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हवेलिया नाले के जर्जर पुल की जगह बनेगा 3-लेन का नया ओवरब्रिज, 2 हादसों के बाद जागा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

Published: Tue, 11 Aug 2026 08:51 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पी-3 गोलचक्कर के पास हवेलिया नाले पर नया पुल बनाने की प्रक्रिया तेज कर रहा है, जिसके ...और पढ़ें

नया ओवरब्रिज बनाया जाएगा। फोटो: एआई जनरेटेड

नया ओवरब्रिज बनाया जाएगा। फोटो: एआई जनरेटेड

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। शहर में आवागमन को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर पी-3 गोलचक्कर के पास हवेलिया नाले पर नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है।

प्राधिकरण ने इसके लिए 1.90 करोड़ रुपये की पहली किस्त सिंचाई विभाग को जारी कर दी है। निर्माण कार्य अक्टूबर में मानसून समाप्त होने के बाद शुरू होने की उम्मीद है।

परियोजना विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह पुल सेक्टर ओमेगा-एक से सूरजपुर-कासना मार्ग होते हुए पी-3 गोलचक्कर की तरफ आने वाली लेन पर बनाया जाएगा।

रात को पुल से गुजरना था खतरनाक

वर्तमान में यहां वर्षों पहले बना पाइप का पुल सकरा और जर्जर हो चुका है। इसकी वजह से हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। रात में इस पुल से गुजरना और भी खतरनाक हो जाता है। पुल निर्माण में तेजी लाने के पीछे हाल की दो दुखद घटनाएं भी हैं।

जनवरी में नोएडा में एक निर्माणाधीन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में डूबने से साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता और बीते माह ग्रेटर नोएडा की कलाधाम सोसायटी में बोरिंग के गड्ढे में डूबने से 6 साल के बच्चे अव्यान की मौत हो गई थी।

इन घटनाओं के बाद सीईओ एनजी रवि कुमार ने पुल निर्माण में तेजी के निर्देश दिए थे। यह नाला सिंचाई विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए कोई भी काम करने से पहले विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है।

विभाग ने कार्यदायी संस्था के चयन के लिए दोबारा निविदा प्रक्रिया शुरू की है। पहले जारी निविदा में सिर्फ एक फर्म ने आवेदन किया था। उम्मीद है कि एक से डेढ़ महीने में संस्था का चयन कर लिया जाएगा।

नए पुल की लागत करीब 7.70 करोड़ रुपये अनुमानित है। पहले चरण के लिए 1.90 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। पाइप वाले पुल की जगह 28 मीटर लंबा और 10.5 मीटर चौड़ा तीन लेन का नया पुल बनेगा। इसे पी-3 गोलचक्कर से सेक्टर ओमेगा-एक की तरफ जाने वाली लेन पर बने पुल के बराबर ऊंचा रखा जाएगा, ताकि जलभराव और जल जमाव की समस्या न हो।

- एके सिंह, जीएम,  प्रोजेक्ट 

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