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नेपाल-बांग्लादेश की तरह Gen-Z की फौज तैयार कर सत्ता पलटने की थी साजिश, नोएडा पुलिस को मिली 28 पन्नों की डायरी ने खोले राज

Published: Fri, 24 Apr 2026 02:30 AM (IST)Updated: Fri, 24 Apr 2026 09:48 AM (IST)

नोएडा पुलिस ने एक बड़ी साजिश का खुलासा किया है, जिसमें उपद्रवी Gen-Z को देश विरोधी गतिविधियों के लिए स्लीपर ...और पढ़ें

HighLights

  1. उपद्रवी जेन-जी को स्लीपर सेल बनाने की कर रहे थे तैयारी

  2. हिमांशु की डायरी में मिले देश विरोधी गतिविधियों के साक्ष्य

  3. बांग्लादेश की तर्ज पर युवाओं को जोड़ने की थी साजिश

मुनीश शर्मा, नोएडा। सरकार की रीति-नीति विरोधी विचारधारा रखने वाले Gen-Z को उपद्रवी अपने साथ जोड़कर स्लीपर सेल की तरह तैयार कर रहे थे। एक टीम एनसीआर समेत देशभर के Gen-Z को चिह्नित कर रही थी, जबकि दूसरी टीम लीड की तरह इन Gen-Z को अपने साथ जोड़ने में जुटी थी।

गिरफ्तार आरोपितों के बरामद सामान से एक डायरी में इस तरह के साक्ष्य मिले हैं। यह डायरी हिमांशु की बताई जा रही है। यह सब नेपाल और बांग्लादेश की तरह Gen-Z की फौज तैयार कर देश में बड़ा हंगामा करने की साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। नोएडा पुलिस और जांच एजेंसी की जांच जारी है।

28 पेज की डायरी से खुलेंगे कई राज 

विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो पुलिस को 28 पेज की डायरी में 18-20 नामों के बारे में जानकारी है। यह Gen-Z इंटरनेट मीडिया पर देश व सरकार विरोधी विचार रखते हैं। कैंपस आदि में विरोधी भाषणबाजी करते हैं। उपद्रवियों की एक टीम इन पर काम करती है। इनसे संपर्क कर अपने संगठन की रीति-नीतियाें से अवगत कराया जाता है।

इनका ब्रेनवॉश किया जाता है। भविष्य में स्लीपर सेल की तर्ज पर उपयोग किया जाता है। नोएडा पुलिस और जांच एजेंसी इस डायरी में दर्ज जानकारी के आधार पर आगे बढ़ रही है।

पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हिंसा में शामिल आरोपितों के खिलाफ जांच के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। संगठित अपराध समेत अन्य पहलूओं पर भी जांच जारी है।

बांग्लादेश में Gen-Z कर चुके हैं सत्ता परिवर्तन

Gen-Z बांग्लादेश और श्रीलंका से लेकर नेपाल तक में सत्ता परिवर्तन करवा चुके हैं। जेनरेशन-जी का मतलब 1997 और 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी से है। इन्हें इंटरनेट और इंटरनेट मीडिया सहित आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बड़ी हुई पहली पीढ़ी माना जाता है।

सभी गिरफ्तार आरोपित हैं पढ़े-लिखे

अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि रूपेश खुद को आटो चालक के रूप में पेश करता है, लेकिन वह सोशल वर्कर है। आदित्य इंजीनियर हैं, जबकि मनीषा 12वीं पास और गारमेंट फैक्ट्री में नौकरी करती थी।

उधर, सृष्टि रविंद्र नाट्य से प्रमाणपत्र प्राप्त कलाकार है। आकृति इतिहास से परास्नातक और नेट उत्तीर्ण है। वह और हिमांशु पीएचडी कर रहे हैं। उधर, सत्यम वर्मा लखनऊ व दिल्ली में पत्रकार रहे हैं। वह कई कृतियों सहित जटिल ग्रंथों के अनुवाद में विशेषज्ञता रखते हैं।

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