काशी में जयपुर रियासत की संपत्ति पर राजस्थान सरकार का दावा, जमीन-जायदाद के पुराने रिकॉर्ड तलाशने में जुटा प्रशासन
राजस्थान सरकार ने काशी में जयपुर रियासत की पूर्व संपत्तियों पर रिपोर्ट मांगी है, जिसके लिए वाराणसी प्रशासन पुराने दस्तावेजों की तलाश कर रहा है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
राजस्थान सरकार ने काशी में जयपुर रियासत की संपत्तियों पर रिपोर्ट मांगी।
1952 के विलय समझौते के तहत राजस्थान ने संपत्ति पर अधिकार जताया।
वाराणसी प्रशासन पुराने संपत्ति रिकॉर्ड खंगालने में जुटा है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। राजस्थान सरकार ने काशी में स्थित जयपुर रियासत की पूर्व संपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इसी संदर्भ में आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद के निर्देश पर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सदर, पिंडरा व राजातालाब तहसील से संपूर्ण जानकारी जुटाने को कहा है।
एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने बताया कि राजस्थान सरकार ने अपने पत्र में जमीन जायदाद संबंधित विवरण उपलब्ध नहीं कराएं हैं। इसके बारे में शासन को अवगत कराया जाएगा। शासन के जरिए राजस्थान सरकार से इसका लेखा जोखा मांगने की काेशिश होगी। बावजूद, तीनों तहसीलों में पुराने दस्तावेजों के आधार पर खोजबीन की जा रही है।
राजस्थान सरकार ने पत्र में 1952 में रियासतों के विलय के दौरान हुए समझौते के अनुच्छेद वीआइ (2)-C का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश में पूर्व जयपुर रियासत की संपत्तियों पर अपने अधिकार का दावा किया है। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद को लिखे पत्र में वाराणसी समेत प्रयागराज, आगरा और मथुरा प्रशासन को पत्र भेजकर संपत्तियों की स्थिति की जांच की आख्या मांगी गई है।
कई मंदिरों, भवनों पर राजस्थान देवस्थान का नियंत्रण
श्रीकाशी विश्वनाथ के सामने स्थित श्री आदि विश्वेश्वरनाथ मंदिर समेत कई मंदिर, भवन, संपत्ति पर राजस्थान देवस्थान का प्रत्यक्ष प्रभार है।
काशी में स्थित राजस्थान देवस्थान विभाग से जुड़ी संपत्तियों में एक मंदिर के महंत ने बताया कि रामेश्वर, डूंगरेश्वर, महालक्ष्मी, श्री आदि विश्वेश्वरनाथ और माणिकर्णिका घाट स्थित मनोकामेश्वर महादेव मंदिर इसमें शामिल हैं।
राणा महल क्षेत्र स्थित वक्रतुंड गणेश जी व शंकर जी मंदिर भी राजस्थान देवस्थान विभाग के रिकार्ड में दर्ज है। इसके एक हवेली समेत मान मंदिर मोहल्ले में भी कई संपत्तियां हैं। इसमें कई मकान भी है।
हालांकि कुछ पर विवाद है। स्थानीय लोगों के अनुसार राजस्थान देवस्थानम से जुड़े तीन मंदिर व संपत्तियां श्री काशी विश्वनाथ धाम निर्माण के दौरान हट गईं।
अलग-अलग व्यवस्था में हाेता है मंदिरों का संचालन
राजस्थान देवस्थान विभाग के रिकार्ड में मंदिरों व संपत्तियों के प्रबंधन की अलग-अलग व्यवस्था है। राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार में संपत्ति का सीधा प्रबंधन विभाग करता है। आत्मनिर्भर श्रेणी में मंदिर सरकार के अधीन रहते हैं और प्रबंधन के लिए पुजारियों को अधिकृत किया जाता है।
