नोएडा में 1600 करोड़ की बिजली चोरी में सिर्फ दो गिरफ्तारियां, ACP हटाए गए और थाना प्रभारी निलंबित
नोएडा में हरनंदी डूब क्षेत्र में हुए 1600 करोड़ रुपये के बिजली चोरी मामले की जांच में लापरवाही बरतने पर ...और पढ़ें

हरनंदी के डूब क्षेत्र में माफिया और ठेकेदारों द्वारा की गई 1600 करोड़ की बिजली चोरी के मामले की जांच में पेंच ही पेंच। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
एसीपी और थाना प्रभारी जांच में लापरवाही पर हटाए गए।
1600 करोड़ की बिजली चोरी मामले में सिर्फ दो गिरफ्तारियां।
बड़े माफिया और ठेकेदारों को बचाने का आरोप।
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। हरनंदी के डूब क्षेत्र में माफिया और ठेकेदारों द्वारा की गई 1600 करोड़ की बिजली चोरी के मामले की जांच में हिलाहवाली बरतने का खामियाजा जांच अधिकारी (एसीपी) और सेक्टर 63 कोतवाली प्रभारी को भुगतना पड़ा है। आरोप है कि दोनों अधिकारी समय सीमा में न तो जांच पूरी कर सकें और न ही आरोपितों की गिरफ्तारी कर सकें।
रिकवरी की भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में जुगलबंदी में शामिल यूपीपीसीएल के अधिकारी, बड़े माफिया व ठेकेदारों की गर्दन तक पुलिस के हाथ न पहुंचना भी दोनों पर कार्रवाई का कारण बना। मामले में सिर्फ ऐसे 21 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
इनकी संलिप्ता सिर्फ मकान मालिकों से बिलों की वसूली करना और लकड़ी के खंभे खड़े कर समांतर तार लाइन बनाना था। जिनकी जेब में 1600 करोड़ की धनराशि गई, उनके नाम अभी तक सामने नहीं आ सकें हैं। उनसे रिकवरी की भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
माफिया और ठेकेदारों की जेब में जाती थी रकम
बता दें कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में हरनंदी के डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध कालोनी बनी है। नियामनुसार डूब क्षेत्र में बने मकानों में बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। बिजली माफिया व ठेकेदारों ने यूपीपीसीएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर डूब क्षेत्र में लकड़ी के खंभे खड़े कर तार लाइन बिछा दी।
सरकारी तार लाइन से बिजली चोरी कर अवैध मकानों में सप्लाई दी गई। मकान मालिकों से 1000 से 1500 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते थे। प्रतिमाह करीब 50 करोड़ रुपये की वसूली होती थी। यह धनराशि सरकार के खजाने में जमा नहीं होती। यूपीपीसीएल के अधिकारी, माफिया और ठेकेदारों की जेब में जाती थी।
एफआईआर में अधिकारियों का नहीं आया नाम
स्टेट ट्रांसफाॅर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज सिंह ने मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट में बात समाने आई कि 13 हजार अवैध कनेक्शन है। कनेक्शन धारकों से बिजली के बिल के रूप में ली गई धनराशि 1600 करोड़ बताई गई। हकीकत में 60 हजार अवैध कनेक्शन है।
सूत्र बताते हैं कि लोगों से वसूला गया पैसा 18 माफिया और ठेकेदारों की जेब में गया था। यूपीपीसीएल के अधिकारियों को भी हिस्सा मिला, लेकिन इनका नाम यूपीपीसीएल द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में नहीं आया।
मामले में सिर्फ दो की गिरफ्तारी हुई
सिर्फ 21 छोटे लोगों पर कार्रवाई कर बड़े माफिया और ठेकेदारों को बचा दिया गया था। एसीपी बिसरख केके वर्मा मामले की जांच कर रहे थे। बताया जाता है कि तय समय सीमा में वह जांच पूरी नहीं कर सके। मामले में सिर्फ दो की गिरफ्तारी हुई। इससे पुलिस कमीश्नर लक्ष्मी सिंह नाराज थी। एसीपी को हटाने के साथ सेक्टर 63 कोतवाली प्रभारी अमित काकरान को भी निलंबित कर दिया।
