72 से घटकर 24 घंटे हुआ सफर, देश की लॉजिस्टिक्स रीढ़ बना न्यू दादरी स्टेशन; कोलकाता से मुंबई तक ढुलाई तेज
न्यू दादरी स्टेशन अब ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का महत्वपूर्ण जंक्शन बन गया है, जिससे देश भर में ...और पढ़ें

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की रीढ़ बना न्यू दादरी स्टेशन। फोटो: आर्काइव
HighLights
ईस्टर्न-वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का महत्वपूर्ण इंटरचेंज बना न्यू दादरी
माल ढुलाई का समय 72 से घटकर 24 घंटे से कम हुआ
प्रतिदिन 400 टन ई-कॉमर्स पार्सल का ट्रांजिट यहीं से
अर्पित त्रिपाठी, ग्रेटर नोएडा। डीएफसी का इंटर-कॉरिडोर गेटवे न्यू दादरी स्टेशन (गौतमबुद्ध नगर) अब देश की लाजिस्टिक्स रीढ़ बन गया है।
यह स्टेशन ईस्टर्न डेडिकेटेड (लुधियाना से दानकुनी) और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बीच का सबसे महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू (जेएनपीटी) से लेकर कोलकाता पोर्ट तक का माल निर्बाध रूप से आदान-प्रदान हो रहा है।
जेएनपीटी और गुजरात के मुंद्रा-पीपावाव पोर्ट से आने वाले आयात-निर्यात कंटेनर, औद्योगिक सामान और मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स इसी रूट से पूर्व और उत्तर भारत में भेजे जा रहे हैं।
लुधियाना-दानकुनी आर्म से आने वाला भारी बल्क मटेरियल- कोयला, स्टील, सीमेंट और कृषि उत्पाद इसी स्टेशन पर इंटरचेंज होकर पश्चिमी बंदरगाहों की ओर रवाना होता है।
प्रतिदिन 400 टन ई-कॉमर्स का पार्सल
डीएफसीसी के मुताबिक यह स्टेशन अब सिर्फ भारी उद्योग का ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता का भी केंद्र बन गया है। यहां ज्वाइंट पार्सल प्रोडेक्ट-रेपिड कार्गो सर्विस (जेपीपी-आरसीएस) संचालित है, जिसमें बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारी है।
रोजाना 350 से 400 टन पार्सल का ट्रांजिट यहीं से होता है, जो उत्तर भारत के वितरण बिंदुओं को अहमदाबाद, सूरत, पुणे, मुंबई और गोवा के केंद्रों से जोड़ता है।
एनटीपीसी दादरी पावर प्लांट के लिए समर्पित लाइन से भारी मात्रा में कोयले की आपूर्ति होती है। इसके अलावा एनसीआर के उद्योगों के लिए कच्चा माल, कोल्ड स्टोरेज लिंक से तापमान-संवेदनशील सामान और घरेलू उपभोक्ता उत्पादों की क्लीयरेंस और वितरण भी यहीं से होता है।
72 से घटकर 24 घंटे से कम हुआ सफर
माल ढुलाई के समय में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कटौती हुई है। न्यू दादरी से जेनपीटी नवी मुंबई तक पहले जहां कार्गो पहुंचने में 72 घंटे लगते थे, अब वही सफर 24 घंटे से कम में पूरा हो रहा है।
विशेष परिस्थितियों में यह समय 10 से 12 घंटे ही रह गया है। मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) तक डबल-स्टैक कंटेनर सेवा शुरू होने से रूट पर नौ घंटे की कटौती हुई है। न्यू अंचेली (गुजरात) तक करीब 1,200 किलोमीटर का सफर 23 घंटे में तय हो रहा है।
रूट पर छह साल में 20 गुना बढ़ा यातायात
डीएफसी भारतीय रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में जहां औसतन मात्र 22 ट्रेनें प्रतिदिन चलती थीं, वहीं 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 440 ट्रेन प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
यानी छह साल में 20 गुना की बढ़ोतरी। 2021-22 में सबसे अधिक 213 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आंकड़ा 64 पर पहुंचा। 2022-23 में 164 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 170 ट्रेनें, 2023-24 में 41 प्रतिशत बढ़त के साथ 241 ट्रेनें और 2024-25 में 48 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 358 ट्रेनें प्रतिदिन संचालित हुईं।
2025-26 में 406 ट्रेन और 2026-27 में अब तक औसत 440 ट्रेन आठ प्रतिशत वृद्धि के साथ दर्ज की गई हैं। अब तक ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड पर 5,35,085 ट्रेन सफर पूरा कर चुकी हैं।
यह दर्शाता है कि देश का लाजिस्टिक नेटवर्क तेजी से फ्रेट कॉरिडोर पर शिफ्ट हो रहा है और माल ढुलाई तेज हुई है।
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