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ग्रेटर नोएडा कांड: मैगी में जहर या नींद की गोलियों का ओवरडोज? 5 मौतों पर एक्सपर्ट्स का बड़ा खुलासा

Published: Sun, 18 Oct 2026 07:49 AM (IST)Updated: Sun, 18 Oct 2026 08:02 AM (IST)

रबूपुरा के नंगला श्रीगोपाल गांव में पांच लोगों की मौत के मामले में विशेषज्ञ मैगी में जहरीला पदार्थ या नींद की गोलियों के ओवरडोज को कारण मान रहे हैं।

नोएडा परिवार की मौत का रहस्य गहराया ( फोटो स्रोत : जागरण )

नोएडा परिवार की मौत का रहस्य गहराया ( फोटो स्रोत : जागरण )

HighLights

  1. रबूपुरा में पांच लोगों की मौत का मामला।

  2. विशेषज्ञों ने जहरीला पदार्थ या नींद की गोली ओवरडोज को माना कारण।

  3. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत की वजह होगी स्पष्ट।

सुमीत कुमार, नोएडा। रबूपुरा के नंगला श्रीगोपाल गांव में शनिवार सुबह तीन बच्चों समेत पांच लोगों के मौत के मामले में विशेषज्ञ चिकित्सक मैगी में कम मात्रा में जहरीला पदार्थ मिलाने व चाय के साथ नींद की गोली खाने से ओवरडोज को मृत्यु का कारण मान रहे हैं।

मौके पर वास्तविक स्थिति को देखकर यह आशंका विशेषज्ञों ने जताई है। मृतकों का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें एक बच्चे के मुंह से झाग निकलते दिख रहा है। बेटा अपने पिता और बेटियां मां के पास लेटी हुईं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जहर से मौत होने से पहले इंसान छटपटाता है।

पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

यह मामला बिल्कुल अलग है। इसको देखकर लगता है कि सभी की मौत सोते-सोते हुईं हैं। ऐसी मौत नींद की गोलियों की ओवरडोज या नींद की डोज के बाद जहर खिलाने से हो सकती है। पूरी स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

माना जा रहा है कि बच्चों की मैगी में धीमी गति से असर करने वाला जहरीला पदार्थ मिलाया गया होगा, जिससे सिर्फ एक बच्चे के ही मुंह से झाग निकला, जबकि दोनों बेटियों को मां ने अपने गले से चिपका लिया। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा।

मेदांता अस्पताल नोएडा में इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डा. जीसी वैष्णव का कहना है कि पोटेशियम सायनाइड (जहर) खाने से व्यक्ति की कुछ सेकेंड में मौत हो जाती है। यह बाजार में बिक्री के लिए प्रतिबंधित है। कम गुणवत्ता का जहरीला पदार्थ धीरे असर करता है, जबकि अधिक मात्रा में जहरीला पदार्थ खाने से उल्टी होती है।

नींद गोलियों की वजह से नहीं जाग पाया परिवार

रबुपुरा की घटना में परिवार ने संभवत: नींद की ज्यादा गोलियां खाई होंगी, जिससे सोते समय किसी को झटपटाहट या घबराहट नहीं हुई होगी। खतरनाक कपूर या चूंहे मारने की दवाई तुरंत असर करती हैं, जिसमें व्यक्ति के मुंह से झाग निकलना, घबराहट या बेचैनी होती है।

डा. रेनू अग्रवाल बताती हैं कि नींद की गोलियां ज्यादा लेने से बच्चे और पति-पत्नी नींद से नहीं जागे होंगे। कोई भी जहरीला पदार्थ खाने पर घबराहट, बेचैनी और बेसुध होने जैसे लक्षण आते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही जहरीले पदार्थ की गुणवत्ता, क्वांटिटी समेत अन्य पहलू स्पष्ट होंगे।

फोरेंसिक एक्सपर्ट डा. ऋषभ कुमार सिंह का मानना है कि नींद की गोलियां या गंभीर बीमारियों की दवाई ज्यादा मात्रा में लेने से मौत हो सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही मौत की सही वजह पता चलेगी। कई बार ऐसी घटनाओं में बिसरा जांच से ही पुष्टि होती है।

डॉ डीके गुप्ता ने किए कई खुलासे 

फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डा. डीके गुप्ता की मानें तो फूड प्वाइजनिंग दूषित भोजन या पानी के सेवन से होने वाली स्वास्थ्य समस्या है। इसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके द्वारा बनाए विषैले पदार्थ शरीर में पहुंचने पर बीमारी हो सकती है।

लंबे समय तक रखा हुआ भोजन, ठीक से न पका खाना, खुले में रखा खाद्य पदार्थ, दूषित पानी और साफ-सफाई का ध्यान न रखने से फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ता है। मौत होने में काफी समय लगता है।

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