सड़क हादसे रोकने के लिए बड़ी पहल, बेहतर रोड डिजाइन ऑडिट पर जोर
केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को कम करने के लिए रोड सेफ्टी ऑडिटर्स के प्रशिक्षण को भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
आईएएचई, नोएडा को रोड सेफ्टी प्रशिक्षण की जिम्मेदारी मिली।
सड़क डिजाइन खामियों से होने वाले 30% हादसे कम होंगे।
प्रशिक्षण गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा इंडियन रोड कांग्रेस (IRC)।
चेतना राठौर, नोएडा। देश में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं और सड़क निर्माण में डिजाइन संबंधी खामियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। देशभर में 30 प्रतिशत तक सड़क हादसे रोड डिजाइनिंग की खामी के कारण होते हैं।
यह आंकड़े सरकार के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं, इसीलिए अब सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने रोड सेफ्टी आडिटर्स को प्रशिक्षण को एकरूप और गहन बनाने के लिए नोएडा स्थित भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी (आइएएचई) को सौंपी है।
इसके पहले देश में आइएचएचई, केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआइ) और आइआइटी दिल्ली व रुड़की समेत 13 संस्थान रोड सेफ्टी आडिटिंग के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे थे। इनसे अब यह जिम्मेदारी लेकर एक केंद्रीय संस्थान आइएएचई को सौंपी गई है।
सड़क सुरक्षा एवं अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला देश में रोड डिजाइनिंग को सुरक्षित व मानक के अनुरूप बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। केवल आइएएचई के पास रोड सेफ्टी आडिटर्स के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी होने से देशभर में प्रशिक्षण में एकरूपता आएगी।
आईएएचई की विशेषज्ञता
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पहले भले ही अन्य संस्थान भी प्रशिक्षण दे रहे थे, लेकिन आइएएचई की इसमें विशेषज्ञता है और उसका प्रशिक्षण माड्यूल काफी गहन और बेहतर है। इससे निश्चित ही डिजाइन की आडिटिंग का काम बेहतर होगा।
देश में जब लगातार हाईवे और एक्सप्रेसवे का संजाल बढ़ रहा है, वाहनों की संख्या और रफ्तार बढ़ रही है, तो रोड डिजाइनिंग का सटीक होना पहली शर्त है। इस फैसले से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलने की आस बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षित आडिटर्स सड़क डिजाइनिंग की खामियों को समय रहते पहचानकर हादसों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
डिजाइन आडिट में सीधी सड़क, घुमावदार मार्ग, पुल, पुलिया के अलावा तेज ढलान और गड्ढे आदि कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने पर काम किया जाता है। सही आडिट न हो पाने की स्थिति में यह कमियां सड़कों पर रह जाती हैं और नतीजा मार्ग दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है।
सफल आडिटर्स को ही आइआरसी की मान्यता
आइएएचई से मिली जानकारी के अनुसार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और सीआरआरआइ व आइआइटी के बीच रोड सेफ्टी आडिटर्स के प्रशिक्षण को लेकर हुआ एमओयू तीन वर्ष पहले समाप्त हो चुका है। मंत्रालय ने प्रशिक्षण की पूरी जिम्मेदारी आरएएचई को सौंप दी है और बाकी संस्थानों के एमओयू का नवीनीकरण नहीं करने का फैसला किया है।
मंत्रालय ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह नियम भी बनाया है कि आइएएचई से प्रशिक्षण के बाद इंडियन रोड कांग्रेस (आइआरसी) रोड सेफ्टी आडिटर्स की परीक्षा और साक्षात्कार लेकर तय करेगा कि प्रशिक्षण प्रभावी रहा या नहीं।
इसमें सफल आडिटर्स को ही आइआरसी की मान्यता मिलेगी, जिससे सड़क सुरक्षा आडिट की गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
डिजाइन की खामियां बन रहीं मौत का कारण
सीआरआरआइ के पूर्व मुख्य विज्ञानी और नेशनल कौंसिल आफ एप्लाईड इकोनामिक रिसर्च (एनसीएईआर) के वरिष्ठ सलाहकार डा. एस वेलुमुरुगन के अनुसार, सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय खराब सड़क डिजाइन से होने वाले हादसों का अलग आंकड़ा जारी नहीं करता, लेकिन सड़क की गलत इंजीनियरिंग, घटिया निर्माण, ब्लैक स्पाट, गड्ढे और डिजाइन संबंधी खामियां देश में होने वाली करीब 30 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।
देश में हर वर्ष करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.5 से 1.7 लाख लोगों की जान चली जाती है। इनमें बड़ी संख्या उन हादसों की होती है, जिनकी वजह सड़क निर्माण और डिजाइन की खामियां होती हैं।
अकादमी पहले से ही रोड सेफ्टी आडिटर्स को प्रशिक्षण देती रही है। अब मंत्रालय ने अकादमी को फिर से इस अहम कार्य की जिम्मेदारी सौंपी है। हम रोड डिजाइन आडिटिंग के प्रशिक्षण को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आलोक कुमार पांडे, डायरेक्टर, आइएएचई
