त्योहारों से पहले पैकेजिंग उद्योग को झटका, एक हफ्ते में दो बार बढ़े क्राफ्ट पेपर के दाम; फिर बढ़ोतरी की चेतावनी
पेपर मिल मालिकों द्वारा एक सप्ताह में दो बार दाम बढ़ाने और तीसरी वृद्धि की चेतावनी से ग्रेटर नोएडा का ...और पढ़ें

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HighLights
पेपर मिलों ने एक सप्ताह में दो बार दाम बढ़ाए, तीसरी वृद्धि की चेतावनी।
कच्चे माल की कीमतों में 25-30% वृद्धि, जीएसटी अंतर से कार्यशील पूंजी प्रभावित।
ग्रेटर नोएडा का 250 करोड़ का पैकेजिंग उद्योग और 6 हजार उद्यमी संकट में।
रंजीत मिश्रा, ग्रेटर नोएडा। त्योहार से पहले पेपर मिल मालिकों ने एक सप्ताह में दो बार दाम बढ़ाकर कोरोगेटेड बाक्स उद्योग को बड़ा झटका दिया है। तीसरी बार एक रुपये प्रति किलो दाम बढ़ाने की चेतावनी जारी कर दी गई है जो सोमवार से लागू होगी।
इससे पैकेजिंग उद्योग से जुड़े उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है। उद्यमियों के अनुसार आने वाले दिनों में दामों में और इजाफा होने की आशंका है। इससे जिले में करीब 6 हजार से अधिक कोरोगेटेड बाक्स से जुड़े उद्यमी व निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
करीब 25-30 करोड़ का निर्यात यूएस व यूके को निर्यात भी होता है। जिले में हर माह करीब 250 करोड़ रुपये से अधिक काेरोगेटेड बाक्स का कारोबार पैकेजिंग मटेरियल के रूप में होता है। मिल मालिकों ने करीब सात रुपये प्रति किलो तक रेट बढ़ा दिए हैं, जिससे उद्योग का संतुलन बिगड़ने लगा है।
जीएसटी की दरों में अंतर से भी बढ़ी परेशानी
कोरोगेटेड पेपरबोर्ड बाक्स पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत किए जाने के बाद, क्राफ्ट पेपर जैसे प्रमुख कच्चे माल पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया।
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इनपुट और आउटपुट जीएसटी दरों के इस अंतर के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीएसी) जमा होकर लंबे समय तक अटक जाता है, जिससे खासतौर पर छोटे निर्माताओं की कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है।
उद्यमियों-निर्यातकों के कोट
मानक क्राफ्ट पेपर की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। हाई बीएफ क्राफ्ट पेपर की कीमतों में भी उछाल आया है।
अगस्त और सितंबर के दौरान पेपर मिलों की ओर से लगातार साप्ताहिक मूल्य वृद्धि किए जाने से पहले से कम मार्जिन पर काम कर रहे बाक्स निर्माताओं पर लागत का दबाव बढ़ गया है।- एसके चौहान, अध्यक्ष उप्र कोरोगेटेड बाक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।
7 दिन में भुगतान का दबाव
पेपर सप्लायर्स पहले जहां 30 से 60 दिन तक का क्रेडिट देते थे, वहीं अब सात दिन के भीतर भुगतान की मांग कर रहे हैं। बाक्स निर्माता अपने ग्राहकों से भुगतान में देरी का सामना कर रहे हैं।
इससे खरीद और बिक्री के बीच नकदी का अंतर बढ़ रहा है और छोटी इकाइयों की कार्यशील पूंजी पर सीधा असर पड़ रहा है।-अमित उपाध्याय, अध्यक्ष आईबीए।
कच्चे माल की महंगाई से एमएसएमई पर दोहरी मार
पिछले डेढ़ दो महीनों में क्राफ्ट पेपर की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं पालीमर, प्लास्टिक दाना, स्टील, तांबा और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।-प्रवीण रमन, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट डीएलजेएम ग्रुप।
हमारी इकाई में हर माह 20-22 लाख का पैकेजिंग मटेरियल उपयोग होता है, इनमें 15 लाख के कोरोगेटेड बाक्स शामिल हैं। हम ग्राहकों के साथ 3 से 6 माह के आर्डर पहले से पुराने रेट पर बुक हैं। ऐसे में बढ़ी हुई लागत के कारण सप्लाई चेन बनाए रखना कठिन होगा।-देवेंद्र शर्मा, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट केबी कंपोनेंट्स लिमिटेड।
हम यूएस और यूके जैसे देशों को मोनो कार्टन, हैंडमेड पेपर बैग, बटर पेपर, पेपर पाउच आदि निर्यात करते हैं। कच्चा माल व पेपर के दामों में अनिश्चितता के कारण आर्डर पूरा करने में परेशानी होने लगी। - सिमरन अत्री, निर्यातक।
