ग्रेटर नोएडा [धर्मेंद्र चंदेल]। कहते हैं गुरु, गुरु ही होता है और चेला, चेला ही रह जाता है। दादरी विधायक मास्टर तेजपाल नागर ने इस कहवत को पूरी तरह से चरित्रार्थ किया है। विधायक बनने से पहले वह शिक्षक रहे हैं। क्षेत्र के तमाम वह युवा जो दादरी से भाजपा से टिकट मांग रहे थे, उनमें से अधिकांश को उन्होंने पढ़ाया था। चेलों ने टिकट लेने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। हर जगह बैनर, पाेस्टर व होर्डिंग्स लगाए। भाजपा की जन विश्वास यात्रा में भी अपनी ताकत का प्रदर्शन कर पार्टी को यह संदेश देने का प्रयास किया कि गुरु जी अब बुढ़े हो चले हैं। युवाओं के हाथ में कमान देने का समय आ गया है। टिकट के दावेदारों ने घोषणा से दो दिन पहले तक इंटरनेट मीडिया पर अपने समर्थकों से पोस्ट डलवाकर समर्थन में माहौल बनाने का प्रयास किया। तेजपाल नागर इस समय 68 वर्ष के हैं। पिछले एक वर्ष से उनका टिकट कटने की अटकलें लगाई जा रही थी। हर जगह उन्हीं के नाम की चर्चा होती थी।

दादरी में सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा अनवरण विवाद से उनके विरोधियों को आग में घी डालने का मौका मिल गया। उन्होंने मौके को भुनाने के लिए इस प्रकरण को हाथों-हाथ लिया। विधायक के सिर आरोप भी मढ़े गए। उनके घर पर जाकर भी प्रदर्शन किया गया। तभी से कयास लगाए जाने लगे थे कि अब उन्हें फिर से टिकट नहीं मिलेगा। विधायक के माथे पर भी बल पड़ने लगे थे। सार्वजनिक रूप से वह कई बार ऐसा कहते सुने गए कि पार्टी जो निर्णय लेगी, मैं स्वीकार करूंगा। आखिर में मास्टर तेजपाल नागर ने विरोधियों की हर चाल की प्रभावी ढंग से काट कर उन्हें मात देने में कामयाबी हासिल की। शनिवार को पार्टी ने उन्हें फिर से दादरी विधान सभा सीट से पार्टी का टिकट दिया है।

उनके शिष्य रहे कई दावेदारों के अरमानों पर गुरू जी ने पानी फेर दिया। अब उन्हें अपनी दावेदारी के लिए पांच वर्ष का इंतजार और करना पड़ेगा। शनिवार को जब उनके नाम की घोषणा हुई तो वह तिलपता गाेल चक्कर स्थित पार्टी के कार्यालय में मौजूद थे। घोषणा के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि मैं तो टिकट को डरा हुआ था, लेकिन जिलाध्यक्ष विजय भाटी ने मुझे टिकट मिलने का भरोसा दिया।

सांसद डाक्टर महेश शर्मा के प्रति वफादारी का मिला लाभ

विधायक तेजपाल नागर लंबे समय तक बसपा में रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में डाक्टर महेश शर्मा का उन्होंने खुलकर साथ दिया। इससे खुश होकर महेश शर्मा ने उन्हें 2017 में भाजपा में शामिल कराकर पार्टी से टिकट दिलवाया। पूरे पांच साल तेजपाल नागर गौतमबुद्धनगर के महेश शर्मा के करीबी रहे। उन्हीं के कहने पर वह अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाते रहे हैं। कभी उन्होंने महेश शर्मा के प्रति अपनी वफादारी कम नहीं की। इसी का लाभ उन्हें इस बार भी मिला। उनके टिकट कटवाने के लिए विरोधी खैमों में शामिल लोगों ने हाथ मिला लिए थे, लेकिन महेश शर्मा ने उनका साथ नहीं छोड़ा। बताया जाता है कि उनकी मजबूत पैरवी विधायक के काम आई।

दावेदारों ने विधायक को दी थी तगड़ी टक्कर

भाजपा से टिकट के दावेदारों की लंबी फहरिस्त थी। पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर, जिला पंचायत सदस्य देवा भाटी, भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष सतेंद्र अवाना, यतेंद्र नागर, बिजेंद्र प्रमुख, बिजेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, सुनील भाटी, बलराज भाटी, पवन नागर, गजेंद्र मावी, गीता पंडित, पवन त्यागी, इंदर नागर ने तगड़ी दावेदारी की टक्कर दी थी, लेकिन बाजी तेजपाल नागर के हाथ लगी।

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Edited By: Jp Yadav