सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नोएडा में लोटस 300 के खरीदारों को बड़ी राहत, अब फ्लैट बेच सकेंगे और ले सकेंगे लोन
लोटस 300 परियोजना के खरीदारों को 13 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ...और पढ़ें

नोएडा सेक्टर-107 स्थित लोटस 300 सोसायटी। जागरण
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने लोटस 300 खरीदारों को पूर्ण अधिकार दिए।
13 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली बड़ी राहत।
अब फ्लैट बेच सकेंगे और उस पर लोन भी ले सकेंगे।
प्रवेंद्र सिंह सिकरवार, नोएडा। लोटस 300 परियोजना के खरीदारों को रजिस्ट्री के साथ फ्लैट पर पूरा मालिकाना हक मिल गया है। बिल्डर ने सोसायटी को अधूरा छोड़ा तो 2013 में 20 लोगों ने पहली बैठक की। माथे पर घर नहीं मिलने की चिंताएं थीं। 20 लोग साथ हुए तो अलग अलग सुझाव मिले। सुझावों से आगे बढ़ने का हौसला मिला। पहला कार्य सभी खरीदारों को ढूंढकर एकत्र करना था। यह मुश्किल कार्य दो वर्ष में पूरा हुआ।
कानूनी लड़ाई जारी रखी
खरीदारों को खोजकर 2015 में अंतिम निर्णय की वार्ता हुई। सोसायटी को सामूहिक फंड से पूरा कराने का निर्णय और उसके साथ कानूनी लड़ाई लड़ने की सहमति बनी। निवेशकों ने खुद से 35 करोड़ रुपये लगाकर अधूरे फ्लैटों का निर्माण पूरा किया। कानूनी लड़ाई जारी रखी।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चली लड़ाई में निवेशकों के हित में फैसला आया। बिल्डर के बकाया नहीं चुका पाने के बावजूद खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री तो हो रही थी, लेकिन फ्लैट बेचने और लोन लेने पर रोक थी। यह रोक दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी। कोर्ट ने इसे अब हटा दिया है। लोटस-300 मामले में न्यायालय का फैसला सबसे अलग है।
13 साल बाद मिला न्याय
13 वर्ष की लंबी लड़ाई के बाद अब खरीदारों को फ्लैट बेचने और उस पर लोन लेने के पूर्ण अधिकार मिल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोसायटी के 330 फ्लैटों में से 261 की रजिस्ट्री हो चुकी है। बाकी खरीदारों के दस्तावेज सत्यापन के प्रक्रिया में हैं। पहले रजिस्ट्रियां सशर्त थीं, जिसमें बेचने और लोन लेने पर पाबंदी थी। अब रोक हटने से मालिकों को पूरा हक मिल गया है। प्राधिकरण अब बिल्डर से वसूली करेगा। खरीदार अब सुरक्षित हैं।
इस तरह लड़ी कानूनी लड़ाई
2013 में पहली बार ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) में खरीदारों ने बिल्डर के खिलाफ शिकायत की। निदेशकों की गिरफ्तारी हुई। सशर्त जमानत हुई। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अलग बैंक खाता खुला। परियोजना पूरी करने के लिए बिल्डर को इसमें फंड देना था।
कुछ समय तक फंड देकर बिल्डर ने यह बंद दिया। बैंक की ओर से बिल्डर के खिलाफ एनसीएलटी (नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल) में शिकायत हुई। खरीदारों ने इस पर स्टे लिया। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने खरीदारों के हित में फैसला सुनाया।
सबसे पहले हाई कोर्ट से मिली थी राहत
रजिस्ट्री के लिए खरीदार हाईकोर्ट गए। फरवरी 2024 में कोर्ट ने खरीदारों की रजिस्ट्री करने के आदेश दिए। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट का आदेश यहां भी बरकरार रहा। 151 रजिस्ट्री हो चुकीं थीं। मामले में सुनवाई करते हुए सु्प्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में रजिस्ट्री तो जारी रखीं, लेकिन फ्लैट बेचने और लोन लेने पर रोक लगाई।
आठ से 25 करोड़ रुपये फ्लैट की कीमत
लोटस-300 शहर की कीमती आवासीय परियोजना में से एक है। यहां एक फ्लैट की कीमत आठ करोड़ रुपये और छह टावरों के टाॅप फ्लोर पर पेंटहाउस की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये है।
खरीदारों की कोई गलती नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा परियोजना में खरीदार जमीन और फ्लैट का पूरा पैसा बिल्डर को दे चुके हैं। प्राधिकरण को बिल्डर से वसूली करनी चाहिए। इसमें खरीदारों की कोई गलती नहीं हैं। रजिस्ट्री के साथ फ्लैट के अधिकार देने से इनको नहीं रोका जा सकता।
संयुक्त रूप से हर लडाई लडी और जीती जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने हमारे रखी हर बात और तथ्य को ठीक माना और समझा कि इसमें हमारी कोई गलती नहीं है।
-भुवन चतुर्वेदी, पूर्व एओए अध्यक्ष व कानूनी सलाहकार।
हमारे लिए यह लड़ाई बहुत जरूरी थी। यह फैसला नजीर बनेगा।
-मानव अरोड़ा, एओए उपाध्यक्ष
कानूनी तौर पर यह मामला हमारे लिए समझना सबसे ज्यादा जरूरी थी। सभी साथ मिले तो महत्वपूर्ण सलाह मिलीं। एक-एक कदम हमने कानून के दायरे में बढाया और जीत हासिल की।
-अजय अग्रवाल, कानूनी समिति के अध्यक्ष।
यह भी पढ़ें- नोएडा-गाजियाबाद से शुरू होगी यूपी की पहली एग्रीगेटर सेवा, दिल्ली-NCR में उतरेंगी 2500 EV;10000 तक बढ़ेगा फ्लीट
यह भी पढ़ें- UPITS 2026 में मिलेगा यूपी का स्वाद, एक छत के नीचे मिलेगा अयोध्या की कचौड़ी से नोएडा की बेकरी का स्वाद
