ग्रेटर नोएडा में एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट लेकिन ट्रामा सेंटर की कमी, प्राइवेट अस्पतालों में रेफर हो रहे मरीज
ग्रेटर नोएडा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के बावजूद, जिले में ट्रामा सेंटर का अभाव है। जिसकी वजह से सड़क हादसों ...और पढ़ें

रबुपुरा में कानूनी दांवपेंच में अटका पड़ा ट्रामा सेंटर। जागरण आर्काइव
HighLights
ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय पहचान के बावजूद ट्रामा सेंटर नहीं।
सड़क हादसों के घायलों को दिल्ली या निजी अस्पतालों में रेफर।
रबूपुरा में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर जमीन विवाद के कारण अटका।
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। जिले की पहचान जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन चुकी है, वहीं दूसरी ओर सड़क हादसे के घायलों को ट्रामा सेंटर की सुविधा तक नहीं मिल पा रही है।
इस कारण इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को दिल्ली या आसपास के प्राइवेट अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इससे कई बार गंभीर मरीजों की जान पर खतरा भी बन आता है।
जेब पर पड़ रहा अधिक बोझ
ट्रामा सेंटर नहीं होने की वजह से मरीजों और उनके स्वजन को परेशानियों का सामना करता पड़ता है। साथ ही जेब पर अधिक खर्च का बोझ भी बढ़ता है। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार कई बार उपचार कराने के लिए सक्षम नहीं होते हैं।
हर साल अकेले जिम्स (GIMS)में ट्रामा के चार से छह हजार के बीच पहुंचते हैं, इनमें से लगभग एक हजार ऐसे मामले रहते हैं, जिन्हें उपचार के लिए अन्य हायर सेंटर में रेफर किया जाता है।
प्रदेश की आर्थिक राजधानी में ट्रामा सेंटर नहीं
बता दें कि एशिया का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर में बन चुका है। इसके चलते लगातार औद्योगिक गतिविधियों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बन रही है। साथ ही जिले को प्रदेश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता
है।
इसके अलावा जिले में जिला अस्पताल, चाइल्ड पीजीआइ से लेकर राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) तक मौजूद हैं, लेकिन गंभीर सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं के मरीजों के लिए अभी तक अलग ट्रामा सेंटर की सुविधा नहीं मिल रही है।
जमीन के कारण अटका मामला
शासन की ओर से रबूपुरा में ट्रामा सेंटर प्रस्तावित किया गया था, लेकिन जमीन से जुड़े मामले को लेकर एक पक्ष की ओर से दायर याचिका के बाद मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
ऐसे में परियोजना की आगे की कार्रवाई प्रभावित है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में ट्रामा सेंटर की सुविधा का अभाव अभी भी बना हुआ है।
गंभीर मरीजों के लिए समय सबसे अहम
गौतमबुद्ध नगर में यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, एनएच 34, एनएच नौ समेत अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे मरीजों को विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होने पर दूसरे केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। इससे उपचार शुरू होने में लगने वाला समय बढ़ सकता है।
क्या है व्यवस्था?
जिम्स में 24 घंटे इमरजेंसी और इमरजेंसी मेडिसिन एवं ट्रामा केयर की सुविधा उपलब्ध है। विभाग में ट्राइएज, रिससिटेशन एरिया, माइनर आपरेशन थिएटर और 30 बेड की व्यवस्था बताई जाती है. हालांकि अलग और पूर्ण विकसित ट्रामा सेंटर की सुविधा अभी तक नहीं है।
