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जागरण विशेष: सरकारी स्कूल की बेटियों का कमाल, 17 राज्यों की 20 छात्राएं अब अंतरिक्ष में भरेंगी उड़ान

Published: Sat, 29 Aug 2026 07:53 AM (IST)

ग्रेटर नोएडा के जीबीयू में मिशन शक्तिसैट में 17 राज्यों की 20 सरकारी स्कूल की छात्राएं अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी ...और पढ़ें

जीबीयू में आयोजित नौ दिवसीय मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में भारत के 17 राज्यों से प्रतिभाग कर रहीं 20 बेटियां हैं। एआई इमेज

जीबीयू में आयोजित नौ दिवसीय मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में भारत के 17 राज्यों से प्रतिभाग कर रहीं 20 बेटियां हैं। एआई इमेज

HighLights

  1. 17 राज्यों की 20 सरकारी स्कूल की छात्राएं अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल।

  2. मिशन शक्तिसैट में सैटेलाइट तकनीक सीखकर पेलोड बना रहीं बेटियां।

  3. आतंकवाद/नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आकर अंतरिक्ष विज्ञान में पहचान बना रहीं।

आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। प्रतिभा संसाधनों या संस्थान की सीमाओं तक सीमित नहीं होती है। इसका एक जीता-जागता उदाहरण जीबीयू में आयोजित नौ दिवसीय मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में भारत के 17 राज्यों से प्रतिभाग कर रहीं 20 बेटियां हैं। यह सभी छात्राएं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करती हैं और ग्रामीण अंचलों से आती हैं।

सरकारी स्कूलों की बदली धारणा

यह छात्राएं कई तरह की सामाजिक एवं भौगोलिक चुनौतियों का सामना करते हुए अब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं।

इन 20 छात्राओं की कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

मिशन शक्तिसैट न केवल इन छात्राओं को अंतरिक्ष के करीब ले जा रहा है, बल्कि सरकारी स्कूलों की छवि और वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की क्षमताओं को लेकर बनी धारणा को बदलने का काम भी कर रहा है।

गोलियों की गूंज के बीच से निकलीं बेटियां

जम्मू-कश्मीर के बारामूला की मरिहम तारया और छत्तीसगढ़ की रागिनी साहू आतंकवाद और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों से निकलकर एक नई कहानी लिखने को तैयार हैं। बारामूला की रहने वाली मरिहम तारया मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में हिस्सा लेकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं।

मरिहम का सपना केवल अंतरिक्ष तक पहुंचने तक सीमित नहीं है। वह अंतरिक्ष विज्ञान के माध्यम से मानवता, शांति और अमन-चैन को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहती हैं।

मरिहम ने बताया कि वह यहां तक आने का श्रेय अपने चाचा रियाज अहमदरी और प्रिंसिपल तनवीर अहमद आगा को देती हैं। इन लोगों ने लगातार देश के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया और सदैव साथ दिया। जबकि उनके पिता वाटर सप्लाई का काम करते हैं और माता गृहणी हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आपदा समाधान का सपना

छत्तीसगढ़ की रागिनी साहू भी मिशन शक्तिसैट के जरिए अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं। रागिनी ऐसे क्षेत्र से आती हैं, जहां नक्सली हिंसा की चुनौतियों के बीच विकास की राह आसान नहीं रही है।

इसके बावजूद उन्होंने विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक को अपने भविष्य का माध्यम चुना है। रागिनी का लक्ष्य आपदाओं की पहले से पहचान करने वाली तकनीक विकसित करना है। उनका मानना है कि यदि प्राकृतिक आपदाओं के बारे में समय रहते जानकारी मिल जाए तो लोगों को सुरक्षित करने और नुकसान को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

वह बताती हैं कि उनके पिता किसान हैं और उनके सामने अचानक आई आपदाओं के बाद कई समस्याएं खड़ी हो जाती हैं, पहले उनका सपना था, कि साइंस के क्षेत्र में जाकर किसानों के हित में काम करना था, लेकिन वह अब पूरे देश की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना चाहती हैं।

वह बताती हैं कि उनके गांव सुबाती कालदा में बेहतर पढ़ाई नहीं मिलने के कारण नानी के गांव महासमुंद में रहकर पढ़ाई कर रही हैं।

पहले बनना चाहती थी पत्रकार

अंडमान निवासी सुजाता बताती हैं कि उनके जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार में वह इकलौती संतान थीं, इसलिए उन्हें भाई-बहन का प्यार भी नहीं मिल पाया। उनकी मां नौकरी करती थीं, जिसके कारण उन्हें मां का पर्याप्त समय और स्नेह नहीं मिल सका।

ऐसे में नानी ने ही उनका पालन-पोषण किया और जीवन की हर मुश्किल में उनका साथ दिया। सरकारी स्कूल से पढ़ाई के दौरान उन्होंने पत्रकार बनने का सपना देखा था, लेकिन समय के साथ अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई।

मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम ने उन्हें सैटेलाइट तकनीक को करीब से समझने और उसके निर्माण की प्रक्रिया सीखने का अवसर दिया। अब सुजाता का सपना सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि अपनी उपलब्धियों के जरिए समाज में मानवता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है।

स्पेस के माध्यम से एस्ट्रोफिजिसिस्ट (खगोल भौतिकीविद्) बनना चाहती हैं और यही से अपने करियर को आगे बढ़ाना चाह रही हैं। एस्ट्रो फिजिक्स के क्षेत्र में काम करके मदरबोर्ड में बदलाव करने के साथ ही साफ्टवेयर में कई नई तकनीकी लाना चाहती हैं। वह अपना मार्गदर्शक डा. एपीजे अब्दुल कलाम को मानती हैं।

कुछ विशेष करने की कोशिश

मध्यप्रदेश के इंदौर निवासी दर्शना गोपाल शर्मा बताती हैं कि वह इंजीनियर बनना चाहती थीं। उन्हें स्पेस में मौका मिला है तो, यहां पर भी वह कंप्यूटर साइंस पर काम करके सेटेलाइट के लिए कुछ विशेष करना चाहती हैं।

इससे अंतरिक्ष में स्थापित किए जाने वाले आर्बिट से आसानी से डाटा एकत्रित किया जा सके और होने वाली परेशानियों के बारे में पहले से जानकारी हासिल की जा सकेगी, जिससे समय रहते निपटा जा सके। इनके पिता सामान्य एक कोचिंग शिक्षक हैं और माता गृहणी हैं।

इसी तरह से सिक्किम निवासी आनंदी शर्मा ने बताया कि उनके पिता संगीतकार हैं। उनकी बड़ी बहन के साथ पढ़ने वाली लड़कियां उन पर तंज कसती थीं। वह शुरू से डाक्टर बनना चाहती थी। उन्हें स्पेस में मौका मिला है तो, साइंस टेक्नोलाॅजी पर काम करेंगी और उसके माध्यम से कुछ विशेष करने की कोशिश करेंगी।

जुकेशन सिस्टम में बदलाव करने का प्रयास

बंगाल निवासी मधुमिता मादनी ने बताया कि उनके पिता एक प्राइवेट नौकरी करते हैं। जहां से आती हैं, वहां पर लड़कियों को अभी भी ज्यादा बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। वहां के माहौल की कठिन परिस्थितियों से निपटते हुए बाहर निकली हैं।

मधुमिता के जिले में आज भी लोगों को स्पेस के बारे में बहुत कम जानकारी है। वह बताती हैं कि जब उन्हें स्पेस के लिए चुना गया, तो खुद से एक पेलोड का प्रपोजल तैयार किया है, जिसे उन्होंने मिशन एयनिस्ट नाम दिया है।

इसके माध्यम से वन में होने वाली आपराधिक घटनाओं या आपदा पर नजर रखने के उद्देश्य तैयार करेंगीं। इस पेलोड में मल्ट्री स्पैक्ट्रल कैमरे का उपयोग करेंगी, जिससे वन में होने वाली हर गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उनका उपाय निकाला जा सके।

उन्होंने बताया कि इसे पीएसएलवी से प्रक्षेपित करवाकर आर्बिट में स्थापित करने का लक्ष्य लिए हैं। वह कुछ एजुकेशन सिस्टम में बदलाव करने का प्रयास करना चाहती हैं।

इन पर छात्राओं प्राप्त किया ज्ञान

मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहीं छात्राएं तैयार की जा रही दो सेटेलाइट में उपयोग होने वाले छह पेलोड के बारे में तकनीकी सत्रों में प्रतिभाग लेने के साथ ही प्रयोगात्मक भी किया है।

इसमें डेब्रिस डिटेक्शन के लिए कैमरा, माल्य पेलोड (थर्मल कैमरा) , इजिप्शन स्पेस, ड्रैग सेल, मैग्निशयम का स्ट्रक्चर बोर्ड शामिल है। इनके बारे में तकनीकि सत्रों में विस्तार से जानकारी हासिल कर अब प्रयोगात्मक काम कर रहीं हैं।

इसकी मदद से आगे आने वाले समय में अंतरिक्ष के लिए तैयार होने वाले सेटेलाइट में प्रतिभाग कर सकेंगी।एडवांस सेटेलाइट किट को वयासेट ने स्पांसर किया है।

108 देशों की कुल 1200 नारी शक्ति शामिल

कार्यक्रम में शामिल छात्राएं भारत के उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, पंजाब, सिक्किम, बंगाल, नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र चयनित हुई हैं।

यह सभी अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाली इन छात्राओं का अंतरिक्ष की ओर बढ़ता कदम सरकारी स्कूलों में प्रतिभा और संभावनाओं को सामने ला रहा है।

भारत की बेटियों की टीम को कानपुर निवासी सेवानिवृत्ति विंग कमांडर और न्यूरिजन स्पेस की सीईओ जया तारे कर रही हैं। इनके पास 12 वर्षों तक फ्लाइट उड़ाने का अनुभव हैं।

वहीं कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे अन्य 108 देशों की कुल 1200 नारी शक्ति शामिल की गई हैं। टीम सेवानिवृत्ति विंग कमांडर और न्यूरिजन स्पेस की सीईओ जया तारे के नेतृत्व में काम कर रही हैं।

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