नोएडा में किसानों का 7 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन, प्राधिकरण के मुख्य भवन पर करेंगे प्रदर्शन
भारतीय किसान यूनियन मंच 7 अक्टूबर से नोएडा प्राधिकरण में अनिश्चितकालीन 'किसान अस्तित्व बचाओ आंदोलन' शुरू करेगा। यह आंदोलन किसानों ...और पढ़ें
HighLights
भारतीय किसान यूनियन मंच 7 अक्टूबर से आंदोलन करेगा।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन में होगा प्रदर्शन।
किसानों की लंबित समस्याओं और मांगों पर कार्रवाई की मांग।
जागरण संवाददाता, नोएडा। भारतीय किसान यूनियन मंच के केंद्रीय कार्यालय शाहपुर में रविवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किसानों की वर्षों से लंबित समस्याओं पर गहन चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि सात अक्टूबर से सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन में अनिश्चितकालीन किसान अस्तित्व बचाओ आंदोलन प्रारंभ होगा।
भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी ने कहा कि नोएडा और उसके आस-पास के किसानों की समस्याओं का समाधान लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया था।
इस कमेटी ने यह माना था कि किसानों के प्लाटों को केवल अतिक्रमण के नाम पर नहीं रोका जाना चाहिए और किसानों की आबादी का निस्तारण किया जाना चाहिए।
किसानों का आक्रोश बढ़ा
उन्होंने कहा कि हाई पावर कमेटी की सिफारिशों को लगभग चार वर्ष हो चुके हैं, लेकिन शासन स्तर पर इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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उन्होंने यह भी कहा कि डबल इंजन की सरकार में यदि किसानों की जायज मांगों और हाई पावर कमेटी की सिफारिशों पर चार वर्षों तक कोई निर्णय नहीं होता, तो यह किसानों के साथ गंभीर अन्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसान अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करेंगे।

आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव संपर्क अभियान चलाने और अधिक से अधिक किसानों को आंदोलन से जोड़ने का निर्णय लिया गया है।
किसानों की प्रमुख मांगें
-संपूर्ण आबादी का निस्तारण।
-किसानों के मूल पांच प्रतिशत के प्लॉट दिए जाएं।
-1976 से 1997 के बीच के किसान कोटा प्लॉट किसानों को दिए जाएं।
-किसानों को 10 प्रतिशत प्लॉट दिए जाएं।
-गांव की नक्शा नीति का विरोध।
-किसानों को जारी किए जा रहे धारा 10 के नोटिसों का विरोध।
-किसानों की आबादी और प्लॉट से जुड़े मामलों का स्थायी समाधान।
