इंजीनियर मौत मामला: SIT ने नोएडा अथॉरिटी के चार विभागों को माना घटना का केंद्र, इन 9 सवालों के मांगे जवाब
नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर मौत के मामले में एसआईटी ने ...और पढ़ें
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत मामले की जांच के साथ कार्रवाई तेज हो गई है। फाइल फोटो सौजन्य- जागरण ग्राफिक्स
HighLights
प्राधिकरण अधिकारी एसआईटी को बृहस्पतिवार को सौंप सकते हैं जवाब
इसी जवाब के आधार पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी
इंजीनियर युवराज मेहता की बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर हुई थी मौत
जागरण संवाददाता, नोएडा। नोएडा के सेक्टर 150 में बिल्डर परियोजना के बेसमेंट के गड्ढे में 16 जनवरी को इंजीनियर युवराज मेहता की कार समेत डूबने के मामले में एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से रिपोर्ट तलब की है। एसआईटी ने चार विभागों पर अपनी जांच केंद्रित कर दी है। प्राधिकरण अधिकारी जवाब तैयार करा रहे हैं। बृहस्पतिवार को एसआईटी को जवाब सौंप देगा।
बता दें कि एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण के सिविल, एनटीसी, नियोजन और जल खंड विभाग से अपने जवाब देने को कहा है। सिविल का काम निर्माण करना था। मसलन ड्रेनेज टूटी थी तो उसका रखरखाव क्यों नहीं किया गया। नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) यानी सड़क पर यातायात सुरक्षा के लिहाज से उपाए क्यों नहीं किए गए।
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इसी 90 डिग्री के डेथ प्वाइंट पर हादसा हुआ था। फोटो सौजन्य- जागरण
बिना बुनियादी सुविधाओं के कैसे जारी हो गए अधिभोग प्रमाण पत्र?
नियोजन विभाग यानी स्पोर्ट्स सिटी बसाने के लिए क्या योजना थी, मानचित्र से लेकर स्वीकृत तक। एसआईटी ने सवाल किया कि एक बिल्डर को 13 लाख वर्गमीटर जमीन आवंटित की थी तो उसने 21 भूखंड में उसे तोड़ कर कैसे बेच दिया। इनमें 12 सोसायटी बनी है। करीब 25 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं।
ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) जारी करने के क्या नियम है। इस पर लिखित जवाब मांगा है। बिना बुनियादी सुविधाओं के अधिभोग प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। 150 सेक्टर की सोसायटियों को कैसे प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। जल सीवर विभाग से ड्रेनेज सिस्टम तैयार न करने का कारण पूछा गया है।
इन सवालों का देना है जवाब
- घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर क्यों नहीं गए?
- सोसायटीवासियों की ओर से तीन पत्र लिखे गए। तीनों का जवाब और मांग के अनुसार काम क्यों नहीं कराया गया?
- भविष्य में दोबारा इस तरह की घटना रोकने के लिए क्या तैयारी हो रही है ?
- एक तरफ पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है दूसरी तरफ प्राधिकरण के पास डेटा तक नहीं किसका भूखंड है?
- कितने साल में भूखंड पर काम पूरा होना था, यदि काम नहीं किया गया तो नियमत: आवंटन रद क्यों नहीं किया गया?
- जब डार्क स्पॉट के लिए सर्वे कराया गया तो इस बिंदु को कैसे भूल गए, कहा और किसकी चूक है?
- स्ट्रीट लाइट के लिए पोल लगाए गए, लेकिन वह जलती क्यों नहीं?
- निर्माण कार्य पूरा करने की प्रक्रिया क्या है?
- जितने भी पत्र जारी किए गए उन पर आइजीआरएस लगाई गई आपने क्या जवाब दिया?
वर्क ऑडर न रुकते तो हो जाता निर्माण
वित्तीय अनियमिततओं को देख नोएडा प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारी ने सिविल, अन्य खंडों में कोटेशन के जरिये एक से पांच लाख तक के सभी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। इसी तरह सिविल, जल, विद्युत यांत्रिकी, उद्यान, जन स्वास्थ्य और अन्य विभागों से संबंधित सिविल और अनुरक्षण कार्य जिनकी लागत दो करोड़ की सीमा में है।
ऐसे कार्यों की सैद्धांतिक स्वीकृति अपर मुख्य कार्य पालक अधिकारी से मिलती है। इन सभी कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। बिना सीईओ अनुमति के अब कार्यों के लिए टेंडर नहीं होंगे। जितने भी पत्र सोसायटी की ओर से भेजे गए। सब पर अनुमोदन मिल चुका था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी थी। इसलिए कार्य होने में समय लगा।
चार दिन बाद भी नहीं बदली तस्वीर
चार दिन बाद भी घटना स्थल की तस्वीर नहीं बदली है। सिर्फ पुलिस के बैरिकेडिंग लगे है। भारी पुलिस बल तैनात है, न तो स्पीड ब्रेकर पर थर्मो प्लास्टिक पेंट किया गया, न टूटी ड्रेनेज से प्लॉट में पानी को जाने से रोका गया। लगातार पानी प्लॉट में जा रहा है। घटना स्थल से 50 मीटर पहले और 50 मीटर आगे तक अब भी वहीं हाल है। खतरा अब भी बना हुआ है।
