नोएडा में 81 गावों के किसानों की अथॉरिटी से वार्ता सकारात्मक, पर सभी मांगों का अंतिम समाधान बाकी; धरना जारी
नोएडा प्राधिकरण में भारतीय किसान यूनियन मंच के नेतृत्व में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ...और पढ़ें

नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय के बाहर किसानों का धरना। फोटो: जागरण
HighLights
81 गांवों के किसानों ने नोएडा प्राधिकरण पर विरोध प्रदर्शन किया
किसानों की विभिन्न मांगों पर अधिकारियों के साथ सकारात्मक वार्ता हुई
अंतिम समाधान के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी
जागरण संवाददाता, नोएडा। किसान अस्तित्व बचाओ आंदोलन के तहत भारतीय किसान यूनियन मंच के नेतृत्व में बुधवार को सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण मुख्य प्रशासनिक भवन पर 81 गांवों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया गया।
धरना स्थल पर किसानों और पुलिस के बीच प्रदर्शन के दौरान कई बार नोकझोंक हुई, लेकिन किसान अपनी मांगों पर डटे रहे, आबादी तोड़े जाने, धारा-10 के नोटिस जारी किए जाने तथा किसानों के पांच प्रतिशत प्लॉट से जुड़े मामलों को लेकर अपना आक्रोश प्रकट किया।
हालांकि किसानों से बातचीत करने के लिए धरना स्थल पर ओएसडी क्रांति शेखर सिंह व इंदु प्रकाश सिंह, एसीपी प्रवीण कुमार सिंह के साथ पहुंचे, लेकिन किसानों ने बातचीत करने से इनकार कर दिया, कहा कि अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह को धरना स्थल पर बुलाया जाए, क्योंकि वह ही किसानों की जमीन को खाली कराने के लिए बुलडोजर भेज रहे हैं।
इसके बाद एसीईओ पुष्पराज सिंह किसानों के बीच पहुंचे और वार्ता का प्रस्ताव रखा, जिसे किसानों ने स्वीकार किया। 40 किसानों का प्रतिनिधिमंडल नोएडा प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश की अध्यक्षता में वार्ता करने के लिए कार्यालय के अंदर पहुंचा।
मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के समक्ष अपनी सभी मांगें मजबूती से रखीं। वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती हुई दिखाई दी, लेकिन किसानों की सभी मांगों का अंतिम समाधान अभी बाकी है।
दो घंटे चली वार्ता, मांगों पर चर्चा
दो घंटे से अधिक समय तक चली वार्ता में नोएडा प्राधिकरण की ओर से कुछ मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया गया। भारतीय किसान यूनियन मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी ने निर्णय लिया है कि बृहस्पतिवार को पुनः सभी किसानों को धरना स्थल पर बुलाया जाएगा।
किसानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करने के बाद संगठन आगे की रणनीति और आंदोलन की दिशा तय करेगा। भारतीय किसान यूनियन मंच स्पष्ट करता है कि किसानों के अधिकारों और सम्मान की इस लड़ाई को मजबूती से जारी रखा जाएगा और जब तक किसानों की जायज मांगों का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों ने ये मुद्दे प्रस्तुत किए
- गांवों में नक्शा नीति का विरोध एवं किसानों को उससे राहत।
- किसानों की संपूर्ण आबादी का विनियमीकरण।
- अर्जित भूमि के सापेक्ष किसानों को 5 प्लस 5 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत प्लॉट का प्रावधान।
- किसानों के 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान।
- 100 प्रतिशत मुआवजा उठाने के बाद 10 प्रतिशत राशि वापस जमा कर पांच प्रतिशत प्लॉट का प्रावधान पुनः लागू करना।
- किसानों के आवंटित पांच प्रतिशत प्लॉट का आवंटन तथा उन पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति।
- वर्ष 1976 से 1997 के बीच के किसान कोटा प्लॉट का समाधान।
- गांवों में किसानों के लिए समुचित विकास कार्य कराए जाने सहित अन्य महत्वपूर्ण मांगें।
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