नोएडा-गाजियाबाद से शुरू होगी यूपी की पहली एग्रीगेटर सेवा, दिल्ली-NCR में उतरेंगी 2500 EV;10000 तक बढ़ेगा फ्लीट
उत्तर प्रदेश की पहली एग्रीगेटर सेवा नोएडा-गाजियाबाद से शुरू हो रही है, जिसके लिए ग्रीन एसएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
यूपी की पहली एग्रीगेटर सेवा नोएडा-गाजियाबाद से शुरू।
ग्रीन एसएम इंडिया को मिला पहला एग्रीगेटर लाइसेंस।
2500 इलेक्ट्रिक वाहन दिल्ली-एनसीआर में उतारे जाएंगे।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। नोएडा-गाजियाबाद से उत्तर प्रदेश की पहली एग्रीगेटर सेवा शुरू होने जा रही है। परिवहन विभाग ने ग्रीन एसएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को प्रदेश का पहला एग्रीगेटर लाइसेंस जारी किया है।
कंपनी शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में करीब 2500 इलेक्ट्रिक वाहन उतारेगी और फ्लीट को बढ़ाकर 10 हजार ईवी करने की योजना है। शुक्रवार को गाजियाबाद आरटीओ कार्यालय में कंपनी के 25 ईवी का पंजीकरण कराया गया है। नोएडा में भी वाहनों का पंजीकरण हुआ है।
आरटीओ प्रशासन प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी के करीब ढाई हजार ईवी विभिन्न आन डिमांड सेवाओं में इस्तेमाल हो रहे हैं।
एग्रीगेटर लाइसेंस व्यवस्था के बाद ओला, उबर, ब्लिंकिट, जोमैटो जैसी आनलाइन प्लेटफार्म कंपनियों पर संचालित होने वाले वाहनों को भी इसी नियामक व्यवस्था के दायरे में आकर अपना विवरण पंजीकृत कराना होगा। इससे परिवहन विभाग के पास इन वाहनों और चालकों का व्यवस्थित डाटाबेस तैयार हो सकेगा।
अभी स्थानीय स्तर पर ऐसा एकीकृत रिकार्ड नहीं होने से वाहनों की संख्या, चालक के दस्तावेज और सुरक्षा मानकों की निगरानी में परेशानी आती थी। अधिकारियों ने बताया कि कंपनी पहले गाजियाबाद, नोएडा और आसपास के जिलों में सेवा का विस्तार करेगी। इसके बाद अन्य जिलों में पहुंच बढ़ाई जाएगी।
प्रदेश में एग्रीगेटर सेवा के लिए पांच आवेदन आए हैं, जिनमें चार पूर्ण पाए गए हैं। लाइसेंस के लिए पांच लाख रुपये शुल्क और 25 लाख रुपये बैंक गारंटी निर्धारित है। पात्र अन्य कंपनियां भी लाइसेंस लेकर इसी व्यवस्था के तहत संचालन कर सकेंगी।
यह होता है एग्रीगेटर लाइसेंस
ऐसा डिजिटल या इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म, जो यात्रियों को चालक और वाहन से जोड़कर आन डिमांड सेवा उपलब्ध कराता है। उत्पाद, कोरियर, पैकेज और पार्सल के लिए चालक को विक्रेता या ई-कामर्स इकाई से जोड़ने की सुविधा भी इसमें शामिल है।
सुरक्षा और किराये के नियम
लाइव ट्रैकिंग, चालक का चरित्र सत्यापन, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, रिफ्रेशर ट्रेनिंग, यात्री बीमा और शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था अनिवार्य होगी। चालक को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस देना होगा। डायनेमिक किराया बेस किराये से अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही बढ़ सकेगा।
ईवी से राजस्व पर असर
ईवी को प्रदेश की नीति के तहत रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट का लाभ मिलता है। बड़े पैमाने पर ईवी पंजीकरण होने से परिवहन विभाग के राजस्व पर असर पड़ सकता है, हालांकि इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और प्रदूषण कम करना है।
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