ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 10 दिन की दक्षिण भारतीय स्वादों की दावत, इडली-डोसा से आगे मिलेगा तमिलनाडु का शाही जायका
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के फ्लेवर्स रेस्टोरेंट में 'द विरुंधु टेबल' फूड फेस्टिवल शुरू हो गया है, जो दक्षिण भारत के ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में विरुंधु टेबल फूड फेस्टिवल।
मास्टरशेफ शिवा पेश कर रहे पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन।
6 सितंबर 2026 तक चलेगा यह 10 दिवसीय उत्सव।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। दक्षिण भारतीय व्यंजनों की खासियत है कि उत्तर में भी हर कोई इनका शौकीन मिलेगा। सिर्फ इडली-डोसा नहीं उससे आगे बढ़कर वहां के पारंपरिक, स्थानीय और शाही स्वादों को आप भी सुस्वाद लेना चाहते हैं, तो इन दिनों ग्रेटर नोएडा वेस्ट आपके लिए सबसे मुफीद ठिकाना है।
द गौर सरोवर प्रीमियर के सिग्नेचर रेस्टोरेंट फ्लेवर्स में द विरुंधु टेबल फूड फेस्टिवल का शानदार आगाज हो चुका है। 28 अगस्त से शुरू हुआ यह 10 दिवसीय फूड फेस्टिवल आगामी 6 सितंबर 2026 तक चलेगा। तमिल भाषा में 'विरुंधु' का अर्थ होता है 'दावत'।
इस फेस्टिवल का उद्देश्य दिल्ली सहित एनसीआर के फूडीज को दक्षिण भारत के उन सुदूर कोनों और पारंपरिक रसोईघरों की सैर कराना है, जिनके स्वाद आमतौर पर बड़े शहरों के रेस्टोरेंट्स में नहीं मिलते।
मसालों की खुशबू और पारंपरिक माहौल
इस फूड फेस्टिवल की सबसे बड़ी खासियत इसके मास्टरशेफ, शेफ शिवा। शिवा ने दक्षिण भारत की सदियों पुरानी और लुप्त होती जा रही पारिवारिक रेसिपीज को आधुनिक अंदाज में पेश किया है।
इस उत्सव को और अधिक खास बनाने के लिए होटल प्रबंधन ने मेहमानों को सीधे शेफ से बातचीत करने, व्यंजनों के पीछे की कहानी जानने और उनके मार्गदर्शन में चुनिंदा भोजन का आनंद लेने का अनूठा अवसर मिलेगा।
जैसे ही आप होटल के 'फ्लेवर्स' रेस्टोरेंट में कदम रखते हैं, ताजे करी पत्ते, भुने हुए नारियल, हरी इलायची और चेट्टीनाड मसालों की सोंधी खुशबू आपका ऐसा स्वागत करती है कि आप सीधे आप लजीज जायकों के बीच पहुंचते हैं।
रेस्टोरेंट के माहौल को पूरी तरह से दक्षिण भारतीय रंग-रूप में ढाला गया है। पृष्ठभूमि में बजता धीमा कर्नाटक संगीत और पारंपरिक पोशाक में मुस्तैद स्टाफ मेहमानों को यह अहसास कराता है कि वे ग्रेटर नोएडा में नहीं, बल्कि चेन्नई या मदुरै के किसी शाही ठिकाने पर बैठे हैं।
दम भरता मेन्यू
मुख्य भोजन में मालाबार परांठा के साथ परोसी जाने वाली पारंपरिक चेट्टीनाड करी, खुशबूदार सांभर, अवियल और मैसूर पाक की खुशबू से महकते व्यंजन शामिल हैं। यहां की बिरयानी और विशेष रूप से तैयार की गई सुगंधित चटनियां भोजन के स्वाद को दोगुना कर देती हैं।
सिल बट्टे पर पिसी मूंगफली की चटनी में पूरा तमिल फ्लेवर है। पल्लीपलायम कोझी में शैलोट्स, देशी लाल मिर्च और नारियल का मेल इतना सटीक है कि हर निवाले में तमिलनाडु के गांव की याद आएगी। नारियल तेल में पकाई गई यह चिकन डिश साधारण पोल्ट्री करी से कोसों दूर थी।
कोंगु मटन बिरयानी लाजवाब है। सीरागा सांबा चावल में धीमी आंच पर पकाया गया मटन आपको बेहद खास लगेगा। चेट्टिनाड शैली की कोझी वरुथा करी में भुना नारियल, काली मिर्च और तमिल मसालों का तड़का जादू बनकर मिट्टी के बर्तन में आपकी टेबल पर आएगा।
वेजिटेरियन मेहमानों के लिए भी शेफ ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। रसीले टमाटर और अरहर दाल में थक्काली पप्पू की हल्की खटास, थेंगई सदम की नारियल महक और मुरुंगई मल्ली चारू की ताजगी ने थाली को संतुलित रखा। बीटरूट मुंडारी पनियारम ने पारंपरिक स्वाद को नया रंग दिया।
वेज और नान-वेज मिलाकर करीब दस खास डिशेस स्टार्टर से लेकर मेन र्स्स तक आपको टेबल पर मिलेंगी। रेस्टोरेंट में लाइव काउंटर लगाए गए हैं, जहां मेहमान अपनी पसंद के अनुसार गरमा-गरम क्रिस्पी डोसा, साफ्ट इडली और तरह-तरह के उत्तपम सीधे तवे से अपनी प्लेट में ले सकते हैं।
भोजन का अंत पारंपरिक 'फिल्टर काफी' और मुंह में घुल जाने वाले पायसम (दक्षिण भारतीय खीर) के बिना अधूरा है।
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