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सरकारी बिजली बेचकर नोएडा के डूब क्षेत्र में 1600 करोड़ के घोटाले को दिया अंजाम, कैसे होगी राजस्व घाटे की भरपाई?

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:48 AM (GMT+05:30)

नोएडा के हरनंदी डूब क्षेत्र में यूपीपीसीएल अधिकारियों, माफिया और ठेकेदारों ने मिलकर 1600 करोड़ रुपये का बिजली घोटाला किया ...और पढ़ें

HighLights

  1. नोएडा डूब क्षेत्र में 1600 करोड़ का बिजली घोटाला उजागर।

  2. यूपीपीसीएल अधिकारी, माफिया, ठेकेदार मिलकर कर रहे थे वसूली।

  3. 60 हजार अवैध कनेक्शनों से हर महीने 5 करोड़ की चोरी।

धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। नोएडा हरनंदी डूब क्षेत्र में बिजली घोटाला कर प्रदेश सरकार को 1600 करोड़ राजस्व का चूना लगाकर अपनी जेब भरने वाले यूपीपीसीएल के कुछ अधिकारी, माफिया व ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यूपीपीसीएल की नाक के नीचे 1600 करोड़ का घोटाला हो गया। बिजली चोरी के महाजाल व काले साम्राज्य में जनता लुटी व कई वर्ष से लूटती आ रही है। यह सिर्फ बिजली चोरी का केस नहीं, बल्कि सरकार की जेब में सीधा डाका है।

हर महीने 5 करोड़ की वसूली

सवाल उठ रहा है कि इतना बड़ा घोटाला हो गया व अब तक सभी बेखबर है। इसे अंजाम देने वालों की गिरेबां तक हाथ नहीं पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में सिर्फ 13 हजार अवैध कनेक्शन की रिपोर्ट गई है, जबकि हकीकत में नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक करीब 24 गांवों की भूमि पर बसी 150 अवैध कालोनियों में करीब 60 हजार अवैध कनेक्शन हैं। सरकार की बिजली चुराकर इन्हें आपूर्ति होती थी व बदले में इनसे प्रतिमाह करीब पांच करोड़ रुपये की वसूली होती थी।

विवादित क्षेत्र में कनेक्शन देने पर लगी रोक

नोएडा के हरनंदी डूब क्षेत्र में बनी अवैध कालोनियों के मकानों में बिजली के वैध कनेक्शन देने का प्रविधान नहीं था। डूब क्षेत्र की भूमि को माफिया व काॅलोनाइजरों से बचाने के लिए 2010 में तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक अग्रवाल ने जमीन के बैनामों पर रोक लगाने संग बिजली कनेक्शन न देने की भी संस्तुति प्रदेश सरकार से की थी। जिलाधिकारी की संस्तुति पर तत्कालीन मुख्य सचिव ने सरकार को पत्र भेजकर कनेक्शन देने पर रोक लगा दी।

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हरनंदी के डूब क्षेत्र में सेक्टर 123 में बने मकानों में 250 एमवीए का ट्रांसफार्मर लगाकर की जा रही थी बिजली सप्लाई। जागरण

डूब क्षेत्र में कैसे हुआ बिजली कनेक्शन का घोटाला?

इससे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण पर काफी हद तक रोक लगी, पर 2017 के बाद डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो गया। आरोप है कि यहां रहने वाले लोगों को वैध कनेक्शन न मिलने से माफिया, निजी ठेकेदारों व यूपीपीसीएल के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर एक समानांतर बिजली व्यवस्था खड़ी कर दी है।

लकड़ी के पोल खड़े कर अवैध बिजली लाइन बिछा दी। ट्रांसफार्मर लगा दिए। बिजली चोरी कर अवैध काॅलोनियों में बने घर व झुग्गियों में आपूर्ति दी गई।

ठेकेदार की ओर से हर घर मालिक से हर महीने 1000 से 1500 रुपये तक वसूले गए। यह धन सरकार के खाते में जमा न होकर ठेकेदार, माफिया व यूपीपीसीएल अधिकारियों में बंटता था। यानी बिजली सरकार की, पैसा लिया जनता से, पर सरकार को राजस्व दिया शून्य।

रुपयों की कैसे होगी रिकवरी, कब होगी कार्रवाई?

आश्चर्य तो यह है कि इतने बड़े घोटाले की जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक किसी माफिया, ठेकेदार या दोषी अधिकारी पर कार्रवाई या निलंबन तक नहीं हुआ। एफआईआर दर्ज भी हुई तो वह काफी निचले स्तर के लोगों पर।

चुप्पी से कई सवाल खड़े हैं। क्या इस रैकेट को संरक्षण मिला है? क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा खेल मुमकिन है? स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच व दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आठ से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज

"डूब क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान धन उगाही व चोरी करने वालों को चिह्नित किया है। धन उगाही में लिप्त आठ से अधिक लोगों पर केस दर्ज कराए जा चुके हैं। यहां बिजली चोरी व पैसे की वसूली करने वालों पर सख्ती व कार्रवाई के लिए निगरानी अभी बनी है।"

-वैभव सिंह, अधिशासी अभियंता, विद्युत निगम।

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