नोएडा-गाजियाबाद की 100 से ज्यादा सोसायटियों में चल रहे 231 जनरेटर, प्रदूषण पर रोक के आदेश बेअसर?
नोएडा और गाजियाबाद की 100 से अधिक सोसायटियों में सीएक्यूएम के प्रतिबंध के बावजूद 231 डीजल जनरेटर अवैध रूप से ...और पढ़ें

नोएडा की एक सोसायटी में संचालित जनरेटर। जागरण
HighLights
100 से अधिक सोसायटियों में 231 डीजल जनरेटर।
सीएक्यूएम के प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से संचालन।
लाखों निवासियों को जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर।
प्रवेंद्र सिंह सिकरवार, नोएडा। नोएडा और गाजियाबाद के बहुमंजिला अपार्टमेंट्स में रहने वाले लाखों की आबादी के लिए बिजली गुल होना मुसीबत से कम नहीं है। सीएक्यूएम (कमीशन फार एयर क्वालिटी माॅनीटरिंग) के आदेश पर डीजल जनरेटर के संचालन पर रोक है।
इसके बावजूद दोनों शहरों की 100 से अधिक ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में 231 धुआं उगलते हुए जनरेटरों का संचालन अवैध तरीके से डीजल से होगा।
मेंटेनेंस एजेंसियों की लापरवाही, बिल्डरों की आर्थिक हीलाहवाली और फंड की तंगी का पूरा खमियाजा फ्लैट खरीदार और शहर के लोगों को जहरीली हवा में सांस लेकर चुकाना पड़ेगा।
115 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में कुल 388 डीजल जनरेटर सेट
नोएडा में 115 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में कुल 388 डीजल जनरेटर सेट काम कर रहे हैं। इनमें से 55 सोसायटियों ने जनरेटर को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) से चलाने के लिए बाकायदा कनेक्शन लिया हुआ है। वहीं, 22 सोसायटियों ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए रेट्रोफिटेड एमिशन कंट्रोल डिवाइस (आरईसीडी) किट लगवाई है। इस तरह 77 सोसायटियों के 312 जनरेटर पाइप्ड नेचुरल गैस और किट की मदद से ड्यूल फ्यूल मोड पर काम कर रहे हैं।
मीटर तो लग गए लेकिन गैस सप्लाई न हुई शुरू
इसके उलट 38 सोसायटियां ऐसी हैं जहां 76 जनरेटर अब भी डीजल से ही धुआं उगल रहे हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान केवल चार सोसायटियों ने इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आइजीएल) में नए कनेक्शन के लिए आवेदन किए। इनमें मीटर तो लग गए, मगर एक जगह अब तक गैस की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
56 सोसायटियों में 155 जनरेटर बेधड़क डीजल जला रहे
गाजियाबाद में स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इंदिरापुरम, क्रासिंग रिपब्लिक, वैशाली और राजनगर एक्सटेंशन की 98 हाउसिंग सोसायटियों में 290 जनरेटर स्थापित हैं। इनमें से 42 सोसायटियों के 135 जनरेटर ही पाइप्ड नेचुरल गैस और रेट्रोफिटेड डिवाइस लगाकर स्वच्छ ईंधन से चलाने की व्यवस्था कर ली है। शेष 56 सोसायटियों में 155 जनरेटर बेधड़क डीजल जला रहे हैं।
पुराने जनरेटर मंगवाकर काम चलाया जा रहा
सोसायटियों के अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन और मेंटेनेंस दफ्तरों का अपना अलग ही रोना है। अधिकांश पुराने और अटके हुए प्रोजेक्ट्स में मेंटेनेंस फंड खाली पड़ा है। भारी-भरकम लागत से बचने के लिए कई सोसायटियों में थर्ड पार्टी वेंडरों से किराए के पुराने जनरेटर मंगवाकर काम चलाया जा रहा है।
नोएडा की सोसायटियों में जनरेटर के आंकड़े
| सोसायटियां | 115 |
| जनरेटर | 388 |
| ड्यूल फ्यूल जनरेटर | 312 |
| डीजल जनरेटर | 76 |
गाजियाबाद की स्थिति
| सोसायटियां | 98 |
| कुल जनरेटर | 290 |
| ड्यूल फ्यूल जनरेटर | 135 |
| डीजल पर निर्भर जनरेटर | 155 |
डीजल जनरेटर के संचालन पर रोक लगाने के लिए अब तक 250 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें सोसायटी, फैक्ट्री और कंपनियां शामिल हैं। जनरेटर के संचालन को लेकर वर्कशाप भी कराई जा रहीं हैं।
-रितेश तिवारी, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीपीसीबी नोएडा।
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