मौत की दहलीज तक कैसे पहुंचा परिवार, आशियाना छीनने से आहत था महेश; ग्रेटर नोएडा की 5 मौतों का जिम्मेदार कौन?
Greater Noida Five Deaths Mystery: ग्रेटर नोएडा के नगला श्रीपदम गांव में एक परिवार के 5 सदस्यों की संदिग्ध मौत ...और पढ़ें
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ग्रेटर नोएडा में पांच मौतों का मामला। AI जनरेटेड
HighLights
ग्रेटर नोएडा में एक परिवार के पांच सदस्यों की संदिग्ध मौत।
पैतृक मकान बहन के नाम होने से महेश था काफी आहत।
ऑनलाइन गेमिंग की लत और कर्ज भी मौत का संभावित कारण।
गजेंद्र पांडेय, ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में रबूपुरा क्षेत्र के नगला श्रीपदम गांव में दंपती और तीन बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के कारणों को लेकर ग्रामीणों में तमाम तरह की चर्चाएं हैं।
बताया जा रहा है कि मां चंद्रावती ने छह माह पहले पैतृक मकान, जिसमें महेश पत्नी व तीनों बच्चों के साथ रह रहा था, बड़ी बेटी सुनीता के नाम कर दिया था। इसकी महेश को भनक नहीं लगी थी।
बताया कि तीन माह पहले सुनीता ने मकान में बिजली का कनेक्शन अपने नाम कराकर मीटर लगवाते हुए कब्जे का दावा कर दिया था। इसके बाद से महेश काफी आहत था। मां व बहन से काफी विवाद भी हुआ था।

घर छीनने से परेशान था महेश
यह भी चर्चा है कि महेश ऑनलाइन गेम में दांव लगाता था, उसने कुछ लोगों से कर्ज भी ले रखा था। परिवार का आशियाना छिनने व कर्ज के कारण भी वह काफी परेशान था।
शुक्रवार को पत्नी ललिता ही तीनों बच्चों के साथ मेला देखने गई थी। इस दौरान महेश और चंद्रावती ही घर में थे। पत्नी व बच्चें के आने के बाद ही मैगी खाने व चाय पीने के बाद सभी सो गए थे।

तीनों बहनों की हो चुकी शादी
रेलवे में कार्यरत दिल्ली के खेड़ाकला गांव निवासी कृष्ण की शादी चंद्रावती से हुई थी। चंद्रावती चार भाइयों में एकलौती बहन थीं। वह मायके नगला श्रीपदम में ही रहती थीं। चंद्रावती व कृष्णा के दो बेटे और तीन बेटियां थीं। दोनों भाइयों व तीनों बहनों की शादी हो चुकी थी।

भाइयों की बुराई करती थीं बहनें
ग्रामीणों का कहना है कि बड़ा बेटा राहल और महेश दोनों ही कोई कामधंधा नहीं करते थे, वह पूरी तरह से पिता कृष्ण पर ही आश्रित थे। जेब खर्च समेत अन्य जरूरतों के लिए कृष्णा व चंद्रावती से रुपये मांगते थे। मांग पूरी नहीं होने पर दोनों माता-पिता से विवाद करते थे। इसी का फायदा उठाते हुए तीनों बहनों ने माता-पिता से दोनों भाइयों की बुराई करती थी।
बहनों ने इसी बात का लाभ उठाते हुए चुपके-चुपके माता-पिता से नगदी, मकान समेत अन्य संपत्ति हासिल कर ली। महेश के पास बस मकान ही बचा था, जो चंद्रावती के नाम था। छह माह पहले वह भी मां ने सुनीता के नाम कर दिया था।

वहीं, तीन माह पहले इसकी जानकारी के बाद से महेश का मां व बहनों के साथ विवाद गहरा गया। चर्चा है कि बहन ने मकान खाली करने की बात कही थी।
पैतृक संपत्ति के रूप में अंतिम सहारा भी छिनने से वह आहत था। फिलहाल महेश ने आत्महत्या की या साजिश रच कर हत्या हुई, पुलिस जांच पूरी होने पर ही पता चलेगा।
पहले से ही प्लानिंग की आशंका
ग्रामीणों में यह भी चर्चा है कि मकान भी बहन के नाम होने के बाद से महेश गुम रहने लगा था। ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि उसने परिवार समेत आत्मघाती कदम उठाने की पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी।
ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से ही कोई जहरीला पदार्थ मंगाया। पत्नी व बच्चों के मेला जाने के दौरान ही उसने मैगी में जहरीला पदार्थ मिला दिया। पुलिस आसपास के दुकानदारों से भी पूछताछ कर रही है।

ललिता के मायके वालों ने भी लगाया आरोप
ललिता के मायके वालों का आरोप है कि महेश और परिवार को मारने में उसकी मां और बहनों की साजिश है। महेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वह मेहनत मजदूरी करता था। उसका बड़ा बेटा और बेटी गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे। महेश की भाभी नीरज ने सास, नंद और नंदोई पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि परिवार में ननदों के हसतपेक्ष के कारण ही उसके पति राहुल ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या थी। पति की मौत के बाद उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया गया था।
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