गृह क्लेश से उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार, एक साथ 5 मौतें; ग्रेटर नोएडा कांड की Inside Story
Greater Noida Five Deaths Mystery: ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा स्थित नंगला श्रीपदम गांव में गृह क्लेश के चलते एक परिवार ...और पढ़ें
-1792295291827_m.webp)
ग्रेटर नोएडा में गृह क्लेश के चलते एक परिवार के पांच लोगों की मौत। जागरण
HighLights
गृह क्लेश के कारण ग्रेटर नोएडा में पांच मौतें।
संपत्ति विवाद और बेटियों के प्रति झुकाव मुख्य कारण।
बेटों की असफलता और आर्थिक तंगी ने बढ़ाई कलह।
बृजेश सिंह तालान, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। ग्रेटर नोएडा में रबूपुरा क्षेत्र के गांव नंगला श्रीपदम में गृह क्लेश की वजह से देखते ही देखते एक परिवार पूरी तरह उजड़ गया। परिवार के पांच सदस्यों मौत की खबर ने शनिवार सुबह को पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया।
पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के अलावा क्षेत्र व गांव के लोग भी दिनभर मौत के कारणों को जानने में जुटे रहे।
कलह की नींव काफी पहले पड़ी
ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार में कलह की नींव काफी पहले ही पड़ गई थी। खेड़ी कला, नरेला दिल्ली के रहने वाले कृष्ण की शादी रबूपुरा के गांव नंगला श्रीपदम की चंद्रवती से हुई थी। शादी के बाद दंपती के दो बेटे राहुल व महेश और तीन बेटियां सपना, सुनीता व नीतू पैदा हुई।

दिल्ली में विद्युत विभाग के कर्मचारी कृष्ण की आर्थिक स्थित अच्छी थी। उनके पास खेड़ी कला में पैतृक मकान के अलावा एक अन्य मकान व प्लॉट भी थे। उन्होंने नंगला श्रीपदम में भी अपनी पत्नी के नाम से प्लॉट और करीब 10 बीघा जमीन खरीदी थी।
दोनों बेटे कामयाब नहीं हो सके
बताया कि प्लॉट लेने के बाद करीब पच्चीस साल पहले मकान भी बना लिया था। आर्थिक स्थित अच्छी होने बाद भी उनके दोनों बेटे कामयाब नहीं हो सके। दोनों बेटों व तीनों की बेटियों की शादी के बाद बड़ा बेटा राहुल अपनी पत्नी के साथ खेड़ी कला में रहता था, महेश नंगला श्रीपदम में रहता था। चंद्रवती ज्यादातर नंगला श्रीपदम में महेश के पास ही रहती थी।

परिवार में कलह की शुरुआत
बेटों के कामयाब न होने की वजह से परिवार में कलह रहने लगी और माता-पिता का रूझान अपनी बेटियों की तरफ ज्यादा रहने लगा। आर्थिक तंगी व माता-पिता के व्यवहार की वजह से बड़े बेटे राहुल की वर्ष 2019 में मौत हो गई। उसका शव रेल ट्रैक पर मिला था।

राहुल की पत्नी नीरज अपनी बेटी रितिका व बेटा रितिक के साथ खुर्जा में रहने लगी। वह किसी पाटरी में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन पोषण करने लगी। बाद में उसने दूसरी शादी भी कर ली।
लोगों का कहना है कि दूसरे पति से भी उसने एक बेटे को जन्म दिया। कुछ समय बाद वह अपने पति से अलग रहने लगी। दूसरा बेटा महेश भी कोई काम नहीं करता था। ज्यादातर मोबाइल पर कोई गेम आदि में ही लगा रहता था। जिसकी वजह से चंद्रवती ने नंगला श्रीपदम स्थित मकान को भी अपनी बेटी के नाम कर दिया।

बताया जाता है कि दिल्ली की संपत्ति को भी इससे पूर्व में बेटियों के नाम कर दिया था। जमीन के मुआवजे की रकम को भी बेटियों में बांट दिया था।
बहनों के लालच ने किया आग में घी डालने का काम किया। माता-पिता से उपहार में मिल रही संपत्ति को बेटियां बटोरती रही और परिवार में क्लेश बढ़ता रहा।

तीन वर्ष पूर्व भी किया था आत्महत्या का प्रयास
पड़ोसियों की माने तो महेश ने करीब तीन वर्ष पूर्व भी जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। समय पर उपचार मिलने की वजह से उसकी जान बच गई थी। पड़ोसियों ने बताया कि महेश जिक्र करता था कि उसके पास ऐसा जहर है, जो थोड़ी देर में ही जान ले लेता है।
