'काश वो किलकारियां फिर लौट आतीं...', 5 मौतों से पूरा गांव खामोश; झकझोर देगी मैगी कांड नोएडा की कहानी
जेवर के नगला पदम गांव में महेश, उनकी पत्नी ललिता और तीन बच्चों की दुखद मौत ने पूरे गांव को ...और पढ़ें
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पांच मौतों से पूरे गांव में पसरा सन्नाटा। जागरण
HighLights
जेवर के नगला पदम गांव में एक परिवार के पांच सदस्यों की मौत।
महेश, उनकी पत्नी ललिता और तीन मासूम बच्चों की दुखद मृत्यु।
इस हृदय विदारक घटना से पूरे गांव में गहरा मातम पसरा।
मनोज कुमार शर्मा, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने होने चाहिए, आंखों में सुनहरे सपने और होठों पर खिलखिलाती हंसी, उस उम्र में तीन मासूमों की जिंदगी का यूं थम जाना कलेजा चीर देने वाला है।
जिस घर में कभी बच्चों की किलकारियों से सुबह होती होगी, जहां उनकी नन्हीं शरारतों से आंगन गुलजार रहता होगा, वहां आज खामोशी पसरी है।
रबूपुरा के नगला पदम गांव में महेश, उनकी पत्नी ललिता और तीन बच्चों की मौत ने केवल एक परिवार को नहीं उजाड़ा, बल्कि पूरे गांव को ऐसा दर्द दिया है, जिसके सामने हर शब्द छोटा पड़ जाता है।

5 मौतों से घर उजड़ गया
महेश, उनकी पत्नी ललिता और तीन बच्चों की मौत से वह घर उजड़ गया, जहां कभी परिवार के साथ होने का एहसास रहा होगा। बच्चों की हंसी, उनकी नन्हीं शरारतें और भविष्य को लेकर बुने सपने अब उस घर की यादों का हिस्सा बन गए हैं, जिस आंगन में कभी बचपन की आहट रही होगी, वहां अब खामोशी है।
घर की चौखट वही है, लेकिन उसे आबाद रखने वाले पांचों लोग अब लौटकर नहीं आएंगे। इस परिवार की त्रासदी में माता-पिता के साथ तीनों बच्चों की जिंदगी भी हमेशा के लिए थम गई। न अब उनकी आवाज सुनाई देगी, न उनकी मासूम जिद घर में रौनक लाएगी।
पीछे रह गई हैं तो उन पलों की कल्पनाएं, जो अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। तीन मासूमों का अधूरा बचपन और एक परिवार का उजड़ जाना ऐसी पीड़ा छोड़ गया है, जिसे समय के साथ भी भुला पाना आसान नहीं होगा।

नन्हीं उम्र, अनगिनत अधूरे सपने
बच्चों के लिए माता-पिता ही उनकी पूरी दुनिया होते हैं। उनके लिए घर के मायने सुरक्षा, स्नेह और अपनापन होता है। ऐसे में एक ही परिवार के तीन बच्चों और उनके माता-पिता की मौत की घटना मन में कई सवाल खड़े करती है। आखिर वे कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिनमें एक पूरा परिवार काल के गाल में समा गया।
इस घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों के लिए यह केवल पांच मौतों की खबर नहीं, बल्कि एक परिवार के पूरी तरह उजड़ जाने की त्रासदी है। बच्चों की कम उम्र अकार लेता उनका भविष्य इस पीड़ा को और गहरा कर देता है।
