Exclusive: नोएडा में बिल्डरों को 15 साल पुरानी दर पर 85 एकड़ जमीन देने की तैयारी; किसान परिवारों में नाराजगी
नोएडा प्राधिकरण स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत सेक्टर-150 में बिल्डरों को 85 एकड़ जमीन 15 साल पुरानी दर पर आवंटित ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
नोएडा प्राधिकरण 85 एकड़ जमीन पुरानी दर पर देगा।
किसान परिवारों ने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई।
बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पर सदस्यों में असहमति।
कुंदन तिवारी, नोएडा। नोएडा प्राधिकरण स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत पॉश सेक्टर-150 में बिल्डरों को 15 वर्ष पुरानी आवंटन दर पर 85 एकड़ जमीन आवंटित करेगा। 2012 में प्राधिकरण की आवंटन दर मात्र 12050 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर थी।
वर्तमान में बाजार में जमीन की कीमत करीब पांच लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है, लेकिन बिल्डरों को इस दर पर जमीन न देकर 15 वर्ष पुरानी दर पर आवंटित की जाएगी। दो दिन बाद होने वाली बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव लाने की तैयारी हो गई है।
अनुमोदन मिलने के बाद होगी कार्रवाई
चेयरमैन से अनुमोदन मिलने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई होगी। प्रस्ताव के पास होने के बाद प्राधिकरण को बिल्डरों से जमीन का करीब 5,12,12,50,000 रुपये राजस्व मिलेगा। यदि बाजार दर पर बिल्डरों को जमीन दी जाती तो प्राधिकरण को करीब दो खरब 12 अरब 50 करोड़ रुपये रुपये का राजस्व मिलता।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड बैठक के कई सदस्य इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है। इसी वजह से एक सप्ताह में तीन बार बोर्ड बैठक टल चुकी है। पहले बैठक 23 अक्टूबर को होनी थी बोर्ड सदस्य इस प्रस्ताव के लिए राजी नहीं हुए तो बैठक को 24 अक्टूबर, फिर 26 अक्टूबर और अब 28 अक्टूबर कर दिया गया है।
किसान परिवारो ने मुख्यमंत्री से मांगी मदद
प्रस्तावित जमीन सेक्टर-150 के गढ़ी समस्तीपुर और मोमनाथल तथा सेक्टर-149 के कोंडली बांगर गांव की है। ग्रामीणों का कहना है कि 85 एकड़ जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ है और यह गांवों की मूल आबादी का हिस्सा है। यहां करीब 1500 किसान परिवारों के मकान बने हैं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर राहत मांगी है।
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तीन गांवों के जमी का किया जाएगा अधिग्रहण
सूत्रों के अनुसार बोर्ड बैठक के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार भविष्य में तीनों गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके बाद बिल्डरों को उक्त जमीन वर्तमान दर के बजाय 2012 की दर पर आवंटित किया जाएगा।
नियमानुसार अधिग्रहण के बिना प्राधिकरण ऐसा प्रस्ताव बोर्ड में नहीं ला सकता। जमीन अधिग्रहण के बाद सेक्टर का लेआउट प्लान बनाकर आवंटन के लिए नीलामी प्रक्रिया अपनानी होगी। निलामी से प्राधिकरण को अधिक राजस्व मिलने की संभावना रहती है।
बिल्डरों ने जमीन आवंटित करने का किया अनुरोध
सूत्रों के अनुसार, बिल्डर ने सात सितंबर को प्राधिकरण को पत्र लिखकर अपने भूखंड के पास की जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया था। 24 सितंबर को भेजे एक अन्य पत्र में कंपनी ने तीनों गांवों में अधिग्रहण से छूटे जमीन के हिस्सों का अधिग्रहण कराने और संबंधित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।
जमीन की श्रेणी बदलने पर सवाल
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में जिनेंद्र, प्रमोद, दशरथ, अजय आदि ग्रामीणों ने बताया कि आबादी की जमीन अधिग्रहण से बाहर थी। उसका उपयोग आबादी के रूप में होता रहा। ग्रामीणों ने गैर-अधिग्रहित आबादी भूमि को परियोजना में शामिल करने और जमीन की श्रेणी बदलने पर सवाल उठाए हैं।
किसी निर्णय से पहले राजस्व रिकार्ड, अधिग्रहण की स्थिति और आबादी की मौजूदा सीमाओं की जांच तथा अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्राधिकरण का कोई भी अधिकारी इस संबंध में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
15 वर्ष पहले भी बिल्डर को दिया गया लाभ
28 मार्च 2011 को स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में सेक्टर-150 के एससी-01 भूखंड के लिए 12050 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 907987.81 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा दिया गया था। बिल्डर को आठ लाख वर्ग मीटर जमीन आवंटित की जानी थी। बिल्डर ने भूखंड के 27 टुकड़े कर अन्य बिल्डरों को बेच दिए। मामला 15 वर्ष से लंबित है और समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
