोएडा एयरपोर्ट ने बदली जेवर की जमीन की कीमत, 3 से 5 गुना तक बढ़े भाव; मुआवजे से रकबा जुटाना मुश्किल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कारण जेवर में जमीन के भाव 3 से 5 गुना बढ़ गए हैं, जिससे अधिग्रहण के ...और पढ़ें

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर।
HighLights
जेवर में जमीन के भाव 3 से 5 गुना बढ़े।
किसानों को मुआवजे से दोबारा जमीन खरीदना मुश्किल।
यमुना प्राधिकरण की परियोजनाओं से मांग में वृद्धि।
मनोज कुमार शर्मा, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जेवर में जमीन के भावों की तस्वीर बदल दी है। एयरपोर्ट और उससे जुड़ी परियोजनाओं के कारण जमीन की मांग बढ़ने से अधिग्रहण और प्लानिंग से बची जमीन की कीमत में तीन से पांच गुना तक उछाल आया है।
खासकर आबादी से सटी जमीन के लिए खरीददारों की संख्या कहीं अधिक है। जेवर क्षेत्र में अधिग्रहण के बाद कई किसान मुआवजे की रकम से दोबारा कृषि भूमि खरीदकर खेती किसानी से जुड़ा रहना चाहते हैं। लेकिन जमीन के बदले मिली रकम से पहले जितनी भूमि खरीदने की उम्मीद थी, अब उतनी जमीन मिलना मुश्किल हो चुकी है।
कई परियोजाओं के लिए ली जा रही है जमीनें
एयरपोर्ट के तीसरे चरण में अधिग्रहण के अलावा उसके आसपास यमुना प्राधिकरण औद्योगिक,व्यावसायि, आवासीय व लाजिस्टिक्स परियोजनाओं के लिए किसानों से आपसी सहमति से 33 से 41 लाख रुपये प्रति बीघा के भाव में ली जा रही है, जबकि प्लानिंग और अधिग्रहण से बची जमीन के लिए सवा करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये प्रति बीघा तक कीमत लगाई जा रही है।
सीमित उपलब्धता और बढ़ती मांग के चलते ऐसी जमीन के मालिकों को मुंहमांगे दाम मिल रहे हैं। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले कुछ किसान मुआवजे की रकम से दोबारा खेती की जमीन खरीदना चाहते हैं।
जेवर में बढ़े भाव को देखते हुए उन्होंने बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा का रुख किया, लेकिन वहां भी कृषि भूमि सस्ती नहीं रही। इन जिलों जेवर की अपेक्षा बीघा का रकबा भी छोटा है (जेवर में एक बीघा में 843 मीटर रकबा और अलीगढ़ में 767 मीटर व बुलंदशहर में ज्यादातर जगहों पर एक बीघा में 632 मीटर ही हैं) में खेती की जमीन के भाव करीब 15 से 25 लाख रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गए हैं।
वहीं सड़क से लगी जमीन और आबादी की जमीन के भाव आसपास के जिलों में भी 30 से 50 लाख रुपये बीघा तक पहुंच गए हैं। इसका सीधा असर किसानों की आगे की योजना पर पड़ रहा है।
दोबारा रकबा जुटाना मुश्किल
अधिग्रहण से पहले खेती उनकी नियमित आय का प्रमुख आधार थी। अब मुआवजे की रकम से उतना ही रकबा दोबारा जुटाना मुश्किल हो रहा है। जेवर में बची जमीन के ऊंचे भाव और आसपास के जिलों में बढ़ती कीमतों ने खेती जारी रखने का विकल्प चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
यानी एयरपोर्ट ने जेवर की जमीन की कीमत बढ़ाई तो है, लेकिन जिन किसानों की जमीन गई है, उनके लिए उसी रकम से दोबारा खेती की जमीन जुटाना अब आसान नहीं रहा।
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