नोएडा एयरपोर्ट की उड़ान उम्मीद से धीमी, 28.3 करोड़ का घाटा; अंतरराष्ट्रीय सेवाओं का इंतजार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआती परिचालन गति अनुमान से धीमी है, जिसका मुख्य कारण मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां हैं। हालांकि, ऑपरेटर ...और पढ़ें

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का दृश्य। जागरण
HighLights
नोएडा एयरपोर्ट की शुरुआती परिचालन गति भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित।
राजस्व प्राप्ति कम, परिचालन खर्च अधिक, शुरुआती वित्तीय घाटा दर्ज।
दीर्घकालिक विकास पर भरोसा, अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की उम्मीद बरकरार।
जागरण संवाददाता, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिचालन की शुरुआती रफ्तार अनुमान की तुलना में धीमी है। एयरपोर्ट परिचालन खर्च के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति कम रही है। एयरपोर्ट का संचालन करने वाली ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने अपनी पहली छमाही की निवेश प्रस्तुति में मौजूदा भूराजनीतिक परिस्थितियों को चुनौती बताते हुए निकट अवधि के प्रदर्शन में अनिश्चितता बने रहने का अनुमान जताया है।
हालांकि, कंपनी ने एयरपोर्ट के दीर्घकालिक विकास को लेकर भरोसा कायम रखा है और रूट नेटवर्क के लगातार विस्तार के साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू होने की उम्मीद जताई है।
नोएडा एयरपोर्ट पर 15 जून से व्यावसायिक परिचालन शुरू हुआ था। जून के शुरुआती 15 दिनों में एयरपोर्ट पर 204 फ्लाइट मूवमेंट और करीब 25 हजार यात्रियों की आवाजाही हुई। जुलाई में फ्लाइट मूवमेंट बढ़कर 1,044 और यात्रियों की संख्या 77,204 पहुंच गई। यानी परिचालन में तेजी तो आई, लेकिन आपरेटर को अभी भी अपेक्षा से धीमी गति से वृद्धि का अनुमान है। एयरपोर्ट के परिचालन शुरू होने का समय वैश्विक विमानन क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण समय रहा।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भूराजनीतिक अस्थिरता के कारण कई एयरलाइनों को अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उड़ान कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद रहने से भारत से पश्चिम दिशा में जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी नोएडा एयरपोर्ट से प्रस्तावित परिचालन शुरू नहीं किया।
वर्तमान में 17 घरेलू रूट का हो रहा संचालन
ज्यूरिख एयरपोर्ट की प्रस्तुति के मुताबिक वर्तमान में इंडिगो और अकासा एयर के माध्यम से नोएडा एयरपोर्ट से 17 घरेलू रूट संचालित हो रहे हैं। आपरेटर का कहना है कि रूट नेटवर्क आगे भी बढ़ेगा और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सेवाओं के आने की उम्मीद है। इससे साफ है कि धीमी रफ्तार का मतलब उड़ानों का विस्तार रुकना नहीं, बल्कि अपेक्षित गति से कम गति से बढ़ना है।
शुरुआती चरण में करीब 28.3 करोड़ रुपये का वित्तीय दबाव
परिचालन के शुरुआती चरण में नोएडा एयरपोर्ट पर वित्तीय दबाव भी सामने आया है। ज्यूरिख एयरपोर्ट की निवेशक प्रस्तुति के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में एयरपोर्ट से 2.5 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 29.5 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि 4.9 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 57.9 करोड़ रुपये का परिचालन खर्च रहा। इस अवधि में ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले 2.4 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 28.3 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया।
धीमी रफ्तार का एयरपोर्ट से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है असर
नोएडा एयरपोर्ट की धीमी शुरुआती रफ्तार का असर जेवर में एयरपोर्ट आधारित कारोबार के विस्तार पर भी पड़ सकता है। यात्री संख्या बढ़ने के साथ टैक्सी, होटल, रेस्टोरेंट, पार्किंग, लाजिस्टिक्स और अन्य सेवाओं में रोजगार व कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और नए घरेलू रूट के विस्तार की गति जेवर के स्थानीय कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
एयरपोर्ट की शुरुआती यात्री क्षमता सालाना 1.2 करोड़ है, जबकि मास्टरप्लान में आगे चलकर इसे 70 मिलियन से अधिक यात्रियों की क्षमता तक विकसित करने का प्रावधान है। ऐसे में मौजूदा चुनौती को दीर्घकालिक परियोजना पर संकट के बजाय शुरुआती परिचालन चरण की रफ्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने भी भारतीय विमानन बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं पर मजबूत भरोसा जताया है।
यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रा.लि.(यापल) ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि नए संचालित एयरपोर्ट के रूप में हमारा मुख्य ध्यान स्थिर और विश्वसनीय परिचालन बनाए रखने के साथ चरणबद्ध तरीके से हवाई संपर्क बढ़ाने पर है।
हम अपने विमानन सहयोगियों के साथ लगातार मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि उनकी परिचालन योजनाओं और यात्रियों की मांग के अनुरूप उड़ानों के मार्गों का विस्तार किया जा सके। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं और एयरपोर्ट को लेकर हमारा दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपरिवर्तित है।
